<?xml version='1.0' encoding='UTF-8'?><?xml-stylesheet href="http://www.blogger.com/styles/atom.css" type="text/css"?><feed xmlns='http://www.w3.org/2005/Atom' xmlns:openSearch='http://a9.com/-/spec/opensearchrss/1.0/' xmlns:georss='http://www.georss.org/georss' xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'><id>tag:blogger.com,1999:blog-6956958984171538532</id><updated>2011-04-21T16:18:33.135-07:00</updated><title type='text'>HINDI SAHITY SABHA</title><subtitle type='html'></subtitle><link rel='http://schemas.google.com/g/2005#feed' type='application/atom+xml' href='http://hindisahity.blogspot.com/feeds/posts/default'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6956958984171538532/posts/default?max-results=100'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://hindisahity.blogspot.com/'/><link rel='hub' href='http://pubsubhubbub.appspot.com/'/><link rel='next' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6956958984171538532/posts/default?start-index=101&amp;max-results=100'/><author><name>नरेन्द्र निर्मल</name><uri>http://www.blogger.com/profile/16479213514036313208</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_qw0JRiWRDZU/SXyW6w_AHBI/AAAAAAAAAH0/QBx-PMdEfB4/S220/narendra+pic.JPG'/></author><generator version='7.00' uri='http://www.blogger.com'>Blogger</generator><openSearch:totalResults>130</openSearch:totalResults><openSearch:startIndex>1</openSearch:startIndex><openSearch:itemsPerPage>100</openSearch:itemsPerPage><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-6956958984171538532.post-69161919223818022</id><published>2011-03-06T19:04:00.001-08:00</published><updated>2011-03-06T19:04:15.743-08:00</updated><title type='text'>JANOKTI : जनोक्ति</title><content type='html'>&lt;style type="text/css"&gt;                          h1 a:hover {background-color:#888;color:#fff ! important;}                          div#emailbody table#itemcontentlist tr td div ul {                                         list-style-type:square;                                         padding-left:1em;                         }                                  div#emailbody table#itemcontentlist tr td div blockquote {                                 padding-left:6px;                                 border-left: 6px solid #dadada;                                 margin-left:1em;                         }                                  div#emailbody table#itemcontentlist tr td div li {                                 margin-bottom:1em;                                 margin-left:1em;                         }                           table#itemcontentlist tr td a:link, table#itemcontentlist tr td a:visited, table#itemcontentlist tr td a:active, ul#summarylist li a {                                 color:#000099; 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&lt;/a&gt; &lt;/h1&gt; &lt;/td&gt; &lt;td width="1%" /&gt; &lt;/tr&gt; &lt;/table&gt; &lt;hr style="border:1px solid #ccc;padding:0;margin:0" /&gt; &lt;ul style="clear:both;padding:0 0 0 1.2em;width:100%" id="summarylist"&gt; &lt;li&gt; &lt;a href="#1"&gt;लिव इन रिलेशनशिप : एक बहस&lt;/a&gt; &lt;/li&gt; &lt;li&gt; &lt;a href="#2"&gt;नई सदी में नारी&lt;/a&gt; &lt;/li&gt; &lt;li&gt; &lt;a href="#3"&gt;उड़ चली नारी&lt;/a&gt; &lt;/li&gt; &lt;li&gt; &lt;a href="#4"&gt;व्यंग्य बाण: क्रिकेट के विशेषज्ञ&lt;/a&gt; &lt;/li&gt; &lt;li&gt; &lt;a href="#5"&gt;पाक ध्वज में काल कल्वित- सफ़ेद रंग&lt;/a&gt; &lt;/li&gt; &lt;/ul&gt; &lt;table id="itemcontentlist"&gt; &lt;tr xmlns=""&gt; &lt;td style="margin-bottom:0;line-height:1.4em;"&gt; &lt;p style="margin:1em 0 3px 0;"&gt; &lt;a name="1" style="font-family:Arial, Helvetica, sans-serif;font-size:18px;" href="http://feedproxy.google.com/~r/janokti/pfzK/~3/nRaa11KLdCE/?utm_source=feedburner&amp;utm_medium=email"&gt;लिव इन रिलेशनशिप : एक बहस&lt;/a&gt; &lt;/p&gt; &lt;p style="font-size:13px;color:#555;margin:9px 0 3px 0;font-family:Georgia,Helvetica,Arial,Sans-Serif;line-height:140%;font-size:13px;"&gt; &lt;span&gt;Posted:&lt;/span&gt; 06 Mar 2011 06:06 PM PST&lt;/p&gt; &lt;div style="margin:0;font-family:Georgia,Helvetica,Arial,Sans-Serif;line-height:140%;font-size:13px;color:#000000;"&gt;&lt;blockquote&gt;&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt; &lt;p&gt;&lt;img class="alignnone" src="http://www.deccanchronicle.com/files/Want-to-live-in--Get-proo-170709.pjpeg" alt="" width="400" height="300" /&gt;&lt;br /&gt; राजधानी दिल्ली के खबरिया हलकों में इन दिनों फ़िर एक लडकी की लाश केंद्र में है । पुलिस , मीडिया और आम आदमी अपने ताने बाने बुन रहा है हालांकि मीडिया पुलिस के काम में से स्टोरी और आम आदमी उस स्टोरी का मतलब समझने में लगे हुए हैं लेकिन इन सबसे अलग मुझे एक बात फ़िर बहुत जोर से चुभ रही है कि एक बार फ़िर ..वही ..एक लडकी । फ़िर । अभी बहुत समय नहीं बीता है जब दिल्ली की एक लडकी की मौत ( जी हां मैं निरूपमा की ही बात कर रहा हूं , जिसे आज मीडिया आपने निजि स्वार्थों और शायद और भी कुछ विशेष कारणों से भूल कर बैठा है ) ने पहले लिव इन रिलेशनशिप को फ़िर औनर किलिंग जैसे शब्दों की भारतीय समाज में पैठ और उसके परिणामों या कहिए कुपरिणामों की तरफ़ ध्यान खींचा था । और जिस तेजी से इस तरह की घटनाओं में वृद्धि हुई है और भविष्य में होती दिख रही है , उससे दो बातें तो बिल्कुल स्पष्ट है । पहली ये कि पश्चिम से आयातित होने वाली ये तमाम अपसंस्कृतियां यदि कल को भारतीय समाज में आत्मसात भी हो जाती हैं तो भी कम से कम संचालक संस्कृति तो कतई नहीं बन पाएगी | दूसरी और ज्यादा महत्वपूर्ण ये कि , पत्रकार और राजनीति में अपना भविष्य देखने वाली महिलाएं भी बार बार जब शिकार के रूप में शोषित शापित होने को मजबूर हैं तो फ़िर इन नियमों के लागू होने से नोरी की परिवर्तित स्थिति का जो प्रोपैगैंडा देखा दिखाया जा रहा है उसकी असलियत यहां खुल कर सामने आ जाती है ।&lt;/p&gt; &lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt; &lt;p&gt;.&lt;br /&gt; यहां सवाल ये नहीं है कि लिव इन रिलेशनशिप और समलैंगिकतो या इस जैसा ही कोई व्यवहार जो कि पश्चिमी देशों से ही आयातित होकर आया है । यहां मेरा ईशारा ये वर्तमान में चले रही मुहिमों और दलीलों से है ..नहीं तो बहस उठाने वाले इस बात को उठाते रहे हैं कि लिव इन रिलेशनशिप , समलैंगिकता , मदर सरोगेसी , और ऑनर किलिंग तक का वजूद भारतीय समाज में भी पहले से रहा है । किंतु ये जो यकायक इन परंपराओं को कानूनी मान्यता और सामाजिक स्वीकृति दिलाने की मुहिम चल निकली है ..वो पुरातन वजूद निश्चित रूप से इसके लिए जिम्मेदार नहीं होंगे । इन्हें आज के हालातों और तेजी से बदलने को उद्धत शहरी समाज ने ही इसके लिए इन्हें प्रेरित किया होगा , और कर रहा है । सोच कर देखिए न कि फ़ायर और दोस्ताना जैसी पिक्चरों को बनाने का प्रयोग पहले क्यों नहीं किया गया ?&lt;/p&gt; &lt;p&gt;.&lt;/p&gt; &lt;p&gt;हाल ही में दि्ल्ली की एक सुशिक्षित , तेज़ तर्रार , राजनीति हलके में द्खल रखने वाली नवयुवती की लाश बोरे में लावारिस पडी रेलवे स्टेशन से बरामद होती है । क्या उस युवती ने या इस तरह की घटनाओं का शिकार बन जाने वाली तमाम निरूपमाओं और नीतू सोलंकियों ने उस मर जाने वाली स्थिति तक पहुंचने से पहले खुद के लडने का कोई माद्दा नहीं दिखाया , कोई कोशिश नहीं की । ऐसा भी नहीं है कि इस तरह का दु:साहस नहीं हुआ होगा क्योंकि अभी हाल ही में एक विधायक को सरे आम कत्ल करने वाली महिला ने कम से कम अपनी पुत्री को हवस का शिकार होने से तो बचा ही लिया । तो क्या उस वक्त को आने मे समय है जब खबरें कुछ इस तरह की होंगी कि प्यार में धोखा खाई प्रताडित कुछ युवतियों ने अमुक को कुत्ते की मौत मार डाला । ये भी नहीं है कि इन नई परंपराओं ने हमेशा और सिर्फ़ मुश्किलें ही खडी की हैं और परिवर्तन भी शाश्वत सत्य है । लेकिन इसके बावजूद खुद को बदल रहे और अपने बदलाव पर ठसक से इतराते समाज को इस बात का जवाब तो देना ही होगा कि आखिर मौत का कसौटी पर सिर्फ़ &amp;#8230;उस आधी दुनिया के लोग ही क्यों चढाएं जाएं । आज भी किसी ने मां ने , किसी पत्नी ने , किसी बहन ने अपने उस पति , भाई , बेटे को गोली से नहीं उडाते सुना मैंने जो कि बलात्कार जैसे घृणित अपराध तक में शामिल हो और वाकई उसका गुनाहगार भी ।&lt;/p&gt; &lt;p&gt;.&lt;br /&gt; असल में भारतीय परिवेश और सामाजिक संरचना कुछ इस तरह की है और अब तक बनी हुई है कि उसमें इस तरह के प्रयोगों के प्रति दोहरा नज़रिया रहेगा ही । उदाहरण देखते हैं &amp;#8230;&amp;#8230;.प्रेम दिवस को जो युवक किसी युवती से प्रेम निवेदन करता प्रसन्न दिखाई देता है ..उसी युवक को यदि उसकी बहन भी किसी और से ऐसा ही प्रणय निवेदन सुन कर आग बबूला हो उठता है &amp;#8230;क्यों ? कारण स्वाभाविक है और स्पष्ट भी । परिवर्तन , बदलाव , नई संस्कृति हर कोई चाहता है ऐसा कि हो ? लेकिन वही हर कोई ..अपनी बहन की शादी में अपनी बिटिया की शादी में समाज को दहेज जैसी घटिया प्रथा के लिए कोसता है मगर अपने बेटे की शादी का वक्त आते ही उसे जमाने का वो दस्तूर बताता है जिसे निभाया जाना जिंदगी का सबसे बडा मकसद है । इसलिए ये हो सकता है कि आज के युवा वर्ग को बरसों से चली आ रही इन प्रथाओं से एक उकताहट सी हो रही है और कभी जानबूझकर तो कभी अनजाने ही उस सीमा को ठोकर मार कर तोडने पर उतारू है । हो सकता है कि ये दृष्टिकोण इन परंपराओं को सही ठहराने वालों को एक वाजिब कारण दिखता हो और शायद इसीलिए न्यायालय ने भी इन्हीं मानवीय पक्षों को ही देख कर इन्हें कानूनी जामा पहनाने की अनुमति दी है । लेकिन यदि ये सब फ़िर इतना ही ठीक ठीक सा है तो फ़िर आखिर हर थोडे से अंतराल के बाद इसका कोई ऐसा ही परिणां देखने को क्यों मिल रहा है , समाज को ये तो सोचना ही होगा ।&lt;/p&gt; &lt;p&gt;ये नई परंपराएं जो भारतीय समाज की सदियों से मान्य रही परंपराएं और रीतियां थीं , उनको कदम कदम पर चुनौती देती हुई सी लगती हैं , लेकिन सबसे बडी चुनौती ये साबित हो रही है कि आज भी इन्हें समाज ने आत्मसात करना तो दूर रहा , बेझिझक , बेहिचक स्वीकारने को तैयार नहीं है । कहीं कोई किसी अपने/अपनी का कत्ल सिर्फ़ इस वजह से कर देता है कि वो बिना शादी के ही मां बनने का दु:साहस कर बैठी है , तो कोई उसका ही कत्ल कर दे रहा है जिसके साथ ही चल कर उसने कभी इस समाज की वर्जनाओं को लांघा था । लेकिन दोनों ही सूरतों में मुझे कत्ल हो जाने वाली वो युवती ही छली जाती हुई महसूस होती है । तो इसलिए यदि कोई ये कहता है कि ये नई परंपराएं नारी पुरूष की स्थिति को बहुत हद तक बदल रहा है तो मैं हटात ही इत्तेफ़ाक नहीं रख पाता इस बात से । मुझे मेरा कार्यालयीय अनुभव और सामने आए मुकदमे भी मुझे जब हकीकत से रूबरू कराते हैं तो एक बार फ़िर मैं इन नईं परंपराओं के पक्ष में दी जा रही दलीलों को नए सिरे से समझने की कोशिश करता हूं ..और इस बीच एक नई नीतू , एक नई निरूपमा मारी जा चुकी होती है ..सिलसिला बदस्तूर जारी है&lt;/p&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;div class="feedflare"&gt; &lt;a href="http://feeds.feedburner.com/~ff/janokti/pfzK?a=nRaa11KLdCE:dC5Ympi_mbI:yIl2AUoC8zA"&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~ff/janokti/pfzK?d=yIl2AUoC8zA" border="0"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt; &lt;/div&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/janokti/pfzK/~4/nRaa11KLdCE?utm_source=feedburner&amp;utm_medium=email" height="1" width="1"/&gt;&lt;/div&gt; &lt;/td&gt; &lt;/tr&gt; &lt;tr&gt; &lt;td style="margin-bottom:0;line-height:1.4em;"&gt; &lt;p style="margin:1em 0 3px 0;"&gt; &lt;a name="2" style="font-family:Arial, Helvetica, sans-serif;font-size:18px;" href="http://feedproxy.google.com/~r/janokti/pfzK/~3/O6kzI3qLqhM/?utm_source=feedburner&amp;utm_medium=email"&gt;नई सदी में नारी&lt;/a&gt; &lt;/p&gt; &lt;p style="font-size:13px;color:#555;margin:9px 0 3px 0;font-family:Georgia,Helvetica,Arial,Sans-Serif;line-height:140%;font-size:13px;"&gt; &lt;span&gt;Posted:&lt;/span&gt; 06 Mar 2011 08:54 AM PST&lt;/p&gt; &lt;div style="margin:0;font-family:Georgia,Helvetica,Arial,Sans-Serif;line-height:140%;font-size:13px;color:#000000;"&gt;&lt;p style="text-align: justify;"&gt;&lt;a rel="attachment wp-att-14115" href="http://www.janokti.com/discussion-suggestions-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%ae%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b6/%e0%a4%a8%e0%a4%88-%e0%a4%b8%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%80/attachment/491/"&gt;&lt;img class="alignleft size-full wp-image-14115" title="491" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/491.jpg" alt="" width="255" height="197" /&gt;&lt;/a&gt;पश्चिमी जगत के पुरुष विरोधी रूप से उभरा नारी मुक्ति संघर्ष आज व्यापक मूल्यों के पक्षधर के रूप में अग्रसर हो रहा है । यह मानव समाज के उज्जवल भविष्य का संकेत है। बीसवीं सदी का प्रथमार्ध यदि नारी जागृति का काल था तो उत्तरार्ध नारी प्रगति का । इक्कीसवी सदी का यह महत्वपूर्ण पूर्वार्ध नारी सशक्तीकरण का काल है। आज सिर्फ पश्चिम में ही नहीं वरन विश्व के पिछड़े देशों में भी नारी घर से बाहर खुली हवा में सांस लेरही है , एवं जीवन के हर क्षेत्र में पुरुषों से भी दो कदम आगे बढ़ा चुकी है। अब वह शीघ्र ही अतीत के उस गौरवशाली पद पर पहुँच कर ही दम लेगी जहां नारी के मनुष्य में देवत्व व धरती पर स्वर्ग की सृजिका तथा सांस्कृतिक चेतना की संबाहिका होने के कारण समाज 'यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता ' का मूल मन्त्र गुनुगुनाने को बाध्य हुआ था ।&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;नारी की आत्म विस्मृति , दैन्यता व पराधीनता के कारणों में विभिन्न सामाजिक मान्यताएं व विशिष्ट परिस्थितियाँ रहीं हैं , जो देश ,काल व समाज के अनुसार भिन्न भिन्न हैं। पश्चिम के दर्शन व संस्कृति में नारी सदैव पुरुषों से हीन , शैतान की कृति,पृथ्वी पर प्रथम अपराधी थी। वह पुरोहित नहीं हो सकती थी । यहाँ तक कि वह मानवी भी है या नहीं ,यह भी विवाद का विषय था। इसीलिये पश्चिम की नारी आत्म धिक्कार के रूप में एवं बदले की भावना से कभी फैशन के नाम पर निर्वस्त्र होती है तो कभी पुरुष की बराबरी के नाम पर अविवेकशील व अमर्यादित व्यवहार करती है।&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;पश्चिम के विपरीत भारतीय संस्कृति व दर्शन में नारी का सदैव गौरवपूर्ण व पुरुष से श्रेष्ठतर स्थान रहा है। 'अर्धनारीश्वर ' की कल्पना अन्यंत्र कहाँ है। भारतीय दर्शन में सृष्टि का मूल कारण , अखंड मातृसत्ता दृ अदिति भी नारी है। वेद माता गायत्री है। प्राचीन काल में स्त्री ऋषिका भी थी, पुरोहित भी। व गृह स्वामिनी,  अर्धांगिनी, श्री, समृद्धि आदि रूपों से सुशोभित थी। कोइ भी पूजा, यग्य, अनुष्ठान उसके बिना पूरा नहीं होता था। ऋग्वेद की ऋषिका -शची पोलोमी कहती है अहं केतुरहं मूर्धाहमुग्रा विवाचानी । ममेदनु क्रतुपतिरू सेहनाया उपाचरेत ऋग्वेद&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;अर्थात -मैं ध्वजारूप (गृह स्वामिनी ),तीब्र बुद्धि वाली एवं प्रत्येक विषय पर परामर्श देने में समर्थ हूँ । मेरे कार्यों का मेरे पतिदेव सदा समर्थन करते हैं । हाँ , मध्ययुगीन अन्धकार के काल में बर्बर व असभ्य विदेशी आक्रान्ताओं की लम्बी पराधीनता से उत्पन्न विषम सामाजिक स्थिति के घुटन भरे माहौल के कारण भारतीय नारी की चेतना भी अज्ञानता के अन्धकार में खोगई थी।&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;नई सदी में नारी को समाज की नियंता बनने के लिए किसी से अधिकार माँगने की आवश्यकता नहीं है, वरन उसे अर्जित करने की है। आरक्षण की वैशाखियों पर अधिक दूर तक कौन जासका है । परिश्रम से अर्जित अधिकार ही स्थायी संपत्ति हो सकते हैं। परन्तु पुरुषों की बराबरी के नाम पर स्त्रियोचित गुणों व कर्तव्यों का बलिदान नहीं किया जाना चाहिए। ममता, वात्सल्य, उदारता, धैर्य,लज्जा आदि नारी सुलभ गुणों के कारण ही नारी पुरुष से श्रेष्ठ है। जहां ' कामायनी ' का रचनाकार " नारी तुम केवल श्रृद्धा हो" से नतमस्तक होता है, वहीं वैदिक ऋषि घोषणा करता है कि-"३.स्त्री हि ब्रह्मा विभूविथ " उचित आचरण, ज्ञान से नारी तुम निश्चय ही ब्रह्मा की पदवी पाने योग्य हो सकती हो। ( ऋग्वेद )।&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;नारी मुक्ति व सशक्तीकरण का यह मार्ग भटकाव व मृगमरीचिका से भी मुक्त नहीं है। नारी -विवेक की सीमाएं तोड़ने पर सारा मानव समाज खतरे में पड़ सकता है। भौतिकता प्रधान युग में सौन्दर्य की परिभाषा सिर्फ शरीर तक ही सिमट जाती है। नारी मुक्ति के नाम पर उसकी जड़ों में कुठाराघात करने की भूमिका में मुक्त बाजार व्यवस्था व पुरुषों के अपने स्वार्थ हैं । परन्तु नारी की समझौते वाली भूमिका के बिना यह संभव नहीं है। अपने को 'बोल्ड' एवं आधुनिक सिद्ध करने की होड़ में, अधिकाधिक उत्तेजक रूप में प्रस्तुत करने की धारणा न तो शास्त्रीय ही है और न भारतीय । आज नारी गरिमा के इस घातक प्रचलन का प्रभाव तथाकथित प्रगतिशील समाज में तो है ही, ग्रामीण समाज व कस्बे भी इसी हवा में हिलते नजर आ रहे हैं। नई पीढी दिग्भ्रमित व असुरक्षित है। युवतियों के आदर्श वालीवुड व हालीवुड की अभिनेत्रियाँ हैं। सीता, मदालसा, अपाला,लक्ष्मी बाई ,जोन ऑफ आर्क के आदर्श व उनको जानना पिछड़ेपन की निशानी है।&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;इस स्थिति से उबरने का एकमात्र उपाय यही है कि नारी अन्धानुकरण त्याग कर ,भोगवादी संस्कृति से अपने को मुक्त करे। अपनी लाखों , करोड़ों पिछड़ी अनपढ़ बेसहारा बहनों के दुखादर्दों को बांटकर उन्हें शैक्षिक , सामाजिक, व आर्थिक स्वाबलंबन का मार्ग दिखाकर सभी को अपने साथ प्रगति के मार्ग पर अग्रसर होना सिखाये । तभी सही अर्थों में सशक्त होकर नारी इक्कीसवीं सदी की समाज की नियंता हो सकेगी ।&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt; &lt;div class="feedflare"&gt; &lt;a href="http://feeds.feedburner.com/~ff/janokti/pfzK?a=O6kzI3qLqhM:uC2ajw2YMwE:yIl2AUoC8zA"&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~ff/janokti/pfzK?d=yIl2AUoC8zA" border="0"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt; &lt;/div&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/janokti/pfzK/~4/O6kzI3qLqhM?utm_source=feedburner&amp;utm_medium=email" height="1" width="1"/&gt;&lt;/div&gt; &lt;/td&gt; &lt;/tr&gt; &lt;tr&gt; &lt;td style="margin-bottom:0;line-height:1.4em;"&gt; &lt;p style="margin:1em 0 3px 0;"&gt; &lt;a name="3" style="font-family:Arial, Helvetica, sans-serif;font-size:18px;" href="http://feedproxy.google.com/~r/janokti/pfzK/~3/yzZx1f2gwvE/?utm_source=feedburner&amp;utm_medium=email"&gt;उड़ चली नारी&lt;/a&gt; &lt;/p&gt; &lt;p style="font-size:13px;color:#555;margin:9px 0 3px 0;font-family:Georgia,Helvetica,Arial,Sans-Serif;line-height:140%;font-size:13px;"&gt; &lt;span&gt;Posted:&lt;/span&gt; 06 Mar 2011 07:31 AM PST&lt;/p&gt; &lt;div style="margin:0;font-family:Georgia,Helvetica,Arial,Sans-Serif;line-height:140%;font-size:13px;color:#000000;"&gt;&lt;p&gt;&lt;a rel="attachment wp-att-14104" href="http://www.janokti.com/art-literature-%e0%a4%95%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af/poem-hindi-%e0%a4%95%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a4%be/%e0%a4%89%e0%a4%a1%e0%a4%bc-%e0%a4%9a%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%80/attachment/nari-2/"&gt;&lt;img class="alignleft size-medium wp-image-14104" title="nari" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/nari-250x300.jpg" alt="" width="175" height="210" /&gt;&lt;/a&gt;घर की चारदिवारी,&lt;br /&gt; घुटती नारी,&lt;br /&gt; बोतल में-&lt;/p&gt; &lt;p&gt;बंद सी,&lt;br /&gt; सहती पीड़ा,&lt;br /&gt; सदियों से,&lt;/p&gt; &lt;p&gt;पुस्तक पोथी,&lt;br /&gt; ने बतलाया,&lt;br /&gt; कारण?&lt;/p&gt; &lt;p&gt;अज्ञान का साया,&lt;br /&gt; पढ़ डालीं पुस्तकें,&lt;br /&gt; तोड़ीं जंजीरें.&lt;/p&gt; &lt;div&gt; &lt;p&gt;ज्ञान से,&lt;/p&gt; &lt;p&gt;आलोकित,&lt;br /&gt; पुंज प्रकाश,&lt;br /&gt; असीमित आकाश,&lt;/p&gt; &lt;p&gt;तोड़ के चारदिवारी,&lt;/p&gt; &lt;p&gt;उड़ चली नारी.&lt;/p&gt; &lt;/div&gt; &lt;div class="feedflare"&gt; &lt;a href="http://feeds.feedburner.com/~ff/janokti/pfzK?a=yzZx1f2gwvE:leVlP1EWIAY:yIl2AUoC8zA"&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~ff/janokti/pfzK?d=yIl2AUoC8zA" border="0"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt; &lt;/div&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/janokti/pfzK/~4/yzZx1f2gwvE?utm_source=feedburner&amp;utm_medium=email" height="1" width="1"/&gt;&lt;/div&gt; &lt;/td&gt; &lt;/tr&gt; &lt;tr&gt; &lt;td style="margin-bottom:0;line-height:1.4em;"&gt; &lt;p style="margin:1em 0 3px 0;"&gt; &lt;a name="4" style="font-family:Arial, Helvetica, sans-serif;font-size:18px;" href="http://feedproxy.google.com/~r/janokti/pfzK/~3/YegaRU3ui3Q/?utm_source=feedburner&amp;utm_medium=email"&gt;व्यंग्य बाण: क्रिकेट के विशेषज्ञ&lt;/a&gt; &lt;/p&gt; &lt;p style="font-size:13px;color:#555;margin:9px 0 3px 0;font-family:Georgia,Helvetica,Arial,Sans-Serif;line-height:140%;font-size:13px;"&gt; &lt;span&gt;Posted:&lt;/span&gt; 06 Mar 2011 07:22 AM PST&lt;/p&gt; &lt;div style="margin:0;font-family:Georgia,Helvetica,Arial,Sans-Serif;line-height:140%;font-size:13px;color:#000000;"&gt;&lt;p&gt;&lt;a rel="attachment wp-att-14097" href="http://www.janokti.com/art-literature-%e0%a4%95%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af/satire-%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%82%e0%a4%97/%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%a3-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a5%87%e0%a4%9f-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b5%e0%a4%bf/attachment/criket/"&gt;&lt;img class="alignleft size-medium wp-image-14097" title="criket" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/criket-300x278.jpg" alt="" width="300" height="278" /&gt;&lt;/a&gt;भारत देवी-देवताओं और अवतारों का ही नहीं, विशेषज्ञों का भी देश है। हर व्यक्ति किसी न किसी बात का विशेषज्ञ होता है। यदि कहीं दस लोग एक साथ बैठे हों, तो उनमें चिकित्सा, ज्योतिष, शिक्षा, पर्यावरण, राजनीति और फिल्म का कम से कम एक-एक विशेषज्ञ अवश्य होगा। हर गांव या बिरादरी में दो-चार रिश्ते कराने और तुड़वाने के विशेषज्ञ भी होते हैं।&lt;/p&gt; &lt;p&gt;कुछ विशेषज्ञ किसी विशेष मौसम में कुकुरमुत्ते की तरह उग आते हैं। आपकी रुचि न हो, तब भी वे 'झाड़े रहो कलक्टरगंज' की तर्ज पर जबरन विशेषज्ञता झाड़ने लगते हैं। यह देखकर कभी-कभी तो  उन्हें बनाने वाले भगवान पर ही तरस आने लगता है।&lt;/p&gt; &lt;p&gt;खेती में सैकड़ों प्रयोग करने के बाद बर्बाद हो चुके रामलाल कृषि विशेषज्ञ हैं, तो व्यापार में सब कुछ लुटाकर चाट बेच रहे श्यामलाल उद्योगों के विशेषज्ञ। तीन पत्नियों को तलाक दे चुके जगमोहन परिवार समन्वय का बोर्ड लगाकर लोगों को सलाह दे रहे हैं, तो शादी की उम्र को 25 साल पहले पार कर चुके मनमोहन रिश्ते मिलाने की दुकान खोले हैं।&lt;/p&gt; &lt;p&gt;फटी चटाई पर अपने तोते के साथ जमे कालेराम धन कमाने के मंत्र बताते हैं, तो झोपड़ी में बैठे गोरेमल वास्तुशास्त्र के सिद्धांत। ऐसे लोगों के लिए ही काका हाथरसी ने कभी 'नाम बड़े पर दर्शन छोटे' नामक प्रसिद्ध कविता लिखी थी। आजकल विश्व कप क्रिकेट का दौर है, इसलिए उसके विशेषज्ञ रुपये में चार मिल रहे हैं।&lt;/p&gt; &lt;p&gt;परसों मैं किसी काम से शर्मा जी के घर गया, तो वे अपने परम मित्र वर्मा जी से गंभीर चर्चा में व्यस्त थे।&lt;/p&gt; &lt;p&gt;- क्यों वर्मा जी, आपका क्या विचार है, इस बार क्रिकेट का विश्व कप कौन जीतेगा ?&lt;/p&gt; &lt;p&gt;- इसमें भी कोई सोचने की बात है। इस समय दुनिया भर में अमरीका की तूती बोल रही है, इसलिए वही जीतेगा।&lt;/p&gt; &lt;p&gt;- पर अमरीका तो इस प्रतियोगिता में भाग ही नहीं ले रहा ?&lt;/p&gt; &lt;p&gt;- तो फिर चीन का दावा मजबूत सिद्ध होता है। अब तो अर्थजगत में उसने जापान को भी पछाड़ दिया है।&lt;/p&gt; &lt;p&gt;- वर्मा जी, क्रिकेट के बारे में आप बहुत कम जानते हैं। अमरीका की तरह चीन भी गुलामों वाला यह खेल नहीं खेलता।&lt;/p&gt; &lt;p&gt;- देखिये, आप यह आरोप न लगाएं। क्रिकेट के बारे में जितना मैं जानता हूं, उतना शहर में कोई नहीं जानता होगा। यदि अमरीका और चीन इस बार प्रतियोगिता में भाग नहीं ले रहे, तब तो सीधी सी बात है, जो टीम अधिक गोल करेगी, वही कप ले जाएगी।&lt;/p&gt; &lt;p&gt;- अपने दिमाग का इलाज कराओ वर्मा जी। क्रिकेट में हार-जीत रन से होती है, गोल से नहीं।&lt;/p&gt; &lt;p&gt;- आप चाहे जो कहें; पर यह निश्चित है कि जो देश इस प्रतियोगिता में भाग ले रहे हैं, उनमें से ही कोई कप जीतेगा।&lt;/p&gt; &lt;p&gt;- पर आपने भारत की संभावनाओं के बारे में कुछ नहीं बताया ?&lt;/p&gt; &lt;p&gt;- इस बारे में मुझे बड़ी निराशा है। टीम में ऐसे लोग रखने चाहिए, जो आवश्यकता होने पर कप छीन सकंें।&lt;/p&gt; &lt;p&gt;- क्या मतलब ?&lt;/p&gt; &lt;p&gt;- मतलब यह कि यदि महाबली खली को टीम का कप्तान बनाया जाता, तो विपक्ष के आधे खिलाड़ी बिना खेले ही मैदान छोड़ जाते।&lt;/p&gt; &lt;p&gt;- कैसे ?&lt;/p&gt; &lt;p&gt;- उसके बल्ले की मार से गेंद इतनी दूर जाती कि दूसरी टीम वालों को उसे वापस लाने में कई घंटे लग जाते। तब तक वह सैकड़ों रन बना लेता; पर कप्तान बना दिया धोनी को।&lt;/p&gt; &lt;p&gt;- धोनी का लोहा तो पूरी दुनिया मान रही है वर्मा जी ?&lt;/p&gt; &lt;p&gt;- खाक मान रही है। इससे अच्छा तो किसी धोबी को बना देते। उसके धोबीपाट दांव के आगे सब घुटने टेक देते। खली के साथ सुशील पहलवान और मुक्केबाज विजेन्द्र को भी लेना चाहिए था।&lt;/p&gt; &lt;p&gt;- तुमसे तो बात करना बेकार है। तुम क्रिकेट को पहलवानी समझ रहे हो। इसमें ताकत नहीं, तकनीक काम आती है।&lt;/p&gt; &lt;p&gt;- नाराजगी थूक दो शर्मा जी। आजकल जमाना ताकत का ही है। भले ही वह शरीर की हो या पैसे की, सत्ता की हो या गुटबाजी की। ज्ञान की हो विज्ञान की। तकनीक का ही दूसरा नाम तिकड़म है। जिसके पास तिकड़म है, वह अंदर है और बाकी बाहर। सत्ता के गलियारों से लेकर दलाल स्ट्रीट के कारोबार और क्रिकेट की टीम से लेकर गुलाममंडल खेल के भ्रष्टाचार तक यही सत्य है।&lt;/p&gt; &lt;p&gt;वर्मा जी की इस 'गुगली' से शर्मा जी 'क्लीन बोल्ड' हो गये। मैं भी 'हिट विकेट' या 'एल.बी.डब्ल्यू' होने की बजाय 'नो ब१ल' का संकेत करते हुए 'गली' से निकलकर 'बाउंड्री पार' हो गया। मेरी रुचि भी आम जनता की तरह सस्ते राशन में है, विश्व कप में नहीं।&lt;/p&gt; &lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt; &lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt; &lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt; &lt;div class="feedflare"&gt; &lt;a href="http://feeds.feedburner.com/~ff/janokti/pfzK?a=YegaRU3ui3Q:JJMDdZ1M-2U:yIl2AUoC8zA"&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~ff/janokti/pfzK?d=yIl2AUoC8zA" border="0"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt; &lt;/div&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/janokti/pfzK/~4/YegaRU3ui3Q?utm_source=feedburner&amp;utm_medium=email" height="1" width="1"/&gt;&lt;/div&gt; &lt;/td&gt; &lt;/tr&gt; &lt;tr&gt; &lt;td style="margin-bottom:0;line-height:1.4em;"&gt; &lt;p style="margin:1em 0 3px 0;"&gt; &lt;a name="5" style="font-family:Arial, Helvetica, sans-serif;font-size:18px;" href="http://feedproxy.google.com/~r/janokti/pfzK/~3/vFdvNLuQ2m8/?utm_source=feedburner&amp;utm_medium=email"&gt;पाक ध्वज में काल कल्वित- सफ़ेद रंग&lt;/a&gt; &lt;/p&gt; &lt;p style="font-size:13px;color:#555;margin:9px 0 3px 0;font-family:Georgia,Helvetica,Arial,Sans-Serif;line-height:140%;font-size:13px;"&gt; &lt;span&gt;Posted:&lt;/span&gt; 06 Mar 2011 07:08 AM PST&lt;/p&gt; &lt;div style="margin:0;font-family:Georgia,Helvetica,Arial,Sans-Serif;line-height:140%;font-size:13px;color:#000000;"&gt;&lt;p&gt;&lt;a rel="attachment wp-att-14092" href="http://www.janokti.com/government-failure-%e0%a4%85%e0%a4%82%e0%a4%a7%e0%a5%87%e0%a4%b0-%e0%a4%a8%e0%a4%97%e0%a4%b0%e0%a5%80/%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%95-%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%9c-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%95%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a4-%e0%a4%b8%e0%a4%ab/attachment/pak/"&gt;&lt;img class="alignleft size-full wp-image-14092" title="pak" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/pak.jpg" alt="" width="170" height="128" /&gt;&lt;/a&gt;पाक  के  इकलौते अल्पसंख्यकों के मंत्री शाहबाज़ भट्टी की दिन दिहाड़े हत्या कर पाक के कट्टरवादी मुसलामानों ने सारे विश्व को एक स्पष्ट सन्देश दे दिया है. यह सन्देश है की पाक में कुरआन और मुहम्मद को न मानाने वालों के लिए कोई स्थान नहीं. भट्टी पाक के एक मात्र ईसाई मंत्री थे. भट्टी  ईशनिंदा क़ानून के मुखालिफ थे जिसे पाक में अल्पसंख्यकों को प्रताड़ित करने में प्रयुक्त किया जाता रहा है. इसे कुफ्र क़ानून से भी जाना जाता है. पाक में इस्लाम के पैरोकार कुफ्र और काफ़िर को मिटाने वाले को गाजी कह कर सम्मानित करते  है. पंजाब के गवर्नर सलमान तासीर की हत्या करने वाले बाड़ी  गार्ड को भी गाजी के रूप में सम्मानित किया गया.&lt;/p&gt; &lt;p&gt;एक और तो पाक के प्रधान मंत्री युसूफ रज़ा गिलानी अल्पसंख्यकों की सलामती के बड़े बड़े दावे करते हुए फरमा  रहे हैं कि पाक के राष्ट्र ध्वज का सफ़ेद हिस्सा अल्पसंख्यकों का प्रतीक है.  गिलानी ने ईशनिंदा क़ानून में फेर बदल से भी इनकार किया और इस कानून के कारन अल्पसंख्यकों के पलायन को भी बेवजह बताया. गिलानी ने दावा किया की इंडोनेशिया में कोई ईशनिंदा कानून नहीं फिर भी गैर मुसलमान मुल्क छोड़ कर जा रहे हैं. &amp;#8211; गिलानी के इस ब्यान से ज़ाहिर है की मुस्लिम बहुल देश जहाँ कुरआन और शरिया का कानून नासिर है वहां काफिरों के लिए सहज जीवन जीना मुहाल है.? दूसरी ओर आंतरिक  सुरक्षा मंत्री रहमान मालिक साफ़ साफ़ शब्दों में आगाह कर  रहे हैं कि &amp;#8216;हमारे मुल्क में सिविल वार से खून खराबा होना तय है. पिछले दिनों पाक के ६६ वर्षीय हिन्दू विधायक ने पाक से भाग कर भारत में शरण ली. पाक में कुफ्र के नाम पर बढ़ रही अल्पसंख्यकों की कठिनाईयों  पर ईसाई सांसद अकरम मसीह गिल ने कहा कि सबसे कठिन दौर में हैं अल्पसंख्यक- उन्हें अंधी गली में धकेला जा रहा है. प्रसिद्ध लेखिला तसलीमा नसरीन ने तो यहाँ तक कह दिया कि सभी अल्पसंख्यकों को पाक छोड़ देना चाहिए. तसलीमा नसरीन ने अपने ट्वीट पर &amp;#8216;अब तीसरा कौन&amp;#8217; आशंका भी ज़ाहिर की. भाट्टी की हत्या के बाद ,नयूक्लेअर सईन्स्दा ,निबंधकार,राजनैतिक रक्षा विश्लेषक व् काय्देआज़म  युनिवर्सटी -इस्लामाबाद में फिजिक्स विभाग की मुखिया डॉ.प्रोफ. परवेज़ हूद भाई ने &amp;#8216; पाक के भविष्य पर गहरी चिंता जताई .&lt;/p&gt; &lt;p&gt;ईशनिंदा या कुफ्र के क़ानून के तहत जन . जिया उल हक़ के समय से अब तक ६०० काफिरों पर केस दर्ज हुए &amp;#8211; कुछ को तो जेल में ही मौत के घाट उतार दिया गया. पाक में आम हिन्दू या ईसाई की तो बात छोडो शाहबाज़  भट्टी  और अकरम मसीह गिल जैसे मंत्री व् सांसद भी पाक के मुस्लिम समाज में अपने ईसाई नाम के साथ नहीं रह सकते उन्हें भी मुस्लिम नाम रखने पड़ते हैं.&lt;/p&gt; &lt;p&gt;गत छह दशकों में पाक में इस्लाम और मुहम्मद के नाम पर अल्पसंख्यकों पर इस कदर जुल्मोसितम ढाए गए की लगभग ३५ मिलियन अल्पसंख्यक यातो मार दिए गए या फिर अपनी जान बचाने के लिए मुसलमान हो गए और बहुत सारे पाक छोड़ भाग गए. आंकड़े गवाह हैं &amp;#8211; १९४७ में जब जिन्ना ने सेकुलर इस्लामिक राज्य की स्थापना की और अल्पसंख्यकों के जान ओ माल और धर्म की पूरी हिफाज़त का वायदा किया तो उस वक्त पाक में २४% अल्पसंख्यक थे और कुल आबादी थी ३० मिलियन . २०१० आते आते आबादी तो हो गई १७०&lt;/p&gt; &lt;p&gt;मिलियन  अर्थात ५ गुना से अधिक और अल्प संख्यक रह गए मात्र   ३% जिसमें १.५% हिन्दू और १.५% ईसाई हैं और यह संख्या भी तेज़ी से घट रही है.&lt;/p&gt; &lt;p&gt;मानवाधिकार के ठेकेदार और भारत के सेकुलर शैतान &amp;#8216;हिन्दुओं   और ईसाइओ   &amp;#8216;  पर पाक में हो रहे अमानवीय  अत्याचारों  पर अपराधिक  चुप्पी  साधे  हुए हैं . और तो और पाक में ईश  निंदा  के नाम पर हो रही राजनैतिक हत्याओं  पर भारत के किसी  भी कांग्रेसी  या कौम्नष्ट  ने एक शब्द  नहीं बोला  &amp;#8230;.. पांच  राज्यों  में होने जा रहे चुनावों में कहीं मुस्लिम वोट बैंक  न फिसल जाएं !!!!!!!&lt;/p&gt; &lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt; &lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt; &lt;div class="feedflare"&gt; &lt;a href="http://feeds.feedburner.com/~ff/janokti/pfzK?a=vFdvNLuQ2m8:UrIb2HoPWaE:yIl2AUoC8zA"&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~ff/janokti/pfzK?d=yIl2AUoC8zA" border="0"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt; &lt;/div&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/janokti/pfzK/~4/vFdvNLuQ2m8?utm_source=feedburner&amp;utm_medium=email" height="1" width="1"/&gt;&lt;/div&gt; &lt;/td&gt; &lt;/tr&gt; &lt;/table&gt; &lt;table style="border-top:1px solid #999;padding-top:4px;margin-top:1.5em;width:100%" id="footer"&gt; &lt;tr&gt; &lt;td style="text-align:left;font-family:Helvetica,Arial,Sans-Serif;font-size:11px;margin:0 6px 1.2em 0;color:#333;"&gt;You are subscribed to email updates from &lt;a href="http://www.janokti.com"&gt;JANOKTI : जनोक्ति :  राज-समाज और जन की आवाज&lt;/a&gt; &lt;br /&gt;To stop receiving these emails, you may &lt;a href="http://feedburner.google.com/fb/a/mailunsubscribe?k=dYtSEolrkS-K8ShJPEJPwgGa3hs"&gt;unsubscribe now&lt;/a&gt;.&lt;/td&gt; &lt;td style="font-family:Helvetica,Arial,Sans-Serif;font-size:11px;margin:0 6px 1.2em 0;color:#333;text-align:right;vertical-align:top"&gt;Email delivery powered by Google&lt;/td&gt; &lt;/tr&gt; &lt;tr&gt; &lt;td colspan="2" style="text-align:left;font-family:Helvetica,Arial,Sans-Serif;font-size:11px;margin:0 6px 1.2em 0;color:#333;"&gt;Google Inc., 20 West Kinzie, Chicago IL USA 60610&lt;/td&gt; &lt;/tr&gt; &lt;/table&gt; &lt;/div&gt; &lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6956958984171538532-69161919223818022?l=hindisahity.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://hindisahity.blogspot.com/feeds/69161919223818022/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://hindisahity.blogspot.com/2011/03/janokti_06.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6956958984171538532/posts/default/69161919223818022'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6956958984171538532/posts/default/69161919223818022'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://hindisahity.blogspot.com/2011/03/janokti_06.html' title='JANOKTI : जनोक्ति'/><author><name>नरेन्द्र निर्मल</name><uri>http://www.blogger.com/profile/16479213514036313208</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_qw0JRiWRDZU/SXyW6w_AHBI/AAAAAAAAAH0/QBx-PMdEfB4/S220/narendra+pic.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-6956958984171538532.post-7114295275446458676</id><published>2011-03-05T19:32:00.001-08:00</published><updated>2011-03-05T19:32:52.531-08:00</updated><title type='text'>JANOKTI : जनोक्ति</title><content type='html'>&lt;style type="text/css"&gt;                          h1 a:hover {background-color:#888;color:#fff ! important;}                          div#emailbody table#itemcontentlist tr td div ul {                                         list-style-type:square;                                         padding-left:1em;                         }                                  div#emailbody table#itemcontentlist tr td div blockquote {                                 padding-left:6px;                                 border-left: 6px solid #dadada;                                 margin-left:1em;                         }                                  div#emailbody table#itemcontentlist tr td div li {                                 margin-bottom:1em;                                 margin-left:1em;                         }                           table#itemcontentlist tr td a:link, table#itemcontentlist tr td a:visited, table#itemcontentlist tr td a:active, ul#summarylist li a {                                 color:#000099; 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वैसे देश के जागरूक युवा वर्ग के चलते आज नहीं तो कल बाहुबलियों का पराभव होना ही है। गणतंत्र के लिए ऐसा होना आवश्यक भी है क्योंकि कोई भी गणतंत्र गुंडातंत्र होकर ज्यादा दिनों तक नहीं टिक सकता। आज की जो स्थिति है उसमें जिस तरह से बड़े-बड़े घोटाले सामने आ रहे हैं और उनमें जिस तरह से मंत्री स्तर तक के लोगों को जुडा पाया जा रहा है, वह एक ऐसे गणतंत्र के लिए जो दुनिया में एक अनोखी मिसाल है,एक तरह से खतरे की घंटी है। जनता कर के रूप में जो धन देती है उसकी किस कदर लूट मची है, इसके एक नहीं अनेक उदाहरण हाल के दिनों में सामने आये हैं। चाहे राष्ट्रमंडल खेलों का घोटाला हो या भी टू जी स्पेक्ट्रम की नीलामी में ली गयी करोड़ों की घूस, ये सारे मामले देश को कठघरे में ला खड़ा करते हैं। सत्य, अहिंसा और सदाचार की मूर्ति रहा भारत, कभी विश्वगुरु कहा जाने वाला भारत आज कहां है? जिसके मंत्री तक घूस के कीचड़ में गले तक डूबे हों उसमें गर्व करने के लिए क्या बचा रह जाता है?मानाकि सरकार ने देश की जनता को सूचना का अधिकार जैसा ब्रह्मास्त्र देकर बड़ा ही पुनीत कार्य किया है,इसके चलते जनता को प्रशासन या सरकार के किये धत्कर्म पर उंगली उठाने का साहस और जरिया तो मिला है लेकिन बावजूद इसके भ्रष्टाचारियों के हौसले पस्त नहीं हुए। वे सीना ठोंक कर जनता के धन को लूट रहे हैं और देश को बेच रहे हैं। देश आज किस बात पर गर्व करे?क्या इन लुटेरों पर जो सरकारी साधन बेचने में घूस खा कर अपनी ही सरकार को करोड़ों का चूना लगा रहे हैं? क्या उन पर जो ठंड़े घरों में बैठ रेगिस्तान की तपन के दर्द को महसूस करने का नाटक कर रहे हैं?क्या उन पर जो बाढ़ का मुआयना आसमान से कर लौट जाते हैं और उस पानी में अपने चरण भी नहीं भिगोते जिसमें देश की एक बड़ी आबादी ऊभचूभ कर रही होती है? क्या उन बिचौलिये नेताओं पर जो मुसीबत के मारे बाढ़ पीड़ितों की सहायता के लिए आया अनाज या तंबू वगैरह लूटने (हड़पने कहें तो ज्यादा उचित होगा) में भी नहीं लजाते?या कि नेताओं के उन गुर्गों पर जो अपने इलाके में राजा जैसा बरताव करते हैं और जिनके चलते मुल्क की बड़ी जनता सांसत-आफत में रहती है?या उन पर जिन्हें सिर्फ अपनी सुख-सुविधाओं की चिंता है देश में भुखमरी और कर्ज की मार से अकाल मौत चुनने वाले किसानों की फिक्र नहीं?आंकड़े उठा कर देख लीजिए देश में पिछले कुछ सालों में भुखमरी और कर्ज के मारे से त्रस्त जितने किसानों ने आत्महत्या की है,वह इनकी परेशानी से उदासीन प्रशासकों के मुंह पर कालिख पोतने के लिए काफी है।&lt;br /&gt; हमारे देश में योजनाओं का हाल यह है कि यह जिन लोगों के लिए बनती हैं उन तक या तो पहुंच नहीं पातीं या फिर पहुंचती भी हैं तो बिचौलियों के माध्यम से। वैले नरेगा व मनरेगा जैसी योजनाओं काफी सफल रही हैं और इनके सुफल भी देखने को मिले हैं लेकिन देश के सीमांत  व्यक्ति तक सुख औरसलीके की जिंदगी और सामान्य सुविधाएं पहुंचाने का काम अब तक होना शेष है। जिस देश में आज भी आबादी का बड़ा हिस्सा दूषित जल पी रहा हो, इलाज के अभाव में जहां का बचपन जिंदगी जीने से पहले मौत के मुंह में चला जाता हो और जहां युवा पीढ़ी का बड़ा हिस्सा बेरोजगार हो उस देश को इस बारे में गंभीरता और संजीदगी से सोचना और काम करना चाहिए।&lt;br /&gt; हम कुछ सवालों से घिरे थे  कि हमारे पास गर्व करने के लिए क्या है। जवाब साफ हैं कि हमारे पास आज भी गर्व करने के लिए बहुत कुछ है। हमारे वीरता और जीवट से भरे-पूरे सैनिक जिनका दुनिया में कोई सानी नहीं और जिनकी चौकस निगाहों और हिमालय से भी बुलंद हौसलों के चलते हमारी सीमाएं सुरक्षित हैं और जिनके चलते हम चैन की नींद सो सकते हैं। हम अपनी न्यायपालिकाओं पर गर्व कर सकते हैं जो आज भी स्वतंत्र और स्वच्छ हैं। जिनके साहसिक निर्णय कई बार प्रशासकों की नींद तक हराम कर देते हैं और ऐसे में बरबस मुंह से उनके लिए कोई शब्द निकलता हो तो यही 'न्याय की जय हो,अन्याय का क्षय हो'। हमारे पास गर्व करने के लिए सुंदरलाल बहुगुणा जैसे पर्यावारण प्रेमी योद्धा हैं जिन्हें हम वृक्षमित्र भी कह सकते हैं। उनके अनथक श्रम और सत्प्रयास से हजारों पेड़ लालची लकड़ी चोरों के हाथों अकाल मौत का शिकार होने से बच गये। पूज्य और श्लाघनीय हैं देश के ऐसे सपूत। हमें गर्व है कि भारत ने ही विश्व को बाबा साहब आमटे जैसा व्यक्तित्व दिया जिन्होंने कुष्ठ रोगियों की सेवा में अपना जीवन सौंप दिया। भारत के इस दूसरे गांधी की सेवानिष्ठा की विरासत आज उनका परिवार निरंतर जारी रख रहा है। हम गर्व कर सकते हैं ऐसे हजारों समाजसेवियों पर जो समाज के दुख-दर्द को अपना समझते और उसे दूर करने के लिए तत्पर रहते हैं। यही हमारे देश की सच्ची पहचान हैं, यही आदर्श हैं। देश में गर्व करने के लिए और भी बहुत कुछ है ऐसे में अंधेरा भले ही घना हो लेकिन यकीन है कि प्रकाश पुंज अब भी बाकी हैं। इन्हें आप सच्चे और कर्तव्यनिष्ठ शिक्षकों,दूसरों का दुख हरने के लिए अपना सुख-चैन भूल जाने वाले चिकत्सकों और ऐसा प्रशासकों या राज नेताओं में देख सकते हैं जिनके सामने दूसरो की भलाई के आगे अपने सुख,अपनी सुविधाएं गौण लगती हों। आज भी ऐसे लोगों की कमी नहीं है क्योंकि जिस दिन इस देश से ऐसे लोग मिट जायेंगे वह दिन मानव सभ्यता के लिए वह काला दिन होगा, जब अनाचार का बोलबाला होगा और हर सच्चा इनसान आंसुओं में डूबा होगा।&lt;br /&gt; हमने जो कुछ खो दिया है उस पर बिसूरना या उसके लिए दुख करना भी जरूरी है। वोट के लालची, मक्कार राजनेताओं के चलते देश से भाईचारा, प्रेम और वह सौहार्द मिट गया है जो कभी इस देश की पहचान होता था। आज वोट के लिए ये स्वार्थी राजनेता आदमी-आदमी या कहें भाई-भाई के बीच खाई खोद रहे हैं। देश में जातिवाद का बोलबाला है और यह राजनीति में भी हावी है। आज प्रत्याशी की जीत –हार जाति पर आधारित हो गयी है। जहां जिस जाति का बाहुल्य वहां उसी जाति का प्रत्याशी खड़ा होने लगा है। ऐसे में जाहिर है कि वह जीत कर उसी जाति विशेष के भले की बात सोचेगा,बाकी लोग उसकी सोच की प्राथमिकता के दायरे से दूर होंगे। देश ने बहुत कुछ खोया है। सामाजिक समरसता खो गयी है। गांव जहां किसी एक घर के दुख-दर्द में गांव की पूरी आबादी जुट जाती थी,अब हर जाति के हिसाब से कई हिस्सों में बंट गये हैं और उन हिस्सों की सोच बस अपने हिस्से तक ही सिमट कर रह गयी है। आधुनिकता की घुसपैठ ने गांव की लोककलाओं वहां की शाश्वत सुंदरता में ग्रहण लगा दिया है। कभी तीज-त्यौहार गांवों में नया रंग भरते थे अब वे भी फीके पड़ गये हैं। मनोरंजन के आधुनिक साधनों ने गांवों की कजरी की तान और आल्हा के जोश पर भी चोट की है। अब ये या तो खत्म हो चुके हैं या खत्म हो जायेंगे। लोकगीत जो कभी भक्ति और सामाजिक समस्याओं पर होते थे, अब अश्लीलता की सारी हदें पार कर चुके हैं। इनका एक-एक शब्द अब आपको गरम पिघले शीशे की तरह चुभेगा। अगर आपने अपनी लज्जा को तिरोहित कर दिया है तब आपमें ये गीत नशीली सिहरन भर सकते हैं,जिसे अंग्रेजी में टिटलाइजेशन कहते हैं। मानाकि कि लोकगीतों में चुहबाजियां पुरानी बात है,जिन लोगों को गांव-गिराम की बारातों में जाने का मौका मिला होगा, उन्हें बारात की जीमने के वक्त या दूसरे नेगचार में गारी सुन कर जरूर वैसी ही सिहरन या पुलकन हुई होगी जैसी पैदा करने के लिए आज के बोलियों  या भाषाओं के गीत नारी को बेपरदा और बेआबरू करने लगे हैं।&lt;br /&gt; भारत या हमारे हिंदुस्तान की पहचान धीरे-धीरे खोती जा रही है। हम पर पश्चिम की नकल का जो भूत सवार है वह हमारी प्राचीन अस्मिता और पहचान को कहीं का नहीं छोड़ेगा। जिस हिंदुस्तान में पश्चिम सुकून और मोक्ष की तलाश में आता है वह सुख-चैन, मौज-मस्ती की जिंदगी के लिए पश्चिम का मुंहताज है। पश्चिम ऐसी शैली से ऊब चुका है और उससे उपजे दुष्परिणामों पर पशेमान और हैरान-परेशान भी है। वहां कुंआरी कन्याएं मां बन रही हैं, धड़ाधड़ शादियां टूट रही हैं और वर्जनाएं तो वहां हैं ही नहीं जो कुछ हद तक किसी भी सुसंस्कृत और शालीन समाज के लिए जरूरी हैं। अगर ऐसी ही प्रगति होती है,यही सामाजिक उत्शान है तो प्रभु करे मेरे देश को ऐसी प्रगति न मिले। हमने जो खोया है,हमारी जो गौरवशाली परंपरा थी,जो तेजी से छीज रही है आइए उसका मातम मनाएं। आइए उस खो गये हिंदुस्तान पर आंसू बहायें और सोंचे कि क्या हम इस अधोपतन को रोकने के लिए कोई सार्थक प्रयास कर सकते हैं। या कम से कम इस दिशा में कोई आवाज उठा सकते हैं। जाहिर है मेरी तरह आपमें से कुछ लोग उसके लिए दुखी होंगे जो हमसे खो गया है।&lt;/p&gt; &lt;div class="feedflare"&gt; &lt;a href="http://feeds.feedburner.com/~ff/janokti/pfzK?a=BapkQXwLYwA:MnaBh6pK-QM:yIl2AUoC8zA"&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~ff/janokti/pfzK?d=yIl2AUoC8zA" border="0"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt; &lt;/div&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/janokti/pfzK/~4/BapkQXwLYwA?utm_source=feedburner&amp;utm_medium=email" height="1" width="1"/&gt;&lt;/div&gt; &lt;/td&gt; &lt;/tr&gt; &lt;/table&gt; &lt;table style="border-top:1px solid #999;padding-top:4px;margin-top:1.5em;width:100%" id="footer"&gt; &lt;tr&gt; &lt;td style="text-align:left;font-family:Helvetica,Arial,Sans-Serif;font-size:11px;margin:0 6px 1.2em 0;color:#333;"&gt;You are subscribed to email updates from &lt;a href="http://www.janokti.com"&gt;JANOKTI : जनोक्ति :  राज-समाज और जन की आवाज&lt;/a&gt; &lt;br /&gt;To stop receiving these emails, you may &lt;a href="http://feedburner.google.com/fb/a/mailunsubscribe?k=dYtSEolrkS-K8ShJPEJPwgGa3hs"&gt;unsubscribe now&lt;/a&gt;.&lt;/td&gt; &lt;td style="font-family:Helvetica,Arial,Sans-Serif;font-size:11px;margin:0 6px 1.2em 0;color:#333;text-align:right;vertical-align:top"&gt;Email delivery powered by Google&lt;/td&gt; &lt;/tr&gt; &lt;tr&gt; &lt;td colspan="2" style="text-align:left;font-family:Helvetica,Arial,Sans-Serif;font-size:11px;margin:0 6px 1.2em 0;color:#333;"&gt;Google Inc., 20 West Kinzie, Chicago IL USA 60610&lt;/td&gt; &lt;/tr&gt; &lt;/table&gt; &lt;/div&gt; &lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6956958984171538532-7114295275446458676?l=hindisahity.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://hindisahity.blogspot.com/feeds/7114295275446458676/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://hindisahity.blogspot.com/2011/03/janokti_05.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6956958984171538532/posts/default/7114295275446458676'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6956958984171538532/posts/default/7114295275446458676'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://hindisahity.blogspot.com/2011/03/janokti_05.html' title='JANOKTI : जनोक्ति'/><author><name>नरेन्द्र निर्मल</name><uri>http://www.blogger.com/profile/16479213514036313208</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_qw0JRiWRDZU/SXyW6w_AHBI/AAAAAAAAAH0/QBx-PMdEfB4/S220/narendra+pic.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-6956958984171538532.post-2548577532115487951</id><published>2011-03-04T19:11:00.001-08:00</published><updated>2011-03-04T19:11:00.417-08:00</updated><title type='text'>JANOKTI : जनोक्ति</title><content type='html'>&lt;style type="text/css"&gt; 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&lt;span&gt;Posted:&lt;/span&gt; 04 Mar 2011 08:16 AM PST&lt;/p&gt; &lt;div style="margin:0;font-family:Georgia,Helvetica,Arial,Sans-Serif;line-height:140%;font-size:13px;color:#000000;"&gt;&lt;p style="text-align: justify;"&gt;&lt;a rel="attachment wp-att-14063" href="http://www.janokti.com/sansad-political-news-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%a6-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%97/%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%95%e0%a4%a4%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%86%e0%a4%97%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a5%8c%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%b2-5/attachment/flag1-2/"&gt;&lt;img class="alignleft size-medium wp-image-14063" title="flag1" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/flag11-300x225.jpg" alt="" width="300" height="225" /&gt;&lt;/a&gt;विश्वीय दृष्टिकोण, स्थानीय कर्म&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;बौद्धिक जनतंत्र के लिए स्थानीय हितों की रक्षा सर्वोपरि होता है &amp;#8211; राष्ट्र, क्षेत्र, गाँव, आदि के सापेक्ष. जबकि विकासशील विश्व में जनतंत्र के अंतर्गत प्रत्येक उत्तम वस्तु निर्यात कर दी जाती है उस विदेशी मुद्रा के लिए जिस के उपयोग से घटिया वस्तुएं देश में लाई जाती हैं. यह किसी व्यावसायिक इकाई के लिए हितकर प्रतीत हो सकता है किन्तु राष्ट्र और समाज के लिए अनेक प्रकार से अनुत्पादक सिद्ध होता है और बौद्धिक दृष्टि से अनैतिक भी है.&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;यहाँ एक मौलिक प्रश्न उभरता है &amp;#8211; विश्वीय दृष्टिकोण की आवश्यकता ही क्या है? इसका हमारे पास एक अति उत्तम उत्तर है. यदि लोग जो चाहें, उन्हें सरकार द्वारा वही सब उपलब्ध कराया जाए तो वे संतुष्ट हो सकते हैं. किन्तु बौद्धिक विश्व इससे संतुष्ट नहीं हो सकता. लोग केवल वही चाह सकते हैं जो वे जानते हैं, किन्तु विश्व में उनके ज्ञान के अतिरिक्त भी बहुत कुछ होता है जो उन्हें शासन द्वारा उपलब्ध कराया जाना चाहिए. इससे शासन में लोगों की आस्था सुदृढ़ होती है और विश्वीय विकास से लोगों की सेवा संभव होती है. इसके लिए शासकों के विश्वीय दृष्टिकोण अपनाना अनिवार्य होता है.&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;विश्वीय दृष्टिकोण से स्थानीय कर्म संलग्न होने से शासन द्वारा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विकसित उत्पादों को देश में आयात की अनुमति प्राप्त ना होकर उन उत्पादों के देश में ही उत्पादन एवं लोगों द्वारा उपभोग उत्प्रेरित होता है. इससे देश में व्यवसाय और रोजगार के नए अवसर विकसित होते हैं जिनसे व्यक्तिगत और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था सुदृढ़ होती है.&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;शासन का विश्वीय दृष्टिकोण देश की अर्थव्यवस्था के विश्वीकरण से भिन्न प्रक्रिया है. विश्वीकरण में विश्व-स्तरीय कर्म अपनाया जाता है जो पूरी तरह अव्यवहारिक होता है जब कि विश्वीय दृष्टिकोण में केवल विकास का विश्वीय दर्शन अपनाया जाता है जिसे स्थानीय पारिस्थितिकी के अनुकूल किया जाकर स्थानीय कर्मों में उसका उपयोग किया जाता है. इससे विकास प्रक्रिया स्थानीय कर्मों से संचालित होती है.&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;वस्तुतः, भूमंडल पर प्रशासनिक और भौगोलिक सीमाओं की उपस्थिति के कारण विभिन्न स्थानों पर भिन्न परिस्थितियों का सृजन होता है जिनके कारण विश्वीय कर्म संभव नहीं हो सकता. इसलिए कर्म स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप स्थानीय स्तर पर ही संभव होता है. केवल दृष्टिकोण ही विश्वीय हो सकता है जिसे स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार स्थानीय कर्म में परिणित किया जाता है. .&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;स्थानीय दृष्टिकोण से सीमित स्थानीय कर्म होने से स्थानीय विकास स्थानीय स्तर तक ही सीमित रहता है जिसका लाभ अन्य स्थानों को प्राप्त नहीं हो पाता. विश्वीय दृष्टिकोण अपनाए जाने से दूसरे स्थानों के विकास का ही लाभ नहीं उठाया जाता, स्थानीय विकास का लाभ भी सुदूर स्थानों को प्राप्त होता है. इस प्रकार विश्वीय दृष्टिकोण विकास प्रक्रिया को विश्व स्तर तक विस्तृत करता है.&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;उपरोक्त के अतिरिक्त, विश्वीय दृष्टिकोण से संपन्न स्थानीय कर्म केवल कर्म-स्थल हेतु ही उपयुक्त नहीं होता अपितु उसी प्रकार के अन्य स्थलों के लिए भी उपयोगी सिद्ध होता है. उदाहरणार्थ, विश्वीय दृष्टिकोण के साथ एक छोटे से गाँव में किया गया कर्म उस प्रकार के अन्य गाँवों में भी विकास के लहर का सृजन करता है. इस लहर के सृजन का कारण यह है कि दृष्टिकोण को स्थानीय पारिस्थितिकी हेतु अनुकूलित कर लिया गया होता है जिसे उसी पारिस्थितिकी के अन्य स्थानों पर भी सरलता से लागू किया जा सकता है.&lt;/p&gt; &lt;div class="feedflare"&gt; &lt;a href="http://feeds.feedburner.com/~ff/janokti/pfzK?a=1sE_2suHiNs:o-fKo0WVsdM:yIl2AUoC8zA"&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~ff/janokti/pfzK?d=yIl2AUoC8zA" border="0"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt; &lt;/div&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/janokti/pfzK/~4/1sE_2suHiNs?utm_source=feedburner&amp;utm_medium=email" height="1" width="1"/&gt;&lt;/div&gt; &lt;/td&gt; &lt;/tr&gt; &lt;tr&gt; &lt;td style="margin-bottom:0;line-height:1.4em;"&gt; &lt;p style="margin:1em 0 3px 0;"&gt; &lt;a name="2" style="font-family:Arial, Helvetica, sans-serif;font-size:18px;" href="http://feedproxy.google.com/~r/janokti/pfzK/~3/5ldte071JZM/?utm_source=feedburner&amp;utm_medium=email"&gt;दिशाहीन आम बजट उर्फ़ राग बेमौसम&lt;/a&gt; &lt;/p&gt; &lt;p style="font-size:13px;color:#555;margin:9px 0 3px 0;font-family:Georgia,Helvetica,Arial,Sans-Serif;line-height:140%;font-size:13px;"&gt; &lt;span&gt;Posted:&lt;/span&gt; 04 Mar 2011 08:07 AM PST&lt;/p&gt; &lt;div style="margin:0;font-family:Georgia,Helvetica,Arial,Sans-Serif;line-height:140%;font-size:13px;color:#000000;"&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt; &lt;div dir="ltr"&gt; &lt;div&gt; &lt;div&gt;&lt;a rel="attachment wp-att-14059" href="http://www.janokti.com/sansad-political-news-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%a6-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%97/%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%86%e0%a4%ae-%e0%a4%ac%e0%a4%9c%e0%a4%9f-%e0%a4%89%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ab%e0%a4%bc-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%97-%e0%a4%ac/attachment/pranav-mukherjee291x21813178/"&gt;&lt;img class="alignleft size-full wp-image-14059" title="Pranav-mukherjee291X21813178" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/Pranav-mukherjee291X21813178.jpg" alt="" width="291" height="218" /&gt;&lt;/a&gt;मित्रों,भारत   का आम बजट पेश हुए कई दिन हो चुके हैं.मैंने पहले से सोंच  रखा था कि १३   मार्च को झारखण्ड लोक सेवा आयोग की प्रारंभिक परीक्षा में  शामिल हो लेने  के  बाद ही इस विषय पर कुछ लिखूंगा लेकिन मन कुछ इस तरह  बेचैन हो उठा कि  कलम  उठानी पड़ी.मित्रों,बजट किसी भी देश का ऐसा वार्षिक  वित्तीय विवरण  होता है  जिससे देश की दशा और सरकार की दिशा का पता चलता है  लेकिन इस बार  के बजट से न  तो देश की दशा का ही पता चलता है और न ही सरकार  देश को किस  दिशा में ले  जाना चाहती है अतिशक्तिशाली इलेक्ट्रोन  सूक्ष्मदर्शी से  अवलोकन करने पर भी  इसका पता चलता है.&lt;/div&gt; &lt;/div&gt; &lt;div dir="ltr"&gt; &lt;div&gt;बजट  पेश होने से पहले पूरे भारत में उम्मीद  की अन्तर्वर्ती धारा बह रही   थी.लोगों को आशा थी कि वित्त मंत्री महंगाई  से जली हुई और इस जले पर नमक  हर  दफ्तर में सुविधाशुल्क देने को विवश जनता  को राहत देने के लिए  कोई-न-कोई  कदम उठाने की घोषणा अवश्य करेंगे.लेकिन इन  विषयों की चर्चा तो  दूर बजट में  इस बात का कोई संकेत तक नहीं था कि सरकार  इन समस्याओं को  गंभीर मानती भी  है.जबकि बजट से पहले आई आर्थिक समीक्षा में  महंगाई और  भ्रष्टाचार का  उड़ते-उड़ते ही सही जिक्र किया गया था.ऐसा क्यों  हुआ और  सरकार की नीयत क्या  है यह तो बेहतर तरीके से सरकार में शामिल लोग  ही बता  सकते हैं;हम तो सरकार  के भीतर की हलचल को बस अनुमानों के आईने में  ही देख  सकते हैं.&lt;/div&gt; &lt;div&gt;इस बार के बजट में आम  नागरिकों को आयकर में  प्रतिमाह १७१ रूपये की नियत  छूट दी गई है और बदले  में सर्विस टैक्स के  रूप में प्रति माह हजारों रूपयों  का बोझ लाद दिया  गया है.इतना ही नहीं  वित्त मंत्री इस साल मुद्रास्फीति के  कम-से-कम ८.५  प्रतिशत होने का अनुमान  भी लगा रहे हैं यानि आम जनता अपनी  कुल कमाई में  से कम-से-कम ८.५ प्रतिशत  के क्षरण के लिए भी तैयार रहे.शायद  इसी स्थिति  को छटांक लेना और छटाँक  नहीं देना और महंगाई में आटा गीला होना  कहते हैं.&lt;/div&gt; &lt;div&gt;ऐसा  भी  नहीं है कि वित्त मंत्री महंगाई के  वास्तविक कारणों से पूरी तरह से   नावाकिफ हों.अगर ऐसा होता तो उनके बजट  भाषण में द्वितीय हरित क्रांति का   जिक्र तक नहीं होता.हमारे वित्त मंत्री  द्वितीय हरित क्रांति को साकार  होते  हुए देखना तो चाहते हैं लेकिन उन्हें  इसके लिए कोई जल्दीबाजी भी  नहीं  है.तभी तो उन्होंने बजट में इस  अवश्यम्भावी क्रांति के लिए मात्र  ४०० करोड़  रूपया निर्धारित किया है.पूरा  पूर्वोत्तर,जहाँ पर यह कथित  क्रांति होनी  है;पिछले दो वर्षों से घोर  अनावृष्टि का सामना कर रहा  है.क्षेत्र में पीने  के पानी की भी कमी हो रही  है लेकिन सरकार यहाँ की  जनता को हरित क्रांति का  दिवास्वप्न दिखा रही  है.जनमोहिनी-मनमोहिनी सरकार  मात्र ४०० करोड़ रूपये में  पूरे पूर्वोत्तर  भारत की कृषि में क्रांति कर  देना चाहती है.शायद उसका  फूंक मारकर पहाड़  उड़ा देने के करतब में गंभीर  विश्वास है.हालाँकि  धर्मनिरपेक्ष प्रणव ने  रामचरितमानस की चाहत फूंकी  उड़ावन पहाड़ू पंक्ति पढ़ी  है या नहीं मैं यकीं  के साथ नहीं कह  सकता.वर्तमान जलवायविक स्थितियों में  जब तक क्षेत्र की सभी  नदियों को  एक-दूसरे से जोड़ नहीं दिया जाता;हरित  क्रांति तो दूर की कौड़ी  है  ही,क्षेत्र में वर्तमान खाद्यान्न उत्पादन स्तर  को बरक़रार रख पाना भी   संभव नहीं है.जाहिर है कि वित्त मंत्री अगर इस  तथाकथित क्रांति के प्रति   सचमुच गंभीर होते तो बजट में इसके लिए कई लाख  करोड़ रूपये का प्रावधान   करते न कि सिर्फ ४०० करोड़ रूपये का.&lt;/div&gt; &lt;div&gt;मित्रों,हम  जानते हैं कि देश की  अर्थव्यवस्था की  हालत इस समय दयनीय है.बजट बनाते  समय एक तरफ जहाँ वित्त  मंत्री को देश में  उच्च विकास दर को बनाए रखना था  तो वहीँ दूसरी और उनके  सामने मुद्रास्फीति  को भी ८.५ प्रतिशत के स्तर पर  स्थिर रखने की चुनौती  थी.हालाँकि  मुद्रास्फीति की यह दर भी वर्तमान  परिस्थितियों में जनता को  कष्ट ही  देगी;इसमें संदेह नहीं.वित्त मंत्री  अगर साहस दिखाते तो १९२९ की  महामंदी के  समय जिस तरह फ्रैंकलिन डिलानो  रूजवेल्ट ने अमेरिका में न्यू  डील की घोषणा  की थी,वैसी ही कोई वजनदार  योजना की घोषणा करते.इससे  बेरोजगारी भी दूर होती  और देश को दीर्घकालिक  लाभ भी होता.हो सकता है कि  इससे मुद्रास्फीति कुछ और  ज्यादा हो जाती  लेकिन जनता की जेब में ज्यादा  पैसा तो आता ही;देश के समक्ष  सदियों से  मुंह बाए खड़ी भुखमरी और मूल्य  वृद्धि की स्थायी समस्या का भी  स्थायी  समाधान हो जाता.&lt;/div&gt; &lt;div&gt;मित्रों,शायद मैंने  कुछ ज्यादा ही उटपटांग  तुलना कर दी है.मुझे  क्रांतिकारी रूजवेल्ट की घोर  यथास्थितिवादी और मजबूर  मनमोहन सिंह या प्रणव  मुखर्जी से तुलना नहीं करनी  चाहिए थी.लेकिन जब कोई  ४०० करोड़ रूपये में ही  भारत जैसे विशाल देश में  हरित क्रांति कराने लगे  तो इतिहास के पन्नों को  पलटना ही पड़ता है.प्रणव  मुखर्जी बड़े भारत के  बहुत बड़े नेता हैं.इसलिए वे  अगर गलती भी करते हैं  तो बहुत बड़ी ही करते  हैं.शायद बहुत बड़ा करने के  चक्कर में ही वे खाद्य  तेल,सब्जियां,मोटे अनाज  और डेयरी उत्पादों के  उत्पादन को बढ़ावा देनेवाली  पाँच अतिमहत्वकांक्षी  परियोजनाओं को मात्र  ३००-३०० करोड़ रूपये दे गए.हद  तो उन्होंने ४०० करोड़  रूपये में हरित  क्रांति करके ही कर दी थी अब बारी  बेहद करने की  थी.मित्रों,कोई भी वित्त  मंत्री जब किसी योजना के लिए राशि  का आवंटन करता  है तो उसके पीछे कोई-न-कोई  तर्क होता है,तथ्य होता है.दादा  के पास तर्क  नहीं है;कुतर्क है.वे कहते  हैं कि उन्होंने इन ५ योजनाओं के  लिए ३००-३००  करोड़ रूपये इसलिए दिए हैं  क्योंकि उनका शुभ अंक ३  है.दादा,अगर तीन के  गुणांक में ही राशि देना चाहते  थे तो उन्हें कम-से-कम  ३०००-३००० करोड़  रूपये देने चाहिए थे.३००-३०० रूपये  में क्या होगा और  क्या नहीं होगा पता  नहीं लेकिन लक्ष्य तो पूरा नहीं ही  होगा.वैसे दादा ने  शायद इस संभावित  आलोचना से बचने के लिए ही इन क्षेत्रों  में उत्पादन  वृद्धि के लिए कोई  लक्ष्य रखा ही नहीं है.मित्रों,जिस तरह  प्रश्न-पत्र  में सिर्फ कठिन प्रश्न  ही नहीं होते क्योंकि इससे परीक्षार्थी  के  आत्महत्या कर लेने की सम्भावना  बढ़ जाती है उसी तरह इस बजट में भी सिर्फ   जुबान को जलाकर रख देने वाली  मिर्च ही नहीं है कुछ मिठाइयाँ भी है लेकिन   किंचित.बुनियादी ढांचा को  दुरुस्त करने और सामाजिक क्षेत्र के लिए आबंटन   में भारी वृद्धि की गयी  हैं;लेकिन सच्चाई यह भी है कि चूंकि यह आवंटन पहले   से काफी कम था सिर्फ  इसलिए वृद्धि जोरदार दिखाई दे रही है.&lt;/div&gt; &lt;div&gt; &lt;div&gt;कुल  मिलकर उद्गम से मुहाने तक यह बजट  बेसुरा है और खटराग में निबद्ध है.यह   बजट दिशाहीन होने की अंतिम परिणति तक  दिशाहीन है और इसमें की गयी सारी   घोषणाएं समय की मांग के विपरीत है.अगर  सरकार को जनता व जनाकांक्षा की   रंचमात्र भी चिंता होती तो वह बजट में  महंगाई और भ्रष्टाचार को कम करने और   मिटाने को प्रमुखता देती.अगर उसके पास  इसके लिए धन की कमी थी तो वह  विदेशों  से कालेधन को वापस लाने की घोषणा  करती न कि धनाभाव और  अंतर्राष्ट्रीय  बाजार में पेट्रोल के दाम बढ़ने का  रोना रोती और न ही  जनता खड़ी होती अपने  उजड़े हुए घर की दहलीज पर  ठगी-सी,अन्यमनस्क.हमें  उम्मीद थी कि २०११-१२ का  बजट अच्छा है या बुरा;यह  अनिवार्यतः एक  अनिर्णायक विवाद का विषय होगा लेकिन  ऐसा हुआ नहीं;बल्कि यह  बजट तो बजट के  औचित्य पर ही सवालिया निशान लगा  गया.लगता है कि सरकार ने यह  सोंचकर यह  बजट पेश किया है कि चूंकि ऐसा होता  ही रहा है तो हम भी ऐसा कर  ही लेते  हैं.वास्तव में यह बजट है ही नहीं बल्कि  इसे पेश करके करके एक  भ्रष्ट और  निकम्मी सरकार द्वारा अपनी बेगारी को टाला  गया है.&lt;/div&gt; &lt;/div&gt; &lt;/div&gt; &lt;/div&gt; &lt;/div&gt; &lt;div class="feedflare"&gt; &lt;a href="http://feeds.feedburner.com/~ff/janokti/pfzK?a=5ldte071JZM:NN4EgUSsJMc:yIl2AUoC8zA"&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~ff/janokti/pfzK?d=yIl2AUoC8zA" border="0"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt; &lt;/div&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/janokti/pfzK/~4/5ldte071JZM?utm_source=feedburner&amp;utm_medium=email" height="1" width="1"/&gt;&lt;/div&gt; &lt;/td&gt; &lt;/tr&gt; &lt;tr&gt; &lt;td style="margin-bottom:0;line-height:1.4em;"&gt; &lt;p style="margin:1em 0 3px 0;"&gt; &lt;a name="3" style="font-family:Arial, Helvetica, sans-serif;font-size:18px;" href="http://feedproxy.google.com/~r/janokti/pfzK/~3/0GIxASok2iw/?utm_source=feedburner&amp;utm_medium=email"&gt;वर्तमान&lt;/a&gt; &lt;/p&gt; &lt;p style="font-size:13px;color:#555;margin:9px 0 3px 0;font-family:Georgia,Helvetica,Arial,Sans-Serif;line-height:140%;font-size:13px;"&gt; &lt;span&gt;Posted:&lt;/span&gt; 04 Mar 2011 08:01 AM PST&lt;/p&gt; &lt;div style="margin:0;font-family:Georgia,Helvetica,Arial,Sans-Serif;line-height:140%;font-size:13px;color:#000000;"&gt;&lt;p style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt; &lt;/strong&gt;&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt; &lt;/strong&gt;&lt;/p&gt; &lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt; &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;&lt;a rel="attachment wp-att-14054" href="http://www.janokti.com/art-literature-%e0%a4%95%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af/poem-hindi-%e0%a4%95%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a4%be/%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8/attachment/sahmat-publicationgarbar-ghotala/"&gt;&lt;img class="alignleft size-medium wp-image-14054" title="sahmat publication,garbar ghotala" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/Garbar-Ghotala-300x240.jpg" alt="" width="240" height="192" /&gt;&lt;/a&gt;नया उजागर हो रहा घोटाला हर रोज &lt;/strong&gt;&lt;/div&gt; &lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;फिर भी मुस्का कर वह देतें हैं हर पोज &lt;/strong&gt;&lt;/div&gt; &lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;शर्म नाम की चीज से उनका क्या सम्बन्ध &lt;/strong&gt;&lt;/div&gt; &lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;बेशर्मी से कर रहे सत्ता का  वे भोग &lt;/strong&gt;&lt;/div&gt; &lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;&lt;br /&gt; &lt;/strong&gt;&lt;/div&gt; &lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;लूट २ कर देश का धन रख आते विदेश &lt;/strong&gt;&lt;/div&gt; &lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;कंगला  करने पर तुले ये गद्दार अनेक &lt;/strong&gt;&lt;/div&gt; &lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;क्यों कि उन को मिल गया लूट तन्त्र का राज &lt;/strong&gt;&lt;/div&gt; &lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;कैसे आगे चलेगा यहाँ राज और काज &lt;/strong&gt;&lt;/div&gt; &lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;&lt;br /&gt; &lt;/strong&gt;&lt;/div&gt; &lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;बिका मिडिया कर रहा द्रोही के गुणगान &lt;/strong&gt;&lt;/div&gt; &lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;जितना जिस का धन मिला उतना उस का गान &lt;/strong&gt;&lt;/div&gt; &lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;रेट सभी के तय हुए यशोगान अनुसार &lt;/strong&gt;&lt;/div&gt; &lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;जिधर दिखी थाली परात उधर रात भर नाच &lt;/strong&gt;&lt;/div&gt; &lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;&lt;br /&gt; &lt;/strong&gt;&lt;/div&gt; &lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;भगवा गली हो गई यह वैटिकन राग &lt;/strong&gt;&lt;/div&gt; &lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;जय चन्दों की देश में रही सदा भरमार &lt;/strong&gt;&lt;/div&gt; &lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;भारत वासी थक चुके सुन २ के ये बात &lt;/strong&gt;&lt;/div&gt; &lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;समय आगया है यहाँ युवा शक्ति अब जाग &lt;/strong&gt;&lt;/div&gt; &lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;&lt;br /&gt; &lt;/strong&gt;&lt;/div&gt; &lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;कब तक ऐसीं चलेंगी दिग्गी जैसी चाल &lt;/strong&gt;&lt;/div&gt; &lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;गिरे हुए जमीर के लोगों की भरमार &lt;/strong&gt;&lt;/div&gt; &lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;बस मैडम को खुश करें चाहे जो हो जाय &lt;/strong&gt;&lt;/div&gt; &lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;देश धर्म से क्या उन्हें देश भाड़ में जाय&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt; &lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;&lt;br /&gt; &lt;/strong&gt;&lt;/div&gt; &lt;div class="feedflare"&gt; &lt;a href="http://feeds.feedburner.com/~ff/janokti/pfzK?a=0GIxASok2iw:bDH-MhSKtvI:yIl2AUoC8zA"&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~ff/janokti/pfzK?d=yIl2AUoC8zA" border="0"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt; &lt;/div&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/janokti/pfzK/~4/0GIxASok2iw?utm_source=feedburner&amp;utm_medium=email" height="1" width="1"/&gt;&lt;/div&gt; &lt;/td&gt; &lt;/tr&gt; &lt;tr&gt; &lt;td style="margin-bottom:0;line-height:1.4em;"&gt; &lt;p style="margin:1em 0 3px 0;"&gt; &lt;a name="4" style="font-family:Arial, Helvetica, sans-serif;font-size:18px;" href="http://feedproxy.google.com/~r/janokti/pfzK/~3/Xbn_TP2g09E/?utm_source=feedburner&amp;utm_medium=email"&gt;आम लोगों की भी सोच होती भाई साहब&lt;/a&gt; &lt;/p&gt; &lt;p style="font-size:13px;color:#555;margin:9px 0 3px 0;font-family:Georgia,Helvetica,Arial,Sans-Serif;line-height:140%;font-size:13px;"&gt; &lt;span&gt;Posted:&lt;/span&gt; 04 Mar 2011 07:27 AM PST&lt;/p&gt; &lt;div style="margin:0;font-family:Georgia,Helvetica,Arial,Sans-Serif;line-height:140%;font-size:13px;color:#000000;"&gt;&lt;p style="text-align: justify;"&gt;&lt;a rel="attachment wp-att-14050" href="http://www.janokti.com/government-failure-%e0%a4%85%e0%a4%82%e0%a4%a7%e0%a5%87%e0%a4%b0-%e0%a4%a8%e0%a4%97%e0%a4%b0%e0%a5%80/%e0%a4%86%e0%a4%ae-%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%97%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%ad%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a5%8b%e0%a4%9a-%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%a4%e0%a5%80-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%88/attachment/baba-ramdev-23-2/"&gt;&lt;img class="alignleft size-medium wp-image-14050" title="baba ramdev 23" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/baba-ramdev-231-300x229.jpg" alt="" width="240" height="183" /&gt;&lt;/a&gt;कथित योग गुरु रामदेव बाबा के अवगुणों के प्रति लोगों को जागरूक करना धीरे-धीरे खतरनाक होता जा रहा है। अब तो आलम यह है कि बाबा रामदेव के खिलाफ एक शब्द बोलने और लिखने वाला व्यक्ति बाबा के समर्थकों द्वारा कांग्रेसी ठहरा दिया जाता है। बाबा के अंधे भक्तों को क्या इतनी भी अकन नहीं है कि आम नागरिकों की भी एक सोच या विचारधारा होती है।&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;यह पोस्ट लिखने में मुझे तकलीफ हो रही है, क्योकि कुछ रामदेव बाबा के अंधे भक्त बाबा को सही साबित करने के लिए कुछ भी अनर्गल बात कह रहे है। इसके लिए अपना छोटा सा दिमाग भी लगाना मुनासिब नहीं समझ रहे है। मेरी उन तमाम रामदेव भक्तों से गुजारिश है कि बाबा की तरफदारी भी करनी है, तो तर्कों के आधार पर करो, कुतर्क मत करो।&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;कुछ समय पहले मैंने रामदेव बाबा के काले चिट्ठे खोले के लिए एक पोस्ट लिखी थी। इसपर मुझे यह प्रतिक्रिया मिली कि यह पोस्ट मैंने कांग्रेसियों के कहने पर लिखी है। कईयों ने तो मुझे पेड पोस्ट लिखने का भी आरोपी बना दिया है। और तो और बहुतों ने मुझे यह समझाइश दी है कि बाबा के बारे में ज्यादा मत लिखो नहीं तो उनके भक्त मेरा जीना दूभर कर देंगे। क्या यही है एक कथित संत से ज्ञान पाने वाले भक्त? शायद हाँ&amp;#8230; वो ढोंगी आज की युवा पीढ़ी को बरगला रहा है, और हम भटकते जा रहे है। भाई साहब विचारधारा क्या होती है? क्या सिर्फ कांग्रेस, भाजपा, कमुनिष्ट व्यक्ति की ही कोई विचारधारा हो सकती है, क्या एक साधारण नागरिक की कोई सोच नहीं होती। शर्म आती है मुझे आज की पीढ़ी पर, जो किसी भ्रष्ट पर अंधा भरोसा करने लगती है। रामदेव बाबा कहते है कि वह भ्रष्टाचारियो की मौत बनकर आयें है। और लोग इस पाखंडी की बातें बड़े इत्मीनान से सुन रहे है। रामदेव बाबा क्या न्यायाधीश या कानून है, जो किसी को भी मौत के घात उतारने की बात कर रहे है। बाबा को तो यह कहना था कि वो भ्रष्टाचारियो को जेल पहुचाने में कोई कसार नहीं छोड़ेंगे। रामदेव बाबा सिर्फ युवाओं को भड़का रहे है। ताकि अपना स्वार्थ सिद्ध कर सके। पूँजीपतियो के साथ हर वक्त रहने वाला बाबा क्या सचमुच यह सोचता है कि वह भ्रष्टाचार को मिटा सकता है। बाबा के साथ जुड़े कुछ पूँजीपतियो के बारे में मै भी जानता हूँ कि वो कितने इमानदार है। न्यूज़ चैनल चलाने वाले और लोहा का धंधा करने वालों के साथ जुड़कर वह कौन सा महँ काम करने वाला है। यह मै जानता हूँ। आयकर का छापा पड़ता है, तो बाबा मंत्रियों से सेटिंग कर उस कारवाई को रुकवा देते है। मै जानता हूँ कि बाबा के महँ बनाने कि कोशिश में मेरी लड़ाई ज्यादा दिन इसलिए नहीं चल पाएगी, क्योकि बाबा बहुत जल्द मुझपर अपने बाहुबली भक्तों के सहारे दबाव बनवायेंगे। ख़राब-पतियों के साथ घुमने वाला क्या कुछ नहीं करवा सकता है।&lt;/p&gt; &lt;div class="feedflare"&gt; &lt;a href="http://feeds.feedburner.com/~ff/janokti/pfzK?a=Xbn_TP2g09E:mCr0m8YYQWg:yIl2AUoC8zA"&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~ff/janokti/pfzK?d=yIl2AUoC8zA" border="0"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt; &lt;/div&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/janokti/pfzK/~4/Xbn_TP2g09E?utm_source=feedburner&amp;utm_medium=email" height="1" width="1"/&gt;&lt;/div&gt; &lt;/td&gt; &lt;/tr&gt; &lt;/table&gt; &lt;table style="border-top:1px solid #999;padding-top:4px;margin-top:1.5em;width:100%" id="footer"&gt; &lt;tr&gt; &lt;td style="text-align:left;font-family:Helvetica,Arial,Sans-Serif;font-size:11px;margin:0 6px 1.2em 0;color:#333;"&gt;You are subscribed to email updates from &lt;a href="http://www.janokti.com"&gt;JANOKTI : जनोक्ति :  राज-समाज और जन की आवाज&lt;/a&gt; &lt;br /&gt;To stop receiving these emails, you may &lt;a href="http://feedburner.google.com/fb/a/mailunsubscribe?k=dYtSEolrkS-K8ShJPEJPwgGa3hs"&gt;unsubscribe now&lt;/a&gt;.&lt;/td&gt; &lt;td style="font-family:Helvetica,Arial,Sans-Serif;font-size:11px;margin:0 6px 1.2em 0;color:#333;text-align:right;vertical-align:top"&gt;Email delivery powered by Google&lt;/td&gt; &lt;/tr&gt; &lt;tr&gt; &lt;td colspan="2" style="text-align:left;font-family:Helvetica,Arial,Sans-Serif;font-size:11px;margin:0 6px 1.2em 0;color:#333;"&gt;Google Inc., 20 West Kinzie, Chicago IL USA 60610&lt;/td&gt; &lt;/tr&gt; &lt;/table&gt; &lt;/div&gt; &lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6956958984171538532-2548577532115487951?l=hindisahity.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://hindisahity.blogspot.com/feeds/2548577532115487951/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://hindisahity.blogspot.com/2011/03/janokti_04.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6956958984171538532/posts/default/2548577532115487951'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6956958984171538532/posts/default/2548577532115487951'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://hindisahity.blogspot.com/2011/03/janokti_04.html' title='JANOKTI : जनोक्ति'/><author><name>नरेन्द्र निर्मल</name><uri>http://www.blogger.com/profile/16479213514036313208</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_qw0JRiWRDZU/SXyW6w_AHBI/AAAAAAAAAH0/QBx-PMdEfB4/S220/narendra+pic.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-6956958984171538532.post-8718538083702618183</id><published>2011-03-03T19:39:00.001-08:00</published><updated>2011-03-03T19:39:47.414-08:00</updated><title type='text'>JANOKTI : जनोक्ति</title><content type='html'>&lt;style type="text/css"&gt;                          h1 a:hover {background-color:#888;color:#fff ! important;}                          div#emailbody table#itemcontentlist tr td div ul {                                         list-style-type:square;                                         padding-left:1em;                         }                                  div#emailbody table#itemcontentlist tr td div blockquote {                                 padding-left:6px;                                 border-left: 6px solid #dadada;                                 margin-left:1em;                         }                                  div#emailbody table#itemcontentlist tr td div li {                                 margin-bottom:1em;                                 margin-left:1em;                         }                           table#itemcontentlist tr td a:link, table#itemcontentlist tr td a:visited, table#itemcontentlist tr td a:active, ul#summarylist li a {                                 color:#000099; 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&lt;/a&gt; &lt;/h1&gt; &lt;/td&gt; &lt;td width="1%" /&gt; &lt;/tr&gt; &lt;/table&gt; &lt;hr style="border:1px solid #ccc;padding:0;margin:0" /&gt; &lt;table id="itemcontentlist"&gt; &lt;tr xmlns=""&gt; &lt;td style="margin-bottom:0;line-height:1.4em;"&gt; &lt;p style="margin:1em 0 3px 0;"&gt; &lt;a name="1" style="font-family:Arial, Helvetica, sans-serif;font-size:18px;" href="http://feedproxy.google.com/~r/janokti/pfzK/~3/2HmjjIySAUk/?utm_source=feedburner&amp;utm_medium=email"&gt;पगला गए है भूरिया, रामदेव बाबा को बना दिया धर्म का ठेकेदार !!&lt;/a&gt; &lt;/p&gt; &lt;p style="font-size:13px;color:#555;margin:9px 0 3px 0;font-family:Georgia,Helvetica,Arial,Sans-Serif;line-height:140%;font-size:13px;"&gt; &lt;span&gt;Posted:&lt;/span&gt; 03 Mar 2011 07:05 AM PST&lt;/p&gt; &lt;div style="margin:0;font-family:Georgia,Helvetica,Arial,Sans-Serif;line-height:140%;font-size:13px;color:#000000;"&gt;&lt;p&gt;&lt;a rel="attachment wp-att-14035" href="http://www.janokti.com/sansad-political-news-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%a6-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%97/%e0%a4%aa%e0%a4%97%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%97%e0%a4%8f-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%ad%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b5-%e0%a4%ac/attachment/baba-ramdev/"&gt;&lt;img class="alignleft size-full wp-image-14035" title="baba ramdev" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/baba-ramdev.jpg" alt="" width="136" height="108" /&gt;&lt;/a&gt;क्या  बाबा रामदेव धर्म के ठेकेदार है, जो भाजपा उससे डरे? केंद्रीय मंत्री  कांतिलाल भूरिया का बुधवार को रतलाम जिला के सर्किट हाउस में आयोजित  पत्रकारवार्ता में यह कहना की भाजपा को रामदेव बाबा से डरने की बात कहना  महज हास्यप्रद ही है। ऐसा लगता है कि भूरिया भाजपा के सहयोगी ही हो गए है,  जो ऐसी बात करने लगे हैं।&lt;/p&gt; &lt;p&gt;विद्वान् भूरिया का  रामदेव बाबा के सम्बन्ध में यह कहना उनके मानसिक रूप से सेवा-निवृत्त होने  का इशारा कर रहा है। आखिर रामदेव बाबा कौन है? एक योगी? एक संत? एक  जनप्रतिनिधि? या फिर एक व्यापारी?&lt;/p&gt; &lt;p&gt;यदि हम यह सोचें कि रामदेव  बाबा एक योगी है, तो इस सोच में बहुत उलझाने होंगी। क्योकि बाबा ने योग को  राजनीती में आने को एक हथियार बनाया। और यह जरूरी नहीं कि जिसके पास हथियार  हो, वह योद्धा ही हो। हथियार तो चोर- उचक्के , पाकिटमार, कातिल, कसाई भी  रखते है। तो क्या हम रामदेव बाबा को संत माने? शायद नहीं, क्योकि संत  राजनीति करते है, लोगों को भड़काते नहीं है। संत भ्रमित नहीं करते है। बाबा  रामदेव ने तो काले धन को लेकर तो देश-भर में भ्रम कि स्थिति  पैदा कर दी  है। वह कहते है कि विदेशी बैंकों में काला धन रखने वालों कि सूची है, लेकिन  इस बात को कहने के महीनो बाद भी रामदेव बाबा ने उनके नाम उजागर नहीं किये।  इसका मतलब यह ही कि बाबा संत नहीं है। क्या रामदेव बाबा एक जनप्रतिनिधि  है?&lt;/p&gt; &lt;p&gt;अब इसमें सवाल यह है कि जनप्रतिनिधि क्या है। मेरे ख़याल से जनप्रतिनिधि  वह होता है, जो जनता का प्रतिनिधत्व करता है। रामदेव बाबा का उनके  चेले-चौपाट ही समर्थन करतें है। चेला और जनता में अंतर है। अब सवाल उठता है  कि क्या बाबा रामदेव व्यापारी है? मेरे ख्याल से आज कि तारीख में रामदेव  बाबा बहुत बड़े ब्रांड बन गए है। योग के प्रचारक है। यह बात अलग है कि अब  वह योग सिखाने से ज्यादा भाषण &amp;#8211; बाजी ज्यादा करते है।&lt;/p&gt; &lt;p&gt;उन्होंने दवाइयों का  प्रचार भी किया है, ऐसा करके उन्होंने करोड़ों की संपत्ति भी कमाई है। हम यह  मान सकते है की बाबा एक व्यापारी ही है। कांतिलाल भूरिया का यह कहना है कि  बाबा रामदेव के राजनीति में  आने से भाजपा को खतरा है। उनके राजनीति में  आने की संभावनाओं से भाजपा में  घबराहट है क्योंकि भाजपा धर्म की ठेकेदार  है और बाबा रामदेव राजनीति में  आए तो वे भाजपा से धर्म का ठेका ले लेंगे।  अब भूरिया को कौन समझाए कि एक व्यापारी धर्म का ठेकेदार कैसे हो सकता है।&lt;/p&gt; &lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt; &lt;div class="feedflare"&gt; &lt;a href="http://feeds.feedburner.com/~ff/janokti/pfzK?a=2HmjjIySAUk:0IU9P2w3GGs:yIl2AUoC8zA"&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~ff/janokti/pfzK?d=yIl2AUoC8zA" border="0"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt; &lt;/div&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/janokti/pfzK/~4/2HmjjIySAUk?utm_source=feedburner&amp;utm_medium=email" height="1" width="1"/&gt;&lt;/div&gt; &lt;/td&gt; &lt;/tr&gt; &lt;tr&gt; &lt;td style="margin-bottom:0;line-height:1.4em;"&gt; &lt;p style="margin:1em 0 3px 0;"&gt; &lt;a name="2" style="font-family:Arial, Helvetica, sans-serif;font-size:18px;" href="http://feedproxy.google.com/~r/janokti/pfzK/~3/AcPb2pj6Pyo/?utm_source=feedburner&amp;utm_medium=email"&gt;प्रचारक परिवार के रत्न अरविन्द कृष्णराव चैथाइवाले&lt;/a&gt; &lt;/p&gt; &lt;p style="font-size:13px;color:#555;margin:9px 0 3px 0;font-family:Georgia,Helvetica,Arial,Sans-Serif;line-height:140%;font-size:13px;"&gt; &lt;span&gt;Posted:&lt;/span&gt; 03 Mar 2011 06:59 AM PST&lt;/p&gt; &lt;div style="margin:0;font-family:Georgia,Helvetica,Arial,Sans-Serif;line-height:140%;font-size:13px;color:#000000;"&gt;&lt;p style="text-align: justify;"&gt;&lt;a rel="attachment wp-att-14030" href="http://www.janokti.com/%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a7-miscellaneous/%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%95-%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a8-%e0%a4%85%e0%a4%b0/attachment/arvind_ji_-3/"&gt;&lt;img class="alignleft size-medium wp-image-14030" title="Arvind_ji_" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/Arvind_ji_2-255x300.jpg" alt="" width="204" height="240" /&gt;&lt;/a&gt;श्रद्धांजलि -&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;संघ के वरिष्ठ प्रचारक, विश्व हिन्दू परिषद में केन्द्रीय मंत्री तथा सेवा विभाग के अखिल भारतीय प्रमुख श्री अरविन्द कृष्णराव चैथाइवाले का दिनांक 3 मार्च, 2011 को ब्रह्ममुहूर्त में प्रातः तीन बजे दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में निधन हो गया। गत 27 फरवरी को दोपहर में भीषण हृदयाघात के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया था। चिकित्सकों ने भरपूर प्रयास किया; पर वे उन्हें बचा नहीं सके।&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;अरविन्द जी का जन्म नागपुर के पास कलमेश्वर नामक स्थान पर सात सितम्बर, 1939 को हुआ था। मूलतः उनका परिवार महाराष्ट्र में सोलापुर जिले के बारशी गांव का था। इनके पिता श्री कृष्णराव अध्यापक थे। इस परिवार में अरविन्द जी सहित छह भाई तथा तीन बहिनें थीं। भाइयों में सबसे बड़े बाबूराव ने सर्वप्रथम शाखा जाना प्रारम्भ किया और उसके बाद क्रमशः सभी भाई स्वयंसेवक बने। संघ के तत्कालीन सरसंघचालक श्री गुरुजी एवं फिर श्री बालासाहब देवरस से सबके बहुत मधुर संबंध रहे। एक विशेष बात यह है कि छह में से तीन भाई संघ के जीवनव्रती प्रचारक बने। ऐसा उदाहरण शायद दूसरा नहीं होगा।&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;सबसे बड़े बाबूराव ने नागपुर में अध्यापक रहते हुए 1954 से 1994 तक संघ के केन्द्रीय कार्यालय में श्री गुरुजी और फिर श्री बालासाहब का पत्र व्यवहार संभाला। दूसरे मधुकर राव और तीसरे सुधाकर राव भी नौकरी करते हुए संघ कार्य में सक्रिय रहे। चैथे भाई शरद राव 1956 में प्रचारक बने। विदर्भ में अनेक दायित्व निभाते हुए इन दिनों वे नागपुर के केन्द्रीय कार्यालय पर रहकर स्वास्थ्य लाभ कर रहे हैं। पांचवे भाई शशिकांत जी 1961 में प्रचारक बने। असम में अनेक स्थानों पर रहते हुए वे प्रांत तथा सहक्षेत्र प्रचारक रहे। अब वे संघ की केन्द्रीय कार्यकारिणी के सदस्य हैं।&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;अरविन्द जी ने सिविल इंजीनियर का डिप्लोमा कर कुछ वर्ष नागपुर तथा अमरावती में पी.डब्ल्यू.डी में नौकरी की। उसके बाद 1970 में वे भी अपने भाइयों की परम्परा के वाहक होकर प्रचारक बन गये। उन्हें सर्वप्रथम उड़ीसा में बालासोर जिले में भेजा गया। शीघ्र ही वे ओड़िया भाषा सीखकर वहां समरस हो गये। उन दिनों श्री बाबूराव पालधीकर वहां प्रांत प्रचारक थे। उनके साथ रहते हुए अरविन्द जी क्रमशः विभाग और फिर प्रांत प्रचारक बने। इस दौरान उन्होंने उड़ीसा के काम को अनेक नये आयाम प्रदान किये। उड़ीसा वनवासी बहुल निर्धन क्षेत्र है। अरविन्द जी ने सुदूर क्षेत्रों में सघन प्रवास कर अनेक नई शाखाएं तथा वनवासी गांवों में सेवा केन्द्र प्रारम्भ किये। उन्होंने अनेक साधु-सन्तों को भी संघ से जोड़ा। आपातकाल में कुछ समय उन्होंने भूमिगत रहकर कार्य किया; पर फिर वे पुलिस के हाथ आ गये और उन्हें कटक के कारागार में रहना पड़ा।&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;1998 में उन्हें विश्व हिन्दू परिषद में बंगाल और उड़ीसा का क्षेत्र संगठन मंत्री बनाया गया। कोलकाता को केन्द्र बनाकर उन्होंने परिषद की गतिविधियों का चहुंओर विस्तार किया। 2001 में उन्हें विश्व हिन्दू परिषद में केन्द्रीय सहमंत्री तथा सेवा विभाग का अखिल भारतीय सहप्रमुख बनाकर दिल्ली बुला लिया गया। पूरे देश में प्रवास कर उन्होंने सेवा कार्यों की एक विशाल मालिका निर्माण की। 2010 में तत्कालीन सेवा प्रमुख श्री सीताराम अग्रवाल के निधन के बाद अरविन्द जी केन्द्रीय मंत्री तथा सेवा प्रमुख बने।&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;सादा जीवन, उच्च विचार के धनी, अध्ययनशील और शांत स्वभाव वाले स्वर्गीय श्री अरविन्द चैथाइवाले का जीवन न केवल प्रचारकों अपितु सब स्वयंसेवकों व कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणास्पद है।&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt; &lt;div class="feedflare"&gt; &lt;a href="http://feeds.feedburner.com/~ff/janokti/pfzK?a=AcPb2pj6Pyo:R_IyXNiXqzM:yIl2AUoC8zA"&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~ff/janokti/pfzK?d=yIl2AUoC8zA" border="0"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt; &lt;/div&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/janokti/pfzK/~4/AcPb2pj6Pyo?utm_source=feedburner&amp;utm_medium=email" height="1" width="1"/&gt;&lt;/div&gt; &lt;/td&gt; &lt;/tr&gt; &lt;/table&gt; &lt;table style="border-top:1px solid #999;padding-top:4px;margin-top:1.5em;width:100%" id="footer"&gt; &lt;tr&gt; &lt;td style="text-align:left;font-family:Helvetica,Arial,Sans-Serif;font-size:11px;margin:0 6px 1.2em 0;color:#333;"&gt;You are subscribed to email updates from &lt;a href="http://www.janokti.com"&gt;JANOKTI : जनोक्ति :  राज-समाज और जन की आवाज&lt;/a&gt; &lt;br /&gt;To stop receiving these emails, you may &lt;a href="http://feedburner.google.com/fb/a/mailunsubscribe?k=dYtSEolrkS-K8ShJPEJPwgGa3hs"&gt;unsubscribe now&lt;/a&gt;.&lt;/td&gt; &lt;td style="font-family:Helvetica,Arial,Sans-Serif;font-size:11px;margin:0 6px 1.2em 0;color:#333;text-align:right;vertical-align:top"&gt;Email delivery powered by Google&lt;/td&gt; &lt;/tr&gt; &lt;tr&gt; &lt;td colspan="2" style="text-align:left;font-family:Helvetica,Arial,Sans-Serif;font-size:11px;margin:0 6px 1.2em 0;color:#333;"&gt;Google Inc., 20 West Kinzie, Chicago IL USA 60610&lt;/td&gt; &lt;/tr&gt; &lt;/table&gt; &lt;/div&gt; &lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6956958984171538532-8718538083702618183?l=hindisahity.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://hindisahity.blogspot.com/feeds/8718538083702618183/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://hindisahity.blogspot.com/2011/03/janokti_03.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6956958984171538532/posts/default/8718538083702618183'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6956958984171538532/posts/default/8718538083702618183'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://hindisahity.blogspot.com/2011/03/janokti_03.html' title='JANOKTI : जनोक्ति'/><author><name>नरेन्द्र निर्मल</name><uri>http://www.blogger.com/profile/16479213514036313208</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_qw0JRiWRDZU/SXyW6w_AHBI/AAAAAAAAAH0/QBx-PMdEfB4/S220/narendra+pic.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-6956958984171538532.post-663939164868196322</id><published>2011-03-02T19:41:00.001-08:00</published><updated>2011-03-02T19:41:01.330-08:00</updated><title type='text'>JANOKTI : जनोक्ति</title><content type='html'>&lt;style type="text/css"&gt; 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&lt;/a&gt; &lt;/h1&gt; &lt;/td&gt; &lt;td width="1%" /&gt; &lt;/tr&gt; &lt;/table&gt; &lt;hr style="border:1px solid #ccc;padding:0;margin:0" /&gt; &lt;ul style="clear:both;padding:0 0 0 1.2em;width:100%" id="summarylist"&gt; &lt;li&gt; &lt;a href="#1"&gt;लोकतंत्र के आगे बौद्धिक लोकतंत्र -32&lt;/a&gt; &lt;/li&gt; &lt;li&gt; &lt;a href="#2"&gt;जयचंदों की श्रेणी&lt;/a&gt; &lt;/li&gt; &lt;li&gt; &lt;a href="#3"&gt;शेर की शहादत स्थल पर कुत्ता &amp;ldquo;विजेता&amp;rdquo;&lt;/a&gt; &lt;/li&gt; &lt;li&gt; &lt;a href="#4"&gt;साहित्यकार आचार्य निशांतकेतु से प्रश्नोत्तर&lt;/a&gt; &lt;/li&gt; &lt;li&gt; &lt;a href="#5"&gt;सुकन्या कहाँ है , राहुल गाँधी से कोर्ट ने माँगा जवाब&lt;/a&gt; &lt;/li&gt; &lt;li&gt; &lt;a href="#6"&gt;गोधरा फैसले से फरेबी साबित हुए लालू&lt;/a&gt; &lt;/li&gt; &lt;/ul&gt; &lt;table id="itemcontentlist"&gt; &lt;tr xmlns=""&gt; &lt;td style="margin-bottom:0;line-height:1.4em;"&gt; &lt;p style="margin:1em 0 3px 0;"&gt; &lt;a name="1" style="font-family:Arial, Helvetica, sans-serif;font-size:18px;" href="http://feedproxy.google.com/~r/janokti/pfzK/~3/j1NLhJgKr1k/?utm_source=feedburner&amp;utm_medium=email"&gt;लोकतंत्र के आगे बौद्धिक लोकतंत्र -32&lt;/a&gt; &lt;/p&gt; &lt;p style="font-size:13px;color:#555;margin:9px 0 3px 0;font-family:Georgia,Helvetica,Arial,Sans-Serif;line-height:140%;font-size:13px;"&gt; &lt;span&gt;Posted:&lt;/span&gt; 02 Mar 2011 08:07 AM PST&lt;/p&gt; &lt;div style="margin:0;font-family:Georgia,Helvetica,Arial,Sans-Serif;line-height:140%;font-size:13px;color:#000000;"&gt;&lt;p style="text-align: justify;"&gt;&lt;a rel="attachment wp-att-14016" href="http://www.janokti.com/sansad-political-news-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%a6-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%97/%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%95%e0%a4%a4%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%86%e0%a4%97%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a5%8c%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%b2-4/attachment/flag1/"&gt;&lt;img class="alignleft size-medium wp-image-14016" title="flag1" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/flag1-300x225.jpg" alt="" width="300" height="225" /&gt;&lt;/a&gt;भृष्टाचार उन्मूलन&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;वर्तमान में अथवा भूतकाल में अनेक उच्च एवं प्रतिष्ठित पदों पर आसीन व्यक्ति एवं उनके संगठन भारत में फैले उच्च स्तरीय भृष्टाचार से दुखी हैं और इसके उन्मूलन हेतु कार्य कर रहे हैं. यह सही है कि उच्च स्तर पर हो रहा भृष्टाचार ही निम्नतम स्तर तक पहुंचा है क्योंकि भृष्टाचार सदैव उच्च स्तर से नीचे की ओर उत्प्रेरित होता है, न कि निम्न स्तर से उच्च स्तर की ओर. इस प्रकार यदि उच्च स्तरीय भृष्टाचार समाप्त हो जाता है तो निम्नस्तरीय भृष्टाचार भी एक दिन स्वतः समाप्त हो जाएगा. किन्तु इसका अर्थ यह नहीं है कि निम्न स्तरीय भृष्टाचार को यथावत स्वीकार किया जाता रहे अथवा इसे प्रोन्नत किया जाता रहे, और इसके उन्मूलन की तभी आशा की जाये जब उच्च-स्तरीय भृष्टाचार समाप्त हो जायेगा.&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;भृष्टाचार भारतीय जन-मानस की रग-रग में रच-बस गया है, किसी दुल्हन की हथेलियों पर लगी मेहंदी की तरह, जिसे तुरंत समाप्त नहीं किया जा सकता. इसकी समाप्ति के लिए दीर्घ-कालिक सतत प्रयास करने होंगे, प्रत्येक स्तर पर. यह भी सही है कि निम्न स्तर पर भृष्टाचार समाप्ति के प्रयास प्रायः निष्फल अथवा अस्थायी होते हैं. किन्तु निम्न स्तर पर भृष्टाचार उन्मूलन के प्रयास एक जन-आन्दोलन को प्रेरित करते हैं, जो क्षमता उच्च स्तर पर भृष्टाचार उन्मूलन के प्रयासों में नहीं होती. ये प्रयास अधिकाँश में न्यायालयी संघर्षों द्वारा किये जाते हैं.&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;भृष्टाचार  उन्मूलन के लिए यह आवश्यक है कि भृष्ट लोगों के मानस में भय व्याप्त हो जिसकी सामर्थ्य जन-आन्दोलन में होती है  जो निम्न-स्तरीय संघर्षों से उत्प्रेरित होते हैं. किन्तु निम्न-स्तरीय भृष्टाचार उन्मूलन के प्रयास कालजयी नहीं होते, इसलिए  उच्च स्तर पर भृष्टाचार उन्मूलन के बिना स्थायी नहीं हो सकते. इस प्रकार भृष्टाचार उन्मूलन के प्रयास दोनों स्तरों पर किये जाने चाहिए. इसके लिए सूत्र यह है कि जो जहां है, वहीं भृष्टाचार पर प्रहार करे और सतत करता रहे.&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;निम्न स्तर पर भृष्टाचार उन्मूलन में सबसे बड़ी बाधा यह है कि जन-मानस ने इसे जीवन-शैली के रूप में स्वीकार कर लिया है और वह इसके विरुद्ध स्वर बुलंद कर जन-संघर्ष के लिए तैयार नहीं है. यहाँ तक कि जो भी इसके लिए छुट-पुट प्रयास किये जाते हैं, स्वयं जन-मानस ही उनकी अवहेलना करता है, तथा यदा-कदा अपनी स्वीकार्य जीवन-शैली बनाए रखने के लिए ऐसे संघर्षों के विरुद्ध कार्य भी करता है. इस अवहेलना और विरोध के कारण निम्न-स्तरीय संघर्ष दीघ-जीवी सिद्ध नहीं होते. साथ ही साधनहीनता के कारण इनका दमन भी सरल होता है. इन्हें बनाए रखने के लिए उच्च स्तरीय सहयोग आवश्यक होता है.&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;इस चर्चा से जो कार्य-शैली प्रभावी प्रतीत होती है, उसके विविध आयाम निम्नांकित हैं -&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;उच्च स्तर पर भृष्टाचार उन्मूलन के प्रयास अवश्य हों और इसके लिए व्यापक संगठनात्मक ढांचा विकसित किया जाये.&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;निम्न स्तर पर भी भृष्टाचार उन्मूलन के प्रयास हों, जिनके माध्यम से जन-मानस में संशोधन हो, और जन-संघर्ष उत्प्रेरित किये जाएँ. इसके लिए निम् स्तर पर भी स्थानीय संगठन बनें.&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;निम्न स्तरीय प्रयासों को सतत बनाए रखने के लिए उच्च स्तर से सहयोग और संरक्षण प्रदान किया जाए.&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;उच्च स्तरीय प्रयासों के लिए जहां कहीं जन-आन्दोलन की आवश्यकता हो, निम्न स्तरीय जन संघर्ष इनमें यथाशक्ति सहयोग प्रदान करें.&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;इस प्रकार भृष्टाचार उन्मूलन के लिए शक्ति और जन-चेतना दोनों के समन्वय की आवश्यकता है जो क्रमशः उच्च और निम्न स्तरों पर उपलब्ध होते हैं, अतः उच्च एवं निम्न दोनों स्तरों पर प्रयासों का महत्व है और दोनों में सहयोग अपरिहार्य है.&lt;/p&gt; &lt;div class="feedflare"&gt; &lt;a href="http://feeds.feedburner.com/~ff/janokti/pfzK?a=j1NLhJgKr1k:uSNKhbwx06Q:yIl2AUoC8zA"&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~ff/janokti/pfzK?d=yIl2AUoC8zA" border="0"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt; &lt;/div&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/janokti/pfzK/~4/j1NLhJgKr1k?utm_source=feedburner&amp;utm_medium=email" height="1" width="1"/&gt;&lt;/div&gt; &lt;/td&gt; &lt;/tr&gt; &lt;tr&gt; &lt;td style="margin-bottom:0;line-height:1.4em;"&gt; &lt;p style="margin:1em 0 3px 0;"&gt; &lt;a name="2" style="font-family:Arial, Helvetica, sans-serif;font-size:18px;" href="http://feedproxy.google.com/~r/janokti/pfzK/~3/NCusldW8MHw/?utm_source=feedburner&amp;utm_medium=email"&gt;जयचंदों की श्रेणी&lt;/a&gt; &lt;/p&gt; &lt;p style="font-size:13px;color:#555;margin:9px 0 3px 0;font-family:Georgia,Helvetica,Arial,Sans-Serif;line-height:140%;font-size:13px;"&gt; &lt;span&gt;Posted:&lt;/span&gt; 02 Mar 2011 08:01 AM PST&lt;/p&gt; &lt;div style="margin:0;font-family:Georgia,Helvetica,Arial,Sans-Serif;line-height:140%;font-size:13px;color:#000000;"&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&lt;a href="http://www.tensionpoint.blogspot.com/"&gt;&lt;/a&gt;&lt;a rel="attachment wp-att-14013" href="http://www.janokti.com/%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a7-miscellaneous/%e0%a4%9c%e0%a4%af%e0%a4%9a%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%a3%e0%a5%80/attachment/mountain-sun/"&gt;&lt;img class="alignleft size-medium wp-image-14013" title="mountain-sun" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/mountain-sun-300x225.jpg" alt="" width="300" height="225" /&gt;&lt;/a&gt;आश्चर्य होता है &amp;#8230; !&lt;span style="font-size: small;"&gt;&lt;br /&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: small;"&gt;&lt;br /&gt; कि सूरज सर पर चमक रहा हो; और कोई उसे अनदेखा करे, वो भी आखें होते &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: small;"&gt;हुए&amp;#8230;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: small;"&gt;!  दोपहर के चमकते सूर्य को  अँधा भी बेशक देख नहीं पाता; पर उसकी गर्मी से तो वह भी बेहाल हो कर उसकी चरम स्थिति का अंदाजा लगा लेता है। पर जिन्होंने आँखों पर चश्मा लगा रखा हो वो भी लोहे का उनके लिए क्या कहें ?&lt;br /&gt; कुछ&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: small;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: small;"&gt; ऐसा ही हमारे देश के वो लोग कर रहे हैं; जिन्हें &amp;#8220;कुछ लोगों&amp;#8221; ने बुद्धिजीवी मान रखा है।  वो देश की समस्याओं पर अपने लेख लिखते हैं, समाचार चैनलों पर बहस-मुबाहसों में जाते हैं, और एक बड़े आन्दोलन की पैरवी भी करते हैं, देश के लोगों से जागने की अपेक्षा भी करते हैं, किसी सर्वमान्य नेता की आवश्यकता पर भी ध्यान आकर्षित करते  हैं ।&lt;br /&gt; पर&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: small;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: small;"&gt;; जो &amp;#8220;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: small;"&gt;बहस&amp;#8221;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: small;"&gt; आम जनता के बीच शुरू हो चुकी है कि 'अब तो अगर कुछ भला इस देश का हो सकता है तो &lt;a href="http://www.bharatswabhimantrust.org/"&gt;&amp;#8220;&lt;/a&gt;&lt;a href="http://www.bharatswabhimantrust.org/"&gt;बाबा &lt;/a&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: small;"&gt;&lt;a href="http://www.bharatswabhimantrust.org/"&gt;&lt;span&gt;रामदेव&amp;#8221;&lt;/span&gt;&lt;/a&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: small;"&gt;&lt;a href="http://www.bharatswabhimantrust.org/"&gt; &lt;/a&gt;ही कर सकते &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: small;"&gt;हैं;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: small;"&gt; और  किसी से उम्मीद नहीं', इस बात को नजरंदाज कर जाते हैं ।&lt;br /&gt; जिस&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: small;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&lt;span style="font-size: small;"&gt; बड़े आन्दोलन और जनता से जागने की वह अपेक्षा करते हैं वह भी आरम्भ हो चुका है।  और सर्वमान्य नेता के रूप में&lt;a href="http://www.bharatswabhimantrust.org/"&gt; बाबा राम देव जी&lt;/a&gt; लोगों के दिलों में छा गए हैं।  पर ये लोग पता नहीं क्यों उन्हें अनदेखा कर रहे हैं ? जबकि देश के मुख्य मुस्लिम व्यक्तित्व, मुख्य इसाई व्यक्तित्व, और अधिकतर सामाजिक लोग बाबाजी की आवाज में आवाज मिला रहे हैं।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt; &lt;span style="font-size: large;"&gt;तब&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt; मेरे मन से आवाज निकली कि  ऋषियों के वंशज समझ रहे हैं- असुरों के वंशज भड़क रहे हैं।&lt;br /&gt; &lt;/span&gt;&lt;br /&gt; &lt;a href="http://http//www.tensionpoint.blogspot.com/"&gt;शोध का विषय है&lt;/a&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt; &lt;p&gt;&lt;span style="font-size: small;"&gt;कि &amp;#8220;एक खानदान के &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: small;"&gt;पूर्वजों&amp;#8221;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: small;"&gt; से लेकर आज तक के वंशजों द्वारा किया गया और किया जा रहा नुकसान, "कुछ लोगों (पत्रकारों)और कुछ" समाचार घरानों ( इलेक्ट्रोनिक और प्रिंट) को इस गाँधी ( उस गाँधी नहीं ) खानदान के पैर दबाने में और तेल मालिश करने में धन के आलावा और क्या मिलता  है ? जहाँ तक ये सोचते हैं कि सुरक्षा भी मिलती है तो सब जानते हैं कि कांग्रेस अपने ही लोगों को &amp;#8220;दुनिया से कूच&amp;#8221; करवाने के लिए बदनाम है ।&lt;br /&gt; आज&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: small;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: small;"&gt; के समय में किसी भी बात को छुपाना बड़ा मुश्किल है; और पुराने &amp;#8220;लिखित दस्तावेज&amp;#8221; भी सब इनके &amp;#8220;कुकर्मों&amp;#8221; के मिल गए हैं; फिर भी इन लोगों को ऐसा क्यों लगता है कि लोग अभी भी मूर्ख बन जायेंगे  ?&lt;br /&gt; इन्हें एक &amp;#8220;दुत्कारे &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: small;"&gt;हुए &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: small;"&gt;नेता&amp;#8221;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: small;"&gt; की पूर्वांचल स्वाभिमान यात्रा तो दिखती &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: small;"&gt;है;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: small;"&gt; पर जो सम्पूर्ण देश में चल रही है &lt;a href="http://www.bharatswabhimantrust.org/"&gt;&amp;#8220;भारत स्वाभिमान यात्रा&amp;#8221; &lt;/a&gt;नहीं दिखाई देती।  ये क्रिकेट पर तो दिनभर चौबीसों घंटे अपनी रोटियां सेंक सकते &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: small;"&gt;हैं;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: small;"&gt; पर जो देश की अस्मिता से जुड़ा मुद्दा है उस पर देश भक्तों की आँखों को तरसाते हैं।  उलटे &amp;#8220;उस &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: small;"&gt;तरह&amp;#8221;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: medium;"&gt;&lt;span style="font-size: small;"&gt; के लोगों को अपने चैनलों पर दिखाते हैं जो &amp;#8220;उस खानदान&amp;#8221; के एक बच्चे की चरण वंदना में अपने &amp;#8220;टूटे हुए पांव&amp;#8221; और &amp;#8220;रीढ़ की हड्डी का लचीलापन&amp;#8221; भी भूल जाते हैं।  जी हाँ मैं &amp;#8220;बिट्टा&amp;#8221; की बात कर रहा हूँ। ईटीवी उत्तर प्रदेश पर राहुल गाँधी की गन्दगी ( बुराईयाँ ) छुपा रहा था ।&lt;br /&gt; इन्हें दिल्ली की रैली भी केवल एक नजर को दिखाई दी। फिर हम चैनल बदलते रहे । पर वो नहीं दिखाई दी । फिर ! अपने को देश का समाज का हितैसी बताते नहीं थकते।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt; &lt;span style="font-size: large;"&gt;तब मेरे मन से आवाज निकली कि; भ्रष्टाचार को संस्कार मत बनाओ- पिछलग्गुओ होश में आओ, होश में आओ- होश में आओ ।&lt;br /&gt; &lt;/span&gt;&lt;br /&gt; &lt;a href="http://http//www.tensionpoint.blogspot.com/"&gt;देश द्रोह&lt;/a&gt;&lt;br /&gt; &lt;span style="font-size: small;"&gt;कोई मुझे देशप्रेम की परिभाषा समझाए।  क्या केवल सरकार की, नेताओं की भक्ति करना देशभक्ति है ? या अपने देश की संस्कृति-संस्कार, पूर्वजों का सम्मान, सभ्यता-साहित्य और यहाँ रहने वाले लोगों से प्रेम करे ये देशप्रेम है ?&lt;br /&gt; इस द्रष्टि से मेरी नजर में वो सभी देशद्रोही हैं जो भारत स्वाभिमान के इस आन्दोलन को अनदेखा कर रहे हैं, वो अब अधिक दिन इस देश की जनता को नहीं बरगला सकते । अपनी पीठ भले ही थपथपा सकते हैं पर आने वाले समय में जयचंदों की श्रेणी में गिने जायेंगे।&lt;br /&gt; तब&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: small;"&gt; &lt;/span&gt; &lt;span style="font-size: medium;"&gt;&lt;span style="font-size: small;"&gt; मेरे मन से आवाज निकली&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: small;"&gt;;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt; &lt;span style="font-size: large;"&gt;कौन देशभक्त कौन गद्दार-जान गयी  जनता हो गयी समझदार । &lt;/span&gt;&lt;br /&gt; &lt;/span&gt;&lt;/p&gt; &lt;div class="feedflare"&gt; &lt;a href="http://feeds.feedburner.com/~ff/janokti/pfzK?a=NCusldW8MHw:sKYlQjmtSVQ:yIl2AUoC8zA"&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~ff/janokti/pfzK?d=yIl2AUoC8zA" border="0"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt; &lt;/div&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/janokti/pfzK/~4/NCusldW8MHw?utm_source=feedburner&amp;utm_medium=email" height="1" width="1"/&gt;&lt;/div&gt; &lt;/td&gt; &lt;/tr&gt; &lt;tr&gt; &lt;td style="margin-bottom:0;line-height:1.4em;"&gt; &lt;p style="margin:1em 0 3px 0;"&gt; &lt;a name="3" style="font-family:Arial, Helvetica, sans-serif;font-size:18px;" href="http://feedproxy.google.com/~r/janokti/pfzK/~3/oTqkezolY08/?utm_source=feedburner&amp;utm_medium=email"&gt;शेर की शहादत स्थल पर कुत्ता &amp;ldquo;विजेता&amp;rdquo;&lt;/a&gt; &lt;/p&gt; &lt;p style="font-size:13px;color:#555;margin:9px 0 3px 0;font-family:Georgia,Helvetica,Arial,Sans-Serif;line-height:140%;font-size:13px;"&gt; &lt;span&gt;Posted:&lt;/span&gt; 02 Mar 2011 07:56 AM PST&lt;/p&gt; &lt;div style="margin:0;font-family:Georgia,Helvetica,Arial,Sans-Serif;line-height:140%;font-size:13px;color:#000000;"&gt;&lt;p&gt;&lt;a rel="attachment wp-att-14009" href="http://www.janokti.com/bharatnama-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%be/%e0%a4%b6%e0%a5%87%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b6%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a4%a4-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%b2-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%81%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4/attachment/ajad-park/"&gt;&lt;img class="alignleft size-medium wp-image-14009" title="ajad park" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/ajad-park-225x300.jpg" alt="" width="225" height="300" /&gt;&lt;/a&gt;शहीदों की चिताओं पर, लगेंगे हर बरस मेले !&lt;/p&gt; &lt;p&gt;वतन पर मिटने वालों का, यहीं बाकि निशां होगा!&lt;/p&gt; &lt;p&gt;देश ने कभी यहीं वादा आजादी की लड़ाई में क़ुरबानी देने वाले अपने अमर शहीदों के लिए किया था ! लेकिन बड़े अफसोस की बात हैं आज उसी देश में एक महान शहीद की शहादत स्थल पर शहादत दिवस के दिन प्रशासनिक सहमति एवं मीडिया के तत्त्वाधान में कुत्तों की प्रदर्शनी लगाई जा रही हैं !हम बात कर राहें हैं भारतभूमि के महान सपूत चंद्रशेखर आजाद की जिनका जन्म मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले के भांवरा गाँव में 23 जुलाई 1906 को माता जगरानी देवी और पिता पंडित सीताराम तिवारी के संतान के रूपमें हुआ था ! विलक्षण प्रतिभा के धनी चंद्रशेखर में राष्ट्रीयता बचपन से ही कूट-कूट के भरी थी !सन 1921 में एक विश्मयकारी और ऐतिहासिक घटना के बाद मात्र 15 वर्ष की अवस्था में  बालक चंद्रशेखर से आजाद बनने वाले चंद्रशेखर आजाद जीवनपर्यंत आजाद ही रहे और 27 फरवरी 1931 को इलाहाबाद के कंपनी बाग़ ( अब आजाद पार्क ) में फिरंगियों से लोहा लेते हुए खुद की गोली से वीरगति को प्राप्त हुए थे !इस शहीद स्थली (आजाद पार्क) के अतीत में जाने पर पर मन और गौरवान्वित हो उठता हैं क्योंकि यह ऐतिहासिक पार्क पहले मेंवातियों की बस्ती हुआ करती थी ! 1857 के ग़दर में इस बस्ती के बहादुर मुसलमानों ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया था ! जिसके परिणामस्वरूप  बौखलाए ब्रिटिश हुकूमत नें इसे                                                                तहस नहस करके  कम्पनी बाग़ की नींव डाली थी ! जो अंगरेजी हुक्मरानों की सुहानी शाम के लिए ऐशगाह हुआ करती थी ! अगर कोई भारतीय गलती से इसमे प्रवेश कर गया तो उसके लिए कड़े दंड का प्रावधान था ! स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भी  इस बाग़ में हमारी गुलामी और उनकी प्रभुता का प्रतिक विक्टोरिया टावर ( पुरातत्व विभाग के संरक्षण में जिसको छूना भी अपराध हैं ) शान से खड़ा हैं ! विगत 27 फरवरी को उसी आजाद पार्क में चंद्रशेखर आजाद के शहादत स्थल पर शहादत दिवस के दिन वेस्ट कैनल क्लब और दैनिक जागरण के लघु संस्करण आई-नेक्स्ट अखबार के द्वारा प्रशासनिक सहमति से कुत्तों की प्रदर्शनी लगवाई गई जहाँ कुत्तों ने रैम्प पर चहलकदमी की !इस घटना का विरोध शहर में जयहिंद फौन्देशन और कुछ राष्ट्रवादी संगठनों  द्वारा किया जा रहा था !लेकिन प्रशासन  की बेरूखी बनी  रही और सभी विरोधों को दरकिनार करते हुए इस कुत्ता प्रदर्शनी को भारीसुरक्षा के बीच  पूरा  किया गया !राष्ट्रीयता को शर्मसार कर देने वाली  इस घटना के बाद भी ना प्रशासन  को शर्म  आई और ना  ही अपने आपको लोकतंत्र  का चौथा स्तम्भ कहने  का दंभ भरने वाली  मीडिया को ! ज्ञातव्य हो की यह पहला मौका नहीं  हैं जब किसी  शहीद की शहादत का अपमान  किया गया हो !अपने आपको बुद्धिजीवियों का शहर कहने  वाले इसी इलाहाबाद में काकोरी कांड के महान शहीद रोशन  सिंह  को जिस भवन  में फांसी दी  गई थी ! वो  स्थल एक स्मारक के रूप मेंअपेक्षा करता  हैं ! लेकिन प्रशासन  की घोर उदासीनता  के चलते वह भवन  आज तक सरकारी गोदाम  के रूप में उपयोग किया जा रहा हैं किया जा रहा  हैं !अब यह सवाल उठना लाजिमी है की बार-बार होने वाले ये अपमान महज प्रशासनिक लापरवाही के परिणाम मात्र हैं या इसे जन बूझकर प्रायोजित किया जा रहा हैं ! क्योंकि जिस तरह से हमारी पीढ़ी को  क्रांतिकारियों के जीवन मूल्यों और उनके दर्शन से दूर किया  किया जा रहा हैं वह किसी साजिश का हिस्सा प्रतीत होती हैं ! जिसकी एक बानगी दिखनी भी शुरु हो गयी हैं !उदहारण के लिए- आज देश के एक-एक बच्चे को ऋतिक रोशन और अभिषेक बच्चन के बाप का नाम तो मालूम हैं लेकिन वह भगत सिंह और राम प्रसाद बिस्मिल को नहीं जनता ! आज देश के लोग जातिवाद, धर्मवाद, और क्षेत्रवाद की बात तो करते हैं लेकिन राष्ट्रवाद की बात कोई नहीं करना चाहता हैं ! अगर यहीं रवैया बरक़रार रहा तो निश्चित रूप से संकट के समय इसकी कीमत देशवासियों को चुकानी पड़ सकती हैं ! जिन्होंने हमारी आन बान और शान के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया उनके लिए हमारा फर्ज बनता हैं की हम कुछ ऐसा करें की शहीदों के जीवन मूल्यों एवं आदर्शों त्याग,सेवा,और शौर्य के प्रतिक आजाद आजाद जी और समस्त शहीदों की शहादत दिवस में आम जनभागीदारी इतना भव्यतम रूप ले ले की भोली जनता कुत्तों की प्रदर्शनी से ऊपर उठाकर शहीदों की शहादत की झांकी को अंगीकार कर ले ! जिन लोगों ने अपने बलिदान की कीमत पर आजादी&lt;/p&gt; &lt;p&gt;का अमूल्य उपहार इस देश को दिया उसके देशवासियों से इतनी अपेक्षा तो की ही जा सकती हैं ! जयहिंद !&lt;/p&gt; &lt;div class="feedflare"&gt; &lt;a href="http://feeds.feedburner.com/~ff/janokti/pfzK?a=oTqkezolY08:dHOgcssnkBo:yIl2AUoC8zA"&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~ff/janokti/pfzK?d=yIl2AUoC8zA" border="0"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt; &lt;/div&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/janokti/pfzK/~4/oTqkezolY08?utm_source=feedburner&amp;utm_medium=email" height="1" width="1"/&gt;&lt;/div&gt; &lt;/td&gt; &lt;/tr&gt; &lt;tr&gt; &lt;td style="margin-bottom:0;line-height:1.4em;"&gt; &lt;p style="margin:1em 0 3px 0;"&gt; &lt;a name="4" style="font-family:Arial, Helvetica, sans-serif;font-size:18px;" href="http://feedproxy.google.com/~r/janokti/pfzK/~3/ej9bgZD8ATg/?utm_source=feedburner&amp;utm_medium=email"&gt;साहित्यकार आचार्य निशांतकेतु से प्रश्नोत्तर&lt;/a&gt; &lt;/p&gt; &lt;p style="font-size:13px;color:#555;margin:9px 0 3px 0;font-family:Georgia,Helvetica,Arial,Sans-Serif;line-height:140%;font-size:13px;"&gt; &lt;span&gt;Posted:&lt;/span&gt; 02 Mar 2011 02:15 AM PST&lt;/p&gt; &lt;div style="margin:0;font-family:Georgia,Helvetica,Arial,Sans-Serif;line-height:140%;font-size:13px;color:#000000;"&gt;&lt;div&gt; &lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;हिंदी के साथ विभिन्न भाषाओँ के सचल तीर्थ वागर्थ आचार्य निशांतकेतु जी जिन्होंने साहित्य का अपूर्व भंडार अपने अथक परिश्रम से साहित्य जगत को दे कर उपकृत किया है उन से डॉ. वेद व्यथित ने उन की रचना प्रक्रिया मूलक कुछ प्रश्न किये हैं :-&lt;/p&gt; &lt;p&gt;प्रश्न १ योशाग्नी शीर्षक आप का उपन्यास देश विदेश में खूब चर्चा में आया इस के विषय में मत तथा प्रतिमत बड़ी संख्या में प्राप्त हुए हैं शायद ही ऐसा किसी अन्य उपन्यास के साथ हुआ हो इस की कथा वस्तु के चयन की क्या प्रक्रिया रही और इस पर आप का लम्बा शोध भी रहा होगा तो इस के क्या २ अनुभव रहे ?&lt;/p&gt; &lt;p&gt;उ० योशाग्नी की भूमिका में मैंने इस की रचना प्रक्रिया के सम्बन्ध में विस्तार से लिखा है वहाँ मैंने स्पष्ट किया है कि इस का मूलाधार&amp;#8217; काम&amp;#8217; है  काम से निष्काम की यात्रा होती है कामना और कमानियों  के नाम और रूप मिलते हैं काम की निंदा भी की गई है प्रशंसा भी की गई है पुरुषार्थ चतुष्टय में जो क्रम है उस में काम का स्थान तीसरा है ठीक मोक्ष के पूर्व किन्तु काम को इतना दबा कर छिपा कर  रखा गया कि वह अपराधिक बन कर रह गया जिस से लाभ के स्थान पर उस से सौ गुना हानि समाज को झेलनी पदी काम से राम भोग से योग अथवा सेक्स से सैल्वेशनकी यात्रा है उस में तांत्रिक पथिकों की अपनी विशेषता व महत्ता है काम के समय तीन ही प्रकार के आचरण शास्त्रों में उल्लिखित हैं  दमन नमन व गमन&lt;/p&gt; &lt;p&gt;इस उपन्यास के माध्यम से वैदिक व तांत्रिक रचनाओं के आधार पर काम यहाँ श्रृंगारित और लाभदायी सिद्ध होता है मैंने उन सूत्रों को एकत्र कर अँधेरे में एक दीपक जलाया है&lt;/p&gt; &lt;p&gt;इस ग्रन्थ की  रचना प्रक्रिया का सब से प्रमाणिक आधार है महात्मा गाँधी जी के साहित्य से प्रेरणा सन १९२१ के बात है बारीसाल की ३५० वेशयों ने  महात्मा गाँधी को अपनी समस्याएं सुनने के लिए आमंत्रित किया वे वहाँ उपस्थित हुए और उन से १७ प्रश्न किये जिन का &amp;#8216;नव जीवन &amp;#8216; में विस्तार से वर्णन है इस की प्रेरणा वहीं से प्राप्त है उपन्यास की नायिका अपर्णा के द्वारा उस के प्रेमी अंगराग को लिखे गये पत्रों की श्रंखला से भी मुझे प्रभूत प्रेरणा मिली इस सब का समाहार इस उपन्यास में है |&lt;/p&gt; &lt;p&gt;प० २ इस उपन्यास में परिवार व विवाह संस्था पर आप ने अलग ढंग से अपना मत प्रस्तुत किया है जो विवाह संस्था को एक प्रकार से अस्वीकार करता सा प्रतीत हुआ है क्या विवाह संस्था की नई व्याख्या की आवश्यकता है ?&lt;/p&gt; &lt;p&gt;उ० प्रेम  ,  दाम्पत्य , परिवार व विवाह ये चारों शब्दों और इन की व्यावहारिक रूप रेख्यें भिन्न्हें इन में सब से सशक्त ,व्यापक अनादी और अनिवार्य है&amp;#8217; प्रेम &amp;#8216;|प्रेम का क्षेत्र इतना व्यापक है कि उस के अंतर्गत वनस्पति से पशु पक्षी और मानव से परमात्मा तक सभी सम्मिलित हैं मानव हृदय में प्रेम का भाव स्वाभाविक और जन्म जात है इसे अवरूद्ध या विकृत करने से मानव जीवन अव्यवस्थित एवं विकृत हो जाता है दाम्पत्य भी प्राकृतिक ,स्वाभाविक ,आवश्यक और सामाजिक स्वरूप है संसार में प्रगिक्र्ण के मद्ध्य्म से वनस्पति वर्ग का फलं प्रति फलं होता है और उस की प्रजातियाँ सुरक्षित होती हैं मानव वेग में भी दाम्पत्य की प्रकृति और स्वभाव ,आकर्षण और आवश्यकता ,सामाजिकता व अपेक्षा होती है यहाँ दाम्पत्य के साथ प्रेम प्रेम का अवतं होने लगता है&lt;/p&gt; &lt;p&gt;विवाह एक सामाजिक संस्था है वह जन्म  जात स्वभाव  अथवा प्राक्रतिक भाव नही है मनुष्य की आवश्यकता और प्राकृतिक आकर्षण के आधार पर पुरुष नारी के प्रति  अथवा नारी पुरुष के प्रति सम्मोहित होती है तो स्थायी भाव रति श्रृंगार रस में रूपांतरित हो ने लगती है फिर दाम्पत्य बनने लगता है यहाँ तक तो सब कुछ स्वाभाविक है किन्तु विवाह की सामाजिक व कानूनी घोषणा स्वाभाविक व प्राकृतिक नही है अत: जो प्राकृतिक नही है वह तो टूटेगा अथवा संशोधित होगा विवाह वेक ऐसी ही संस्था है प्रताड़ित हो कर विवाह का निर्वहन अथवा एक दूसरे के प्रति घृणा भाव रखते हुए वैवाहिक जीवन व्यतीत करना पशुता भी निकृष्ट है मानव समाज में सन्तति सुरक्षा के लिए परिवार एक  आवश्यकता है वनस्पति वर्ग व पशुवर्ग सभी स्वत: संचालित जीवन धारा में प्रवाहित होते हैं उन की सन्तति शीघ्र ही स्वब्ल्म्बी हो जाती अहि जब कि मनुष्य की सन्तति को लम्बा समय लगभग १८ वर्ष लगते हैं इस लम्बी अवधि में इसे परिवार ही अच्छी तरह सम्भाल सकता है शारीरिक विकास ,मानसिक संतुष्टि और सामाजिक सम्बन्ध इन तीनो धरातलों पर निरीह मानव सन्तति को परिवार तो चाहिए ही सब से पहले प्रेम फिर दम्प्त्यफिर परिवार और अंत में विवाह इन सब में यदि सामंजस्य दिया जा सके तो यहाँ कोई व्यवधान नही इन में किसी एक छोड़ देने की बात की जाये तो वह विव्ह ही है क्यों कि विवाह भावके साथ मनुष्य उतन्न नही होता इसी पृष्ठ आधार पर मैंने विवाह संस्था पर संशोधन अथवा विकल्प की बात कही है इस स्थापना का एक उत्तम उदाहरन है योशाग्नी उपन्यास |&lt;/p&gt; &lt;p&gt;प्र० ३ बहुत से लोग इस पुस्तक का प्रकट रूप से विरोध भी करते हैं पर प्रच्छन्न रूप से इसे छाती से भी चिपकाये रहते हैं आप की दृष्टि में  इस के क्या कारण हो सकते हैं ?&lt;/p&gt; &lt;p&gt;काम को समाज और परम्परा ने बड़ी निर्ममता और नासमझी के साथ कुचला है रति और श्रृंगार तथा प्रेम और आकर्षण प्राकृतिक हैं यह मनुष्य का जन्मजात स्वभाव है इस के उद्दाम वेग और दुर्दमनीय धारा को रोका नही जा सकता इस लिए आवश्यक है कि इस के लिए सहज ,स्वाभाविक और अनुकूल प्रवाह दी जाये जिस वस्तु एवं विचार को प्रतिबंधित किया जाता है उस की और आकर्षण बढ़ जाना मानव स्वभाव है सेक्स को छिपा कर अथवा दबा कर रखने के कारण मानव समाज का एक बड़ा हिस्सा पूरे संसार में एड्स ,उपदंश इत्यादि अनेक रति रोगों से ग्रस्त और विकलांग हो रहा है तथाकथित नैतिकतावादी अंधत्व पूर्ण धर्मिक्तावादी और अविचारित परम्परावादी समजिक्तावादी द्वारा यौनाचार के रहस्य को अंधकार में दुश्परिनामी स्वेछाचार के लिए छोड़ दिया और बाहर प्रकाश में यह कुचला गया है आवश्यकता इस बात की है कि स्वस्थ ,वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक रूप से यौनाचार का प्रशिक्ष्ण दिया जाये इसे विश्वविद्यालय में एक अनिवार्य प्रशिक्ष्ण का अंग बना देना चाहिए भारत में जिस  शिव शिवा के अर्द्धनारीश्वर रूप को उपस्थित किया गया है वह आदर्श और अनुकरणीय है एडम व ईव को जिस वृक्ष का फल खाने को मना किया गया था उस के प्रति  उन का आकर्षण इतना बढ़ गया कि वे वर्जित कार्य ही कर बैठे यह  उपन्यास यौनाचार ,रति रहस्य व काम पुरुषार्थ के सूक्ष्म रहस्यों को इतनी स्पस्त्ता से व विश्वसनीयता से खोलता है कि इसे एक बार पढना आरम्भ कर देने वाले पाठक निश्चय ही इसे छाती से चिपकाये रखेंगे मैंने अपने व्यक्तव्य में कहा है और यह सच भी है कि कुछ पाठकों ने इसे &amp;#8216;सर्वोल्लासतन्त्र्म &amp;#8216;के सदृश सम्मान सहित लाल कपड़े में बाँध  कर पूजा स्थल पर भी रखा है समाज के कुछ बलाकचारी मनुष्यों ने इस उपन्यास का नामोल्लेख भी पाप की श्रेणी में रखा है&lt;/p&gt; &lt;p&gt;भारत में काम देवता माना गया है काम दे जैसा शब्द प्रयोग विपुलता और सारथी के साथ उपलब्ध है काम कभी कुरूप नही हो सकता काम सौन्दर्य का सागर  और एश्वर्य का आकाश होता है इस में सुख की संतुष्टि और आनन्द का उल्लास मिलता है इसे दबा कर रखना हिलते हुए फूल पर लोहे का कवच पहनाने जैसा है मेरी लेखकीय दृष्टि में योशाग्नि यदि ज्वाला मुखी का अग्नि सार है तो केसर पतल्श्री का पुष्पोद्यान भी है इस में कृषि कल्प  का करिश्न्त्व  है तो दूसरी कल्प  ओर ऋषि  का अनूत्त्रित आध्यात्म भी है इस ग्रन्थ की रसोपचिती के लिए जिस आस्वद्यता की आवश्यकता है उस के लिए एक अभ्यास संस्कार चाहिए जिन लोगों को रस्तम रसल फल आम्र के खाने से वमन हो जाता है उन के सम्बन्ध में मुझे कुछ नही कहना है |&lt;/p&gt; &lt;p&gt;प्र० ४ आप का दूसरा महत्व पूर्ण उपन्यास है &amp;#8216; जिन्दा जख्म &amp;#8216; इस उपन्यास की नायिका माहजबी के रूप में एक यवती ने अपने को साधारणीकृत रूप में घोषित किया है आज के आतंकवादी वातावरण में क्या माहजबी जैसी नायिका मिलना सम्भव है ?&lt;/p&gt; &lt;p&gt;उ० समाज में वस्तुत: दो तरह के लोग होते हैं एक तो वैसे लोग जो नीति नैतिकता ,अनुशासन एयर प्रशिक्ष्ण में बंध कर जीते हैं ऐसे लोग दूसरों के समक्ष अपनी उपस्थिति को बोझिल बना देते हैं दूसरे प्रकार के वे लोग वो होते हैं जो जीवन की धारा और वायु वेग की तरह जीते हैं नदी के तटबंध नहर की तरह पहले से बने  बनाये नही होते इसी प्रकार वायु वेग में एयर कंडीशनर की  एकतानता नही होती  पवन के उनचास वेग रूप होते हैं किस समय और किस स्थल पर वायु वेग का कौन सा रूप उपस्थित हो जायेगा यह कहना कठिन है इस कोटि के व्यक्ति उसी समय निर्णय करते हैं कि क्या किया जाये जब जैसी परिस्थिति उत्पन्न होती है उस के अनुकूल वे आत्म निर्णय करते हैं ऐसे लोग स्वभाव और सहजता में जीते हैं वे किसी पर बोझ बनने की जगह उन से समरस स्वभाव में जीते हैं &amp;#8216;जिदा जख्म &amp;#8216;के दो पात्र ऐश्वर्य कान्त कुंतल और माहजबी ऐसे ही चरित्र हैं जो प्रशिक्षित जीवन के अपेक्षा प्राकृतिक एवं स्वाभाविक जीवन शैली में जीते हैं&lt;/p&gt; &lt;p&gt;परम्परा से प्राप्त दृष्टान्तों का अनुसन्धान किया जाये तो राम व कृष्ण इन दोनों जीवन वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं राम मर्यादा पुरुषोतम हैं जब कि कृष्ण लीला पुरुष नटवर राम वही करते हैं जो न्याय और उचित है कृष्ण इस के विलोम हैं वे जो कुछ करते हैं वही औचित्य और मर्यादा के रूप में स्वीकृत हो जाता हियो दोनों महान हैं अवतारी पुरुष और लोक नायक हैं लेकिन इतना टी सत्य है कि प्रशिक्ष्ण से स्वभाव ,संस्कृति से प्रकृति और चित्त से आत्मा बड़ी है माहजबी एक उच्छल जीवन धारा प्रकृति प्रवाह और उल्लास भाव है इस लिए वह आत्म नन्दिनी के साथ लोक रंजिनी भी सिद्ध होती है यह प्रकृति और स्वभाव के निकटतम है समाज को ऐसे चरित्र की आवश्यकता है समाज में ऐसे चरित्र के दृष्टान्त भी अनेक हैं&lt;/p&gt; &lt;p&gt;आप ने अपने ब्लॉग पर भी एक युवती के चरित्र को प्रस्तुत कर के इस की पुष्टि की है |&lt;/p&gt; &lt;p&gt;जिन्दा जख्म की नायिका को अंत में आप ने आतंकी गोली का शिकार बनवाया है क्या उस का जिन्दा रह कर क्त्त्रप्न्थ से लड़ना जरूरी नही था ?&lt;/p&gt; &lt;p&gt;चौबीस कैरेट सोने से गहने नही बनते गहने के लिए शुद्ध सोने टांकीकी मिलावट आवश्यक है समाज के जो व्यक्ति मिलावट से रहित अपनी आत्मा और बाहर प्रक्रति के साथ जीते हैं समाज उन्हें जीने नही देता सुकरात, जीजस ,महात्मा गाँधी मार्टिन लूथर अब्राहिम लिंकन जून ऍफ़ केनेडी या ऐसे हजारों उदाहरन हैं जिनको समाज ने इस लिए मार दिया कि उन में मिलावट नही टी पारदर्शिता ही उन के लिए अपराध बन गई माहजबी पूई मनुष्यता का प्रतिनिधित्व करने वाली महिला है उस में सौन्दर्य व एश्वर्य दोनों   का संयोग है इस उपन्यास के आरम्भ में जो कुछ स्थापनाएं उपस्थित की गई हैं उन आध्यात्म को सर्वोपरी महत्व देते हुए धर्म या मत को अस्वीकार किया गया है संसार में तीन सौ धर्म हैं समाज का समूचा वर्ग तीन सौ खंडों में विभाजित किया गया है इसी प्रकार  भाषा ,जाती देश रीति रिवाज ,वेश इत्यादि अनेक आधारपर मनुष्यता खंड खंडित है मनुष्यता का साम्रस्त्यइन खंडों में खो गया है पूरी तरह शुद्ध स्वर्ण ,शुद्धात्मा व्यक्ति ,पारदर्शी झील अप्रदूषित आकाश का अस्तित्व संसार को सह्य नही होता अत: माहाजाबी का आतंकी गोली का शिकार होना स्वाभाविक है ऐसे व्यक्तियों के प्रति समाज आतंक का विस्फोट करता है आतंक और भी दोनों ही पशुता हैं&lt;/p&gt; &lt;p&gt;एक बाघ आतंक फैला कर मृग का शिकार कता है और मृग भयभीत हो कर भागता है दोनों पशु धर्म और गुण हैं ऐश्वर्य कान्त कुतल और माहजबी दोनों पशुता के पर्याय आतंक के विरुद्ध संघर्ष करते हैं परिणामत: ऐश्वर्य कान्त कुंतल विकलांग बना दिए जाने पर पीड़ा का जो मार्मिक प्रसंग उत्पन्न होता है वह हजार हृदयों में सैदेव सुलगता रहता है यदि वह जीवित रह पाती एयर संघर्ष करती रहती तो ऐसा प्रभाव उतन्न नही हो पता इस लिए माहजबी का शहीद होना ही स्वाभाविक है |&lt;/p&gt; &lt;p&gt;इस उपन्यास के नायक ऐश्वर्य कान्त कुंतल का कट्टर पन्थ से लड़ने के लिए पाकिस्तान चले जाने का कार्यक्रम कहाँ तक उचित है पाकिस्तान के कट्टर वातावरण में उनके क्या कार्यक्रम होंगे और उन की क्रियान्विति कैसे होगी इस बात का उपन्यास में उल्लेह नही है ?&lt;/p&gt; &lt;p&gt;कथा साहित्य में सभी बातें खुलकर नही लिखी जाती प्रसंगों के आधार पर प्रच्छन्न तत्व तथा कतहा श्रृंखला को समझने की आवश्यकता होती है दूसरी बात यह है कि जो आत्मोपलब्ध व्यक्ति होते हैं वे कार्यक्रम और प्रकल्प बना कर नही जीते वे जहां उपस्थित होते हैं वहीं उस स्थान ,काल और समस्या के आधार पर समाधान उपस्थित करते हैं जो उन की आत्मा की आवाज होती है सभी बुद्ध पुरुष ऐसा  ही करते है अकास में म्द्रते बादलजिस स्वछंदता और आत्म वृति में जीते हैं वह किसी अनुशासन अथवा पूर्व निर्धारित परिनियमों से बंधा नही है स्वछन्द ही छन्दस सौन्दर्य बन जाता है किसी भी देश और काल की इकोलोजी से वह समरस हो कर वहीं बरस  जाता है यही पर्जन्य स्वभाव व पर्जन्य सिद्धांत है पर्जन्य आकास के फलक पर सौन्दर्य के विभिन्न दृश्य उपस्थित करते हैं वहाँ व्र्संत में इंद्र धनुष भी उगते हैं जैसे सबों के लिए उन्मुक्त आनन्द का आमन्त्रण टोरं द्वार |ऐश्वर्य कान्त कुंतल पर्जन्य पुरुष हैं वे कभी किसी बंधन में नही होते देश की सीमाएं उन की दृष्टि में निरर्थक हैं वे हिन्दू मुसलमान जैसा भेद भाव भी नही मानते हिन्दू मुसलमान या इसी कहे जाने से पहले वे क्या थे कवक एक शुद्ध और पारदर्शी मनुष्य और मनुष्यता इसे लोग वेद और पूरण पढ़ कर नही जीते वर्ण जी कर वेद और पूरण की रचना करते हैं वे अगर पाकिस्तान जा आतंक के उन्मूलन के लिए काम करना चाहते हैं तो हम इसे करुणा का क्षैतिज विस्तारं मानेगे यही &amp;#8216;करुणा एव एको रस: &amp;#8216;सिद्धावस्था में पहुंचा हुआ सूत्र बन जाता है भ्रमों का आवरण टूटने पर पारदर्शी मनुष्य का अवतरण होता है प्रकृति ने पृथ्वी बनाई है जिस पर सबों का अधिकार है हवा भी एक ही है जिस में सभी साँस लेते हैं अग्नि की ऊष्मा और आकाश का विस्तार भी सबों के लिए समान है समाज ने खंडन की परम्परा बनाई और लोगों ने टुकड़ों में जीने के लिए लाचार कर दिया ऐश्वर्य कान्त इस का विरोध करते हैं उन के लिए हिन्दुस्थान पाकिस्तान का बंटवारा और हिन्दू मुसलमान जैसा विभाजन बेमानी है वे अविभाजित भूगोल और अखंडित मनुष्यता में आस्था रखते हैं इसी अंड में वे पाकिस्तान जाते हैं राष्ट्र और धर्म के आवरण के पहले जिस अराष्ट्र और धर्म साहित्य का अस्तित्व था वही मानव वंश की आपेक्षित प्रकृति है |&lt;/p&gt; &lt;p&gt;प्र० हिंदी साहित्य में बहुत से साहित्य आन्दोलन चले ,पर काफी समय से एक खालीपन का अनुभव हो रहा है उत्तर आधुनिकता वादी अपना स्वरूप निर्धारित नही कर सके कुछ उपयोगिता वादी .यथार्थ वादी भी साहित्य में अपना स्थान नही बना पाए आप को क्या लगता है ?निकट भविष्य में साहित्य की २ आन्दोलन देने वाला है ?&lt;/p&gt; &lt;p&gt;उ० आप ठीक कह रहे हैं हिंदी साहित्य में उत्तर आधुनिकता के धरातल पर कोई उल्लेखनीय आन्दोलन क्रांति या हलचल नही हुई पहले धर्म ने साहित्य को अनुगामी बनाया था बाद में राजनीति ने विज्ञानं के प्रभाव ने भी साहित्य की धारा में बाधा  उत्त्पन्न की है पत्र साहित्य भी साहित्य के अंतर्गत एक महत्व पूर्ण विधा है मोबाईल के व्यापक प्रचार ने पत्र लेखन को भी प्राय: स्प्माप्त ही कर दिया है गाँधी जी के पत्र आचर्य महावीर प्रसाद द्विवेदी ,आचर्य शिव पूजन शय और नलिन विलोचन शर्मा के पत्र हिंदी साहित्य की धरोहर हैं ऐसे और भी पत्रिक साहित्य हिंदी में उपलब्ध हैं इंटरनेट ,डाट कॉम ,ब्लॉग ,लैपटाप कम्पुटर इत्यादि ने क्रांति उपस्थित की है ग्रन्थ पुस्त्काल्ट और वाचनालय एक सीडी के माध्यम से जेब में समा  जाते हैं कलम के निर्माण और विक्रय पर भ चोट आई है अब उँगलियाँ कलम पकड़ने की जगह कम्पोज करती हैं तात्विक शोध की एक स्वस्थ्य परम्परा रही है जिस को बहुत ही शिथिल किया गया है नेट पर बहुत सारी सूचनाये बहुत से ग्रन्थों से ले कर एकत्र कर दी जाती हैं मूल ग्रन्थ का साक्षात् किये बिना इंटर नेट के सहारे शोध सम्पन्न कर लना बिलकुल अधूरापन है यह ठीक है कि उत्तर आधुनिकता के इस काल में श्रेष्ठ रचनाएँ नही हो रही हैं समय आभाव व झितित के इस युग में हर चीज छोटी होती चली जा रही है बाजार वाद और शीग्रता के इस युग में न तो कोई अभिज्ञान शाकुंतलम पढ़ता है न राम चरित मानस न रामायण न ही महाभरत न बालजाक पढ़ता है न ही सेकश्पीयर जो मूल का आनन्द ऐ उस से व्यक्ति वंचित रह जाता है&lt;/p&gt; &lt;p&gt;यद्यपि यह बोनापन का युग है किन्तु प्रज्ञा का घनत्व घटा नही है कोई वामन ही विरत बन जाता है बिंदु सिन्धुत्व धारण कर सकता है एक प्रकार से सूत्र शैली का इसे पुनर्जागरण कह सकते हैं |&lt;/p&gt; &lt;p&gt;प्र० क्या साहित्य को वाद से उपर उठ कर मानवीय स्म्वेद्नायों के अधिक निकट होना चाहिए था या वाद में फंसना चाहिए या तथाकथित मठाधीशों के चंगुल से साहित्य को बाहर रहना चाहिए?&lt;/p&gt; &lt;p&gt;उ० आप की चिंता स्वाभाविक है वाद ग्रस्त और मठाधीशों का शरण आश्रय दोनों ही गलत हैं बिना उन्मुक्ति और स्वछंदता के विराट और सनातन कार्य नही हो सकता ,किन्तु विचारक और आलोचक प्रत्येक रचनाकार को किसी न किसी वाद में बांध कर ही देखना चाहते हैं किसी रचना कार का उस की स्वतंत्र गुणवत्ता के आधार पर उस का मूल्यांकन सचमुच कठिन काम है इस से उन्हें  सहूलियती होती है फिर निश्चय ही इस प्रक्रिया के द्वारा वे निष्पक्ष मूल्यांकन नही कर पाते हैं तटस्थ मूल्यांकन और विश्लेष्ण का यहाँ आभाव है&lt;/p&gt; &lt;p&gt;यहीं  प्रतिबद्धता का प्रश्न उठता है यदि कोई प्रतिबद्ध है तो वह वाद से बद्ध है अथवा वाद्ब्द्ध है तो स्वाभाविक वह प्रतिबद्ध है वाद शेष को अशेष से खंडित कर अलग कर देता है वहाँ समूचा पन नही होता जहाँ तक साहित्य का प्रश्न है यह भाव समरस दृष्टि ,निर्वाद बोध निश्प्र्तिब्द्ध नीति और मूल सौन्दर्य शिल्प के साथ संयुक्त और सम रस है अपने को कंद कर खड़ा कर लेने से अखंडता का विराट लोक नही दीखेगा घटाकाश का घेरा जब तक नही टूटता तब तक महाकाश की अनुभूति नही होती इस के लिए कुछ करना नही होता यह एक स्वाभाविक प्रक्रिया है घटाकाश टूटते ही महाकाश उपलब्ध हो जाता है&lt;/p&gt; &lt;p&gt;प्र० आज दलित साहित्य की चर्चा जोरों पर है इस में भी कुछ मठाधीशों से ही कहना पूर्ति हो रही है क्या साहित्य को भी नागरिकों की भांति उदासीन रहना चाहिए स्वयम दलित, महिला अल्पसंख्यक आदि अपने खेमे से बाहर जा रहे हैं इस पर आप के विचार ?&lt;/p&gt; &lt;p&gt;उ० दलित और अदलित जैसा विभाजन रचना कार और साहित्य दोनों के लिए खतरनाक है साहित्य का अर्थ ही होता है सब के साथ सामरस्य वहाँ एकत्व ,विश्व्त्व एवं सनातनत्व की भावना प्रबल होती है वहाँ कोई भेद भाव नही होता वहाँ रागद्वेष की भवना उत्पन्न नही होती जब हम अखंड से खंड को कट कर कहीं खड़ा कर देते हैं बगीचा से फूल तोड़ कर ड्राइंग रूम में सजा देने से पूरा बगीचा उपस्थित नही होता&lt;/p&gt; &lt;p&gt;संत कवि रविदास बेशक किसी भी जाती से सम्बन्धित थे परन्तु उन्होंने &amp;#8216;प्रभु जी तुम चन्दन हम पानी &amp;#8216;जैसी मार्मिक पंक्ति लिखी है क्या हम उसे  दलित साहित्य  माने और कवि को दलित कवि ?संत कबीर जुलाहा थे उन के साहित्य में साहित्य को क्या दलित वर्ग में ही रखना होगा ?फिर यह निर्देश भी उपस्थित करना होगा कि इसे केवल इसे दलित लोग ही पढ़ें दलित और द्लितेतर साहित्य का बंटवारा अमानवीय एवं लघु चिन्तन का परिणाम है मैं इस अप्राकृतिक एवं अस्वाभाविक विभाजन के दृष्टिकोण के विरूद्ध हूँ |&lt;/p&gt; &lt;p&gt;प्र० क्या प्रश्नोत्तर को साहित्य की एक स्वतंत्र विधा में स्वीकार किया जाना चाहिए ?&lt;/p&gt; &lt;p&gt;उ० प्रश्नोत्तर वांग्मय की प्राचीनतम विधा है तुटली आवाज में एक नन्हा सा बच्चा एक पक्षी को देख कर अपने पिता से पूछता है ,यह क्या है ? अनुभवी पिता उत्तर देता है और बालक ग्यानाब्द्ध होता चला जाता है यही क्रम गुरु शिष्य के बीच में चलता है फिर समाज के धरातल पर व्यक्ति विभिन्न समस्याओं के बीच उन के समाधान के लिए खड़ा होता है तब प्रश्नोत्तर  का व्यवहारिक क्रम बनने लगता है प्रश्न से उत्तर निकलते हैं समुद्र मंथन होने पर चौदह रत्न निकले थे यह ठीक है कि सभी रत्न समुद्र में विद्यमान थे किन्तु उन का उद्भव व प्र्क्तिक्र्ण समुद्र मंथन से ही हुआ था महाभारत में यक्ष प्रश्न के अंतर्गत १२६ प्रश्न और उन के उत्तर दिए गए हैं यह प्र्शोत्तर आज भी ज्ञान वर्धक हैं महाभरत के गीता खंड में भी प्रश्नोत्तर विधान है या तो धृत राष्ट्र संजय से प्रश्न करते हैं अथवा अर्जुन कृष्ण से संस्कृत के अनेक सुभाषित ग्रन्थ इसी प्रश्नोत्तर शैली पर आधारित हैं प्रश्नोत्तर शाश्त्रर्थ का ही सुनियोजित रूप है इसे साहित्य की सशक्त और अपरिहार्य विधा के रूप में स्वीकार कर लेने में कोई आपति नही होनी चाहिए |&lt;/p&gt; &lt;p&gt;प्र० वर्तमान साहित्य जगत के लिए आप के क्या संदेश और आशीर्वाद हैं ?&lt;/p&gt; &lt;p&gt;सच पूछिए तो साहित्य का पाठक किसी संदेश और आशीर्वाद की अपेक्षा नही रखता जो भी हम से ऐसी अपेक्षा रखते हैं उन्हें मेरे साहित्य से गुजरना होगा संदेश और सुभकामना सब कुछ वही उपलब्ध हैं संदेश और शुभकामना  प्रकट करने वाले ऊंचाई पर बैठ जाते हैं और श्रोता पर बोझ बन जाते हैं सच्चा साहित्यकार कभी किसी पर बोझ नही बनना चाहता वह समरस होना जनता है उस की प्रकृति असम्बद्ध और स्वच्छंद की होती है धर्म गुरुओं और संत परम्परा में उपदेश  की परम्परा है साहित्य में तो हद से हद &amp;#8220;कन्तासम्मितात्योप्देश्युजे &amp;#8220;का स्वरूप माना जाता है रचना कार सभी भूत (मानव ,पशु पक्षी ,वनस्पति )इत्यादि पर अपने स्व का विस्तारं कर फ़ैल जाता है और फिर अपने भीतर समान रूप से सब को स्थान देने वाला व्यक्ति साहित्यकार बन जाता है ईशोपनिषद की पंक्ति है&lt;/p&gt; &lt;p&gt;यस्तु सर्वाणि भूतान्यत्म्न्ये वानुप्श्यती&lt;/p&gt; &lt;p&gt;स्र्व्भूतेशु चात्मानं ततो न विजुगुप्सते&lt;/p&gt; &lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;br /&gt; &lt;/strong&gt;&lt;/div&gt; &lt;/div&gt; &lt;div class="feedflare"&gt; &lt;a href="http://feeds.feedburner.com/~ff/janokti/pfzK?a=ej9bgZD8ATg:epyW1m6KdDA:yIl2AUoC8zA"&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~ff/janokti/pfzK?d=yIl2AUoC8zA" border="0"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt; &lt;/div&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/janokti/pfzK/~4/ej9bgZD8ATg?utm_source=feedburner&amp;utm_medium=email" height="1" width="1"/&gt;&lt;/div&gt; &lt;/td&gt; &lt;/tr&gt; &lt;tr&gt; &lt;td style="margin-bottom:0;line-height:1.4em;"&gt; &lt;p style="margin:1em 0 3px 0;"&gt; &lt;a name="5" style="font-family:Arial, Helvetica, sans-serif;font-size:18px;" href="http://feedproxy.google.com/~r/janokti/pfzK/~3/uMIFi4o_X7s/?utm_source=feedburner&amp;utm_medium=email"&gt;सुकन्या कहाँ है , राहुल गाँधी से कोर्ट ने माँगा जवाब&lt;/a&gt; &lt;/p&gt; &lt;p style="font-size:13px;color:#555;margin:9px 0 3px 0;font-family:Georgia,Helvetica,Arial,Sans-Serif;line-height:140%;font-size:13px;"&gt; &lt;span&gt;Posted:&lt;/span&gt; 01 Mar 2011 11:45 PM PST&lt;/p&gt; &lt;div style="margin:0;font-family:Georgia,Helvetica,Arial,Sans-Serif;line-height:140%;font-size:13px;color:#000000;"&gt;&lt;p style="text-align: justify;"&gt;&lt;a rel="attachment wp-att-13988" href="http://www.janokti.com/sansad-political-news-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%a6-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%97/national-news-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%af/%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%95%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%81-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a5%81%e0%a4%b2-%e0%a4%97%e0%a4%be%e0%a4%81/attachment/rahul-gandhi-3/"&gt;&lt;img class="alignright size-full wp-image-13988" title="rahul gandhi" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/rahul-gandhi.gif" alt="" width="320" height="320" /&gt;&lt;/a&gt;के युवराज जो भारत का प्रधानमंत्री बनने के सपने देख रहे हैं उन पर एक युवती समेत उसके परिजनों को गायब करने का आरोप लगा है | हालाँकि सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर ऐसी बातें पिछले दो-तीन सालों से चर्चा में है लेकिन अब तक इसे महज अफवाह मान कर देखा जा रहा था |  विगत मंगलवार को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक युवती और उसके परिवार को गायब करने के सम्बन्ध में राहुल गांधी और उत्तर प्रदेश के अधिकारियों को नोटिस जारी किया है।&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;मध्य प्रदेश के पूर्व विधायक किशोर समरीते द्वारा दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि अमेठी के बलराम सिंह की 24 वर्षीया पुत्री सुकन्या सिंह और उसका परिवार 13 दिसम्बर 2006 को राहुल गांधी से उनके संसदीय निर्वाचन में मिला था। तब से ही युवती  और उसका परिवार &amp;#8216;लापता&amp;#8217; है। कांग्रेस नेता और उनके पांच &amp;#8216;विदेशी मित्रों&amp;#8217; ने कथित रूप से 24 वर्षीया सुकन्या सिंह पर हमला किया।&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;आईएनएस के अनुसार याचिकाकर्ता समरीते ने कहा कि एक वेबसाईट पर इस खबर को देखने के बाद उन्होंने अमेठी आकर देखा कि लड़की के घर पर ताला लगा है। परिवार कहां है, इस बारे में ग्रामीण कुछ भी बताने के लिए तैयार नहीं हैं।&amp;#8221;&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;मीडिया मेनेजमेंट के जरिये देश भर में दलित और युवा प्रेमी की छवि गढ़ने वाले युवराज पर यूट्यूब पर जारी एक विडियो में भी एक लड़की के साथ बलात्कार की बात प्रस्तुत की गयी है | न्यू मीडिया के इस युग में अक्सर लोग भूल जाते हैं कि मीडिया चैनलों और अख़बारों को खरीद लेने से उनकी मनमानी नहीं चलने वाली है | राहुल को अदालती नोटिस इस बात का प्रमाण है कि वेबसाईट पर प्रकाशित एक खबर को लेकर भी लोग न्यायलय भी जा सकते हैं | बहरहाल , मामला भले ही आरुषि जैसी हाईप्रोफाइल ना होकर एक गरीब लड़की की इज्जत और उसकी जिंदगी से जुड़ा है लेकिन इस मामले की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए |&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt; &lt;div class="feedflare"&gt; &lt;a href="http://feeds.feedburner.com/~ff/janokti/pfzK?a=uMIFi4o_X7s:haPdqBopMnc:yIl2AUoC8zA"&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~ff/janokti/pfzK?d=yIl2AUoC8zA" border="0"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt; &lt;/div&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/janokti/pfzK/~4/uMIFi4o_X7s?utm_source=feedburner&amp;utm_medium=email" height="1" width="1"/&gt;&lt;/div&gt; &lt;/td&gt; &lt;/tr&gt; &lt;tr&gt; &lt;td style="margin-bottom:0;line-height:1.4em;"&gt; &lt;p style="margin:1em 0 3px 0;"&gt; &lt;a name="6" style="font-family:Arial, Helvetica, sans-serif;font-size:18px;" href="http://feedproxy.google.com/~r/janokti/pfzK/~3/K_mLjGe-bIA/?utm_source=feedburner&amp;utm_medium=email"&gt;गोधरा फैसले से फरेबी साबित हुए लालू&lt;/a&gt; &lt;/p&gt; &lt;p style="font-size:13px;color:#555;margin:9px 0 3px 0;font-family:Georgia,Helvetica,Arial,Sans-Serif;line-height:140%;font-size:13px;"&gt; &lt;span&gt;Posted:&lt;/span&gt; 01 Mar 2011 11:02 PM PST&lt;/p&gt; &lt;div style="margin:0;font-family:Georgia,Helvetica,Arial,Sans-Serif;line-height:140%;font-size:13px;color:#000000;"&gt;&lt;p style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size: 13.3333px;"&gt;प्रशांत सिंह&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;&lt;a rel="attachment wp-att-13981" href="http://www.janokti.com/%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%a4-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be/%e0%a4%97%e0%a5%8b%e0%a4%a7%e0%a4%b0%e0%a4%be-%e0%a4%ab%e0%a5%88%e0%a4%b8%e0%a4%b2%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%ab%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%ac%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%ac%e0%a4%bf/attachment/lalu-yadav-2/"&gt;&lt;img class="alignright size-full wp-image-13981" title="lalu yadav" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/lalu-yadav.jpg" alt="" width="420" height="339" /&gt;&lt;/a&gt;लालू प्रसाद यादव जी हां ये नाम अचानक याद आ गया। दरअसल मंगलवार दिनांक 22.02.2011 को गोधरा साबरमती एक्सप्रेस अग्निकांड पर फैसला आया। इस फैसले ने अचानक लालू की याद दिला दी। लालू बेहद लोकप्रिय नेता है। पूरे देश में उन्हें पसंद किया जाता है, लेकिन ये समझ में नहीं आता कि लालू झूठ और फरेब का सहारा क्यों लेते हैं। क्या लोकप्रियता झूठ और फरेब से ही हासिल की जा सकती है। यदि ऐसा है तो फिर पूरे देश में ये संदेश दिया जाना चाहिए। वैसे भी लालू जैसे लोग इस तरह से करेंगे तो फिर आनेवाली पीढ़ी तो झूठ फरेब और भ्रष्टाचार के पीछे  तो भागेगी ही। 27 फरवरी, 2002 को गुजरात में गोधरा रेलवे स्टेशन के पास साबरमती ट्रेन की एस-6 कोच में आग लगा दी जाती है। इस आग की चपेट में आकर 59 कारसेवकों की मौत हो जाती है। इस मामले में 1500 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाती है। उन पर आतंकवाद निरोधक कानून पोटा लगा दिया जाता है। इस अग्निकांड के सिलसिले में जिन्हें गिरफ्तार किया जाता है वो अल्पसंख्यक समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। अग्निकांड के बाद 28 फरवरी से 31 मार्च 2002 के बीच गुजरात के कई इलाकों में दंगा भड़कता है जिसमें 1200 से अधिक लोग मारे जाते हैं। मारे गये लोगों में ज्यादातर अल्पसंख्यक समुदाय के लोग होते हैं। उस वक्त सत्ता में भाजपा की नरेंद्र मोदी की सरकार होती है। मोदी सरकार हिन्दू कारसेवकों की मौत का बदला निकालती है। वो अल्पसंख्यक समुदाय की आबादी वाले इलाकों से पुलिस और सुरक्षा बल हटाकर बहुसंख्यक समुदाय की आबादी वाले इलाकों में फोर्स को लगा देती है। मंशा साफ रहती है कि अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को ज्यादा से ज्यादा नुकसान हो। अल्पसंख्यक समुदाय को ज्यादा नुकसान होता भी है। मगर उसके बाद भी गंदी राजनीति नहीं रुकती। कारसेवकों को जलाने के मामले में फैसला आ गया है फिर भी राजनीति का गंदा चेहरा सामने से हटने का नाम नहीं ले रहा। एक तरफ नरेंद्र मोदी हिन्दुओं को खुश कर रहे हैं तो दूसरी ओर लालू ने अल्पसंख्यक समुदाय को खुश करने के लिए 4 सितंबर 2004 को बनर्जी आयोग का गठन कर दिया। इस आयोग ने लालू के मन के मुताबिक अपनी रिपोर्ट दे दी। रिपोर्ट में कहा गया कि आग बाहरी तत्वों ने नहीं लगाई। आग बोगी के अंदर से लगी थी। यानि आग कारसेवकों की गलती का नतीजा हो सकता है। वहीं नानावती आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि आग बाहर से लगाई गई थी और ये पूर्वनियोजित साजिश का हिस्सा था। अदालत ने अपने फैसले में नानावती आयोग की रिपोर्ट पर अपनी मुहर भी लगा दी है। अदालत ने अग्निकांड को साजिश माना और 31 लोगों को दोषी करार दिया। मौलवी सईद उमरजी को इस अग्निकांड का मुख्य आरोपी  बनाया गया था, उन्हें सबूतों के अभाव में अदालत ने बरी कर दिया। कोर्ट ने 94 आरोपियों में से 63 को मामले से बरी कर दिया। लालू के लिए एक सबक होना चाहिए कि गंदी राजनीति से ज्यादा दिन तक सत्ता पर राज नहीं किया जा सकता।  अच्छा काम करने पर सभी उसका सम्मान करते हैं और उसका नतीजा भी पक्ष में आता है। बिहार में नीतीश कुमार ने अच्छा काम किया। उन्हें उसके सकारात्मक नतीजे मिल रहे हैं। लालू ने बिहार के लिए गलत किया। नतीजा ये है कि आज उनको बिहार की सत्ता के लिए तरसना पड़ रहा है। चाहे अल्पसंख्यक समुदाय हो या फिर बहुसंख्यक समुदाय कोई गलत करेगा उसकी सजा उसे जरूर मिलनी चाहिए। चलिए अल्पसंख्यक समुदाय के कुछ लोगों ने गलत किया। उन्हें उसकी सजा मिलने जा रही है। अब गुजरात दंगों के जो लोग दोषी हैं उन्हें सजा कब मिलेगी। बड़ा सवाल है उम्मीद है जवाब जल्दी मिलेगा।&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt; &lt;div class="feedflare"&gt; &lt;a href="http://feeds.feedburner.com/~ff/janokti/pfzK?a=K_mLjGe-bIA:SOnwXXhhy2s:yIl2AUoC8zA"&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~ff/janokti/pfzK?d=yIl2AUoC8zA" border="0"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt; &lt;/div&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/janokti/pfzK/~4/K_mLjGe-bIA?utm_source=feedburner&amp;utm_medium=email" height="1" width="1"/&gt;&lt;/div&gt; &lt;/td&gt; &lt;/tr&gt; &lt;/table&gt; &lt;table style="border-top:1px solid #999;padding-top:4px;margin-top:1.5em;width:100%" id="footer"&gt; &lt;tr&gt; &lt;td style="text-align:left;font-family:Helvetica,Arial,Sans-Serif;font-size:11px;margin:0 6px 1.2em 0;color:#333;"&gt;You are subscribed to email updates from &lt;a href="http://www.janokti.com"&gt;JANOKTI : जनोक्ति :  राज-समाज और जन की आवाज&lt;/a&gt; &lt;br /&gt;To stop receiving these emails, you may &lt;a href="http://feedburner.google.com/fb/a/mailunsubscribe?k=dYtSEolrkS-K8ShJPEJPwgGa3hs"&gt;unsubscribe now&lt;/a&gt;.&lt;/td&gt; &lt;td style="font-family:Helvetica,Arial,Sans-Serif;font-size:11px;margin:0 6px 1.2em 0;color:#333;text-align:right;vertical-align:top"&gt;Email delivery powered by Google&lt;/td&gt; &lt;/tr&gt; &lt;tr&gt; &lt;td colspan="2" style="text-align:left;font-family:Helvetica,Arial,Sans-Serif;font-size:11px;margin:0 6px 1.2em 0;color:#333;"&gt;Google Inc., 20 West Kinzie, Chicago IL USA 60610&lt;/td&gt; &lt;/tr&gt; &lt;/table&gt; &lt;/div&gt; &lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6956958984171538532-663939164868196322?l=hindisahity.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://hindisahity.blogspot.com/feeds/663939164868196322/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://hindisahity.blogspot.com/2011/03/janokti_02.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6956958984171538532/posts/default/663939164868196322'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6956958984171538532/posts/default/663939164868196322'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://hindisahity.blogspot.com/2011/03/janokti_02.html' title='JANOKTI : जनोक्ति'/><author><name>नरेन्द्र निर्मल</name><uri>http://www.blogger.com/profile/16479213514036313208</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_qw0JRiWRDZU/SXyW6w_AHBI/AAAAAAAAAH0/QBx-PMdEfB4/S220/narendra+pic.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-6956958984171538532.post-3124312625640574833</id><published>2011-03-01T19:28:00.001-08:00</published><updated>2011-03-01T19:28:25.027-08:00</updated><title type='text'>JANOKTI : जनोक्ति</title><content type='html'>&lt;style type="text/css"&gt;                          h1 a:hover {background-color:#888;color:#fff ! important;}                          div#emailbody table#itemcontentlist tr td div ul {                                         list-style-type:square;                                         padding-left:1em;                         }                                  div#emailbody table#itemcontentlist tr td div blockquote {                                 padding-left:6px;                                 border-left: 6px solid #dadada;                                 margin-left:1em;                         }                                  div#emailbody table#itemcontentlist tr td div li {                                 margin-bottom:1em;                                 margin-left:1em;                         }                           table#itemcontentlist tr td a:link, table#itemcontentlist tr td a:visited, table#itemcontentlist tr td a:active, ul#summarylist li a {                                 color:#000099; 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&lt;span&gt;Posted:&lt;/span&gt; 01 Mar 2011 06:51 AM PST&lt;/p&gt; &lt;div style="margin:0;font-family:Georgia,Helvetica,Arial,Sans-Serif;line-height:140%;font-size:13px;color:#000000;"&gt;&lt;p&gt;&lt;a rel="attachment wp-att-13971" href="http://www.janokti.com/art-literature-%e0%a4%95%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af/poem-hindi-%e0%a4%95%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a4%be/%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%a4%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a4%a4%e0%a4%b2%e0%a4%ac/attachment/jjin/"&gt;&lt;img class="alignleft size-medium wp-image-13971" title="jjin" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/jjin-300x224.jpg" alt="" width="270" height="202" /&gt;&lt;/a&gt;मेरा शरीर मेरा है|&lt;/p&gt; &lt;p&gt;जैसे चाहूँ, जिसको सौंपूँ!&lt;/p&gt; &lt;p&gt;हो कौन तुम-&lt;/p&gt; &lt;p&gt;मुझ पर लगाम लगाने वाले?&lt;/p&gt; &lt;p&gt;जब तुम नहीं हो मेरे&lt;/p&gt; &lt;p&gt;मुझसे अपनी होने की-&lt;/p&gt; &lt;p&gt;आशा करते क्यों हो?&lt;/p&gt; &lt;p&gt;पहले तुम तो होकर दिखाओ&lt;/p&gt; &lt;p&gt;समर्पित और वफादार,&lt;/p&gt; &lt;p&gt;मैं भी पतिव्रता, समर्पित&lt;/p&gt; &lt;p&gt;और प्राणप्रिय-&lt;/p&gt; &lt;p&gt;बनकर दिखाऊंगी|&lt;/p&gt; &lt;p&gt;अन्यथा-&lt;/p&gt; &lt;p&gt;मुझसे अपनी होने की-&lt;/p&gt; &lt;p&gt;आशा करते क्यों हो?&lt;/p&gt; &lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt; &lt;p&gt;तुम्हारी 'निरंकुश' कामातुरता-&lt;/p&gt; &lt;p&gt;ही तो मुझे चंचल बनाती है|&lt;/p&gt; &lt;p&gt;मेरे काम को जगाती है, और&lt;/p&gt; &lt;p&gt;मुझे भी बराबरी का अहसास&lt;/p&gt; &lt;p&gt;दिलाने को तड़पाती है|&lt;/p&gt; &lt;p&gt;यदि समझ नहीं सकते-&lt;/p&gt; &lt;p&gt;मेरी तड़त का मतलब!&lt;/p&gt; &lt;p&gt;मुझसे अपनी होने की-&lt;/p&gt; &lt;p&gt;आशा करते क्यों हो?&lt;/p&gt; &lt;div class="feedflare"&gt; &lt;a href="http://feeds.feedburner.com/~ff/janokti/pfzK?a=jaqbDO7ixwM:l9c_kl7XitE:yIl2AUoC8zA"&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~ff/janokti/pfzK?d=yIl2AUoC8zA" border="0"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt; &lt;/div&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/janokti/pfzK/~4/jaqbDO7ixwM?utm_source=feedburner&amp;utm_medium=email" height="1" width="1"/&gt;&lt;/div&gt; &lt;/td&gt; &lt;/tr&gt; &lt;tr&gt; &lt;td style="margin-bottom:0;line-height:1.4em;"&gt; &lt;p style="margin:1em 0 3px 0;"&gt; &lt;a name="2" style="font-family:Arial, Helvetica, sans-serif;font-size:18px;" href="http://feedproxy.google.com/~r/janokti/pfzK/~3/HcPUPCYDvaw/?utm_source=feedburner&amp;utm_medium=email"&gt;गोधरा फैसला : बैनर्जी का झूठ उजागर&lt;/a&gt; &lt;/p&gt; &lt;p style="font-size:13px;color:#555;margin:9px 0 3px 0;font-family:Georgia,Helvetica,Arial,Sans-Serif;line-height:140%;font-size:13px;"&gt; &lt;span&gt;Posted:&lt;/span&gt; 01 Mar 2011 01:54 AM PST&lt;/p&gt; &lt;div style="margin:0;font-family:Georgia,Helvetica,Arial,Sans-Serif;line-height:140%;font-size:13px;color:#000000;"&gt;&lt;p style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size: 13.3333px;"&gt;अनिल बिहारी श्रीवास्तव&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;&lt;a rel="attachment wp-att-13967" href="http://www.janokti.com/sansad-political-news-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%a6-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%97/national-news-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%af/%e0%a4%97%e0%a5%8b%e0%a4%a7%e0%a4%b0%e0%a4%be-%e0%a4%ab%e0%a5%88%e0%a4%b8%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%ac%e0%a5%88%e0%a4%a8%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%9c%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%9d%e0%a5%82/attachment/godhra-kand-2/"&gt;&lt;img class="alignright size-full wp-image-13967" title="godhra-kand" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/godhra-kand1.jpg" alt="" width="466" height="262" /&gt;&lt;/a&gt;गोधरा कांड पर विशेष अदालत के फैसले ने उन तमाम दावों और लोगों के इस विश्वास की पुष्टि की है कि २७ फरवरी २००२ को साबरमती एक्सप्रेस के स्लीपर कोच एस-६ में साजिश के तहत बाहर से आग लगाई गई थी। विशेष अदालत ने कल गोधरा कांड मामले में अपना फैसला सुनाते हुए दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया। उस दिल दहला देने वाले हमले में सांप्रदायिक उन्मादियों के हाथों ५८ कारसेवक जिंदा जला दिये गये थे। अदालत ने तथ्यों, गवाहों के बयान और सबूतों के आधार पर ३१ लोगों को दोषी पाया है। ६३ अन्य आरोपी बरी कर दिये गये। सजा का ऐलान २५ फरवरी को किया जाएगा। गोधरा कांड मामले में विशेष अदालत का फैसला उन पाखण्डी सेकुलरिस्टों के मुंह पर करारा तमाचा है जिन्होंने गोधरा जैसी घटना तक में वोट बैंक की राजनीति करने में शर्म महसूस नहीं की। तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव द्वारा अनावश्यक और विशुद्ध रूप से भ्रम फैलाने के मकसद से नियुक्त यूसी बैनर्जी कमेटी के निष्कर्ष अदालत के फैसले से झूठे और गलत साबित हुए हैं। बैनर्जी कमेटी ने कहा था कि गोधरा में कारसेवकों के स्लीपर कोच में आग दुर्घटनावश अंदर से ही लगी थी। कारसेवकों की मौत दम घुटने से हुई तथा इस साजिश में कोई बाहरी व्यक्ति शामिल नहीं था जबकि गोधरा कांड पर नानावटी कमीशन कह चुका था कि ट्रेन के डिब्बे में आग बाहर बाहरी से लोगों द्वारा जानबूझकर लगाई गई थी। नानावटी कमीशन ने मौतों का कारण आग से जल जाना बताया था। नानावटी कमीशन की रिपोर्ट और विशेष अदालत के फैसले ने यू.जी. बैनर्जी के समक्ष नैतिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता को लेकर सवाल खड़ा कर दिया है। इस तथ्य की जांच होनी चाहिए कि बैनर्जी कमीशन ने किस दबाव, अनुरोध, किसकी प्रेरणा और किस प्रलोभन के चलते सत्य पर पर्दा डालकर न्याय को गुमराह करने का पाप किया? इस बात की जांच होनी चाहिए कि गोधरा कांड के सच पर पर्दा डालने की कोशिश करके तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने कौन सा लाभ लेने की कोशिश की थी। हैरानी होती है कि लोग गुजरात के दंगों को लेकर आज तक मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को घेरने की कोशिश करते आ रहे हैं लेकिन कितने लोगों ने गोधरा में जिंदा जला दिये गये ५८ रेल यात्रियों के परिजनों की खबर ली। गुजरात के दंगों को गोधरा कांड की प्रतिक्रिया माना जाता है । न तो गुजरात के दंगाइयों का बचाव किया जाना चाहिए और ना ही गोधरा में निहत्थे रेल यात्रियों को घेर कर जला डालने वाली उन्मादियों की भीड़ के बचाव में किसी का किसी भी तरह से आगे आना शोभा देता है। दोनों ही स्थितियां बर्बर प्रवृत्तियों के पुन: सिर उठाने का प्रमाण रही हैं। कानून पसंद सभ्य समाज में ऐसी हरकतों को नजरंदाज नहीं किया जा सकता। आश्चर्य होता है कि कतिपय गैर-सरकार संगठन (एनजीओ) मीडिया, का एक वर्ग, कुछेक बुद्धिजीवी और राजनीति की धूर्त सेकुलरिस्ट लॉबी ने गुजरात दंगों की बात करते समय हमेशा ही गोधरा कांड की चर्चा से कन्नी काट ली। गुजरात दंगों को अगर आप प्रशासनिक मशीनरों की असफलता और कानून के शासन का पंगु हो जाना मानते हैं तब गोधरा कांड को क्या कहेंगे? कारसेवकों को ंिजदा जला रहे उन्मादी तत्वों में कानून का खौफ तो था नहीं, उन्हें भरोसा रहा होगा कि ऐसे जघन्य कृत्य के बाद उनका बाल बांका नहीं होने दिया जाएगा। ऐसे हत्यारों को सजा उनके रोंगटे खड़े कर देने वाली सुनाई जाना चाहिए।&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt; &lt;div class="feedflare"&gt; &lt;a href="http://feeds.feedburner.com/~ff/janokti/pfzK?a=HcPUPCYDvaw:UwUGQSmMYg8:yIl2AUoC8zA"&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~ff/janokti/pfzK?d=yIl2AUoC8zA" border="0"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt; &lt;/div&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/janokti/pfzK/~4/HcPUPCYDvaw?utm_source=feedburner&amp;utm_medium=email" height="1" width="1"/&gt;&lt;/div&gt; &lt;/td&gt; &lt;/tr&gt; &lt;tr&gt; &lt;td style="margin-bottom:0;line-height:1.4em;"&gt; &lt;p style="margin:1em 0 3px 0;"&gt; &lt;a name="3" style="font-family:Arial, Helvetica, sans-serif;font-size:18px;" href="http://feedproxy.google.com/~r/janokti/pfzK/~3/bEBexXNFMVk/?utm_source=feedburner&amp;utm_medium=email"&gt;सांख्य दर्शन ईश्वरवादी है या निरीश्वरवादी ?&lt;/a&gt; &lt;/p&gt; &lt;p style="font-size:13px;color:#555;margin:9px 0 3px 0;font-family:Georgia,Helvetica,Arial,Sans-Serif;line-height:140%;font-size:13px;"&gt; &lt;span&gt;Posted:&lt;/span&gt; 01 Mar 2011 01:14 AM PST&lt;/p&gt; &lt;div style="margin:0;font-family:Georgia,Helvetica,Arial,Sans-Serif;line-height:140%;font-size:13px;color:#000000;"&gt;&lt;p style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt;: कु० संगीता सिंह&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="font-size: 13.3333px;"&gt;&lt;a rel="attachment wp-att-13962" href="http://www.janokti.com/religion-%e0%a4%a7%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ae-spritualism-%e0%a4%85%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%ae/philosophy-%e0%a4%9c%e0%a5%80%e0%a4%b5%e0%a4%a8-%e0%a4%a6%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b6%e0%a4%a8/%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%96%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%a6%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b6%e0%a4%a8-%e0%a4%88%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%b9/attachment/300px-sankhya-darshan/"&gt;&lt;img class="alignleft size-full wp-image-13962" title="300px-Sankhya-Darshan" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/300px-Sankhya-Darshan.jpg" alt="" width="300" height="318" /&gt;&lt;/a&gt;कपिल-सांख्य के सम्बन्ध में यह प्रवाद प्रचलित है कि यह निरीश्वरवादी दर्शन है और इस दर्शन की संछिप्त मीमांसा ही इस आलेख का उद्देश्य है | भारतीय दर्शन में इस प्रवाद का आरम्भ बौद्ध काल से हुआ है , ऐसे प्रमाण उपलब्ध होते हैं | वस्तुस्थिति यह है कि कपिल सांख्य के विषय में यह प्रवाद सर्वथा निराधार है | सांख्य में दो प्रकार के तत्वों का विवेचन है – एक पुरुष दूसरा प्रकृति | पुरुष नामक चेतन तत्व को दो रूपों में प्रस्तुत किया गया है : १ इश्वर अथवा ब्रह्म २ जीवात्मा | इश्वर व्यक्ति रूप से एक है | वह जगत का अधिष्ठाता व नियंता है और जीवात्मा परिछिन्न ,अल्पज्ञ और संख्या की दृष्टि से अनंत है |&lt;/span&gt;&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;संख्य में जो इश्वर की असिद्धि का वर्णन उपलब्ध होता है , वह जगत के उपादानभुत इश्वर की असिद्धि का वर्णन है | सांख्य जद जगत के उपादान रूप में सत्वरजस्त्मोमय त्रिगुणात्मक जड़ प्रकृति को स्वीकार करता है | और प्रमाणपूर्वक उसका प्रतिपादन करता है , इसीलिए उसने चेतन तत्व को जगत का उपादान नहीं माना है | फलस्वरूप उपादान रूप इश्वर की असिद्धि का उपपादन हुआ है , प्रकृति के नियंता के रूप में वह इश्वर अथवा ब्रह्म को स्वीकार करता है | क्योंकि जिस सांख्य का विकास सेश्वर उपनिषदों से हुआ है , उसे निरीश्वर कैसे सिद्ध किया जा सकता है ? कठ ,स्वेताश्वर ,आदि उपनिषदों से विकसित होने वाला सांख्य दर्शन मूल में ईश्वरवादी था | ना केवल काठ , श्वेताश्वर उपनिषदों अपितु भगवत ,विष्णु आदि पुराणों में वर्णित सांख्य भी सेश्वर है | यद्यपि 'कुर्म पुराण ' में " यं न पश्यन्ति योगिन्द्रा: सांख्य अपि महेश्वरम , अनादी निधनं ब्रह्म तमेव शरणम व्रज '" इत्यादि श्लोक में सांख्य को निरीश्वर ही कहा गया है तथा पराशर उपपुराण के कुछ श्लोकों के आधार पर भी सांख्य को अन्य शास्त्रों के साथ कुछ अंशों में श्रुति विरोधी और सेश्वर ब्रह्म मीमांसा शास्त्र को सर्वांश में श्रुतिसम्मत  कहने से सांख्य के अनीश्वरवाद का आभास मिल जाता है तथापि कुर्म आदि पुराणों तथा पराशर आदि उप पुराण का समय बहुत बाद का होने के कारण ये कथन बौद्ध दर्शन से प्रभावित सांख्य के विषय में किये गए प्रतीत होते हैं |&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;सहस्त्रों शताब्दियों के पहले शनैः शनैः विकृत होकर वैदिक मर्यादाओं तथा अन्य कर्म- कलापों में असह्य भ्रष्टाचार फ़ैल गया था | वैदिक कर्मकांड आडम्बर मात्र रह गए थे | बौद्ध विचारों को दर्शन का रूप देने वाले विद्वानों ने अपने लिए उस आधार को उचित नहीं समझा | विचार और प्रतिष्ठा की दृष्टि से सांख्य दर्शन का स्थान विद्वत –समाज में सदैव मूर्धन्य रहा है | बौद्ध विद्वानों का ध्यान उस ओर जाना स्वाभाविक ही था | उन्होंने विचारों की दृष्टि से सांख्य के अंतर्गत वार्षगण्य&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;के सिद्धांतों को अपने बहुत समीप देखा | उन्होंने इसी को अपने दर्शन का प्रथम आधार बता जगत-सर्ग की प्रक्रिया में इश्वर के अस्तित्व को अनावश्यक बताकर निकाल दिया | वार्षगण्य के एततसम्बन्धी सिद्धांतों का सांख्य नाम पर प्रचार हुआ | किन्तु सांख्य के साथ कपिल का नाम यथावत जुदा रहा |परिणाम यह हुआ कि कपिल सांख्य निरीश्वरवादी मान लिया गया | निरिश्वरवादियों की जो घटा अनेक शताब्दियों तक छाई रही वह केवल बौद्ध –पुरोवात का परिणाम थी |&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;अतएव यह सर्वथा अशुद्ध धारणा है कि कपिल सांख्य इश्वर को नहीं मानता है | उपर्युक्त वस्तुस्थिति से यह स्पष्ट होता है कि सांख्य परम्परा में सर्वप्रथम आचार्य वार्षगण्य ने प्रकृति की प्रवृत्ति में चेतन-निरपेक्षता की कल्पना का प्रसव किया है | प्रवृत्ति की दृष्टि से वे प्रकृति को सर्वथा स्वतंत्र मानते हैं | उनका एक संदर्भ निम्न प्रकार से है :-&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;"प्रधान प्रव्रितिर्प्रत्याया पुरुषेना परीगृहमाणा दिसर्गे वर्तते " अर्थात आदि सर्ग में प्रधान की प्रवृत्ति अप्रत्याय – चेतननिरपेक्ष होती है |&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;जगत की रचना में वार्षगण्य परमात्मा के अस्तित्व को स्वीकार नहीं करता है |&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;यद्यपि उपनिषदों में ऐसे वर्णन प्राप्त होते हैं जिससे प्रतीत होता है कि चेतन इश्वर जगत का उपादान कारण है | उपनिषदों के ये संदर्भ परमेश्वर को कारण बताते हैं उसमें परमेश्वर की उपादंता की गंध नहीं है | इश्वर को जगत का आधार कहने का यह अभिप्राय नहीं है कि परमात्मा को जगत का उपादान कारण मान लिया जाए | परमात्मा विश्व का आधार है क्योंकि वही इसके सर्ग और प्रलय का नियंता है |&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;मध्ययुगीन विद्वानों ने कपिल सांख्य को निरीश्वर और पतंजल योग को सेश्वर कहकर वर्णन किया है | सांख्य को निरीश्वरवादी जिस आधार पर बता गया है वह पृकृति को जगत के निर्माण में स्वतंत्र और सर्वदा चेतन निरपेक्ष मानने के कारण है | पतंजल योग में प्रकृति को जगत का कारण उसी रूप में माना गया है जिस रूप में सांख्य में है | योग में जो इश्वर का वर्णन है वह प्रकृति के नियामक और प्रेरक रूप में नहीं है | जगत निर्माण में जब योग दर्शन इश्वर के उपयोग का कोई उल्लेख नहीं करता और जगत के प्रति प्रक्रति की स्थिति को वह सांख्य के समान स्वीकार करता है | तब केवल जपादि के उपयोग के लिए इश्वर का उल्लेख कर देने से वह सेश्वर और सांख्य निरीश्वर कैसे ?&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;प्राचीन संख्या ग्रंथों में कई ऐसे संकेत प्राप्त होते हैं जो इश्वर के अस्तित्व को सिद्ध करने में सहायक है | प्राचीन व्याख्याकार माथर ने स्पष्ट लिखा है – कोई वस्तु अधिष्ठाता बिना संभव नहीं है |&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;षष्ठी तंत्र में भी कहा गया है – पुरुष से अधिष्ठित होकर प्रधान प्रवृत होता है |&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;युक्ति दीपकों में कहा गया है – यदि प्रधान में प्रवृत्ति बिना किसी कारण के आकस्मिक मान ली जाए तो उन –उन प्रयोजनों को सिद्ध करने के लिए वस्तुओं के विशेष आकार –परिकार और उनकी रचना तथा अवयव सन्निवेश आदि की जो व्यवस्था देखी जाती है वह नहीं रहेगी |&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;ध्यान देने योग्य है कि तत्व समास सूत्र , सांख्य प्रवचन सूत्र तथा सांख्यकारिका में ऐसा कोई वाक्य नहीं उपलब्ध होता है जिसमें इश्वर का अस्तित्व अस्वीकार किया गया है | वरण देखने से यह जरुर स्पष्ट होता है कि सांख्य प्रवचन सूत्र में इश्वर के अस्तित्व के विषय में प्रमाण है | हालाँकि , व्याख्याकारों ने इन सूत्रों की व्याख्या अपने अनुसार करके अर्थ का अनर्थ किया है | हमारे मत में इसका तात्पर्य यही है – प्रकृति जिस आत्मा के अधीन होकर सृष्टि सृजन कार्य मंअ प्रवृत्त होती है वह आत्मा सर्वज्ञ और सर्वकर्ता इश्वर के अतिरिक्त अन्य कोई नहीं है |&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;यदि सांख्य सूत्र को प्रमाण स्वीकार जाए तो प्रथम अध्याय के १५०-१५४ तक सूत्रों में उपरोक्त सिद्धांत को स्वीकार किया गया है |&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;इसमें संदेह नहीं है कि कपिल संख्य में जीव मुक्ति के लिए इश्वर की आवश्यकता स्पष्ट रूप से स्वीकार की गयी है | पतंजल योग दर्शन में भी अनेक जगहों पर ऐसी आवश्यकता पर बल दिया गया है | समाधिपाद के २३-२६ तक के सूत्र तथा ३२ वां सूत्र से स्पष्ट होता है कि जीव की मुक्ति के लिए पतंजल योग दर्शन में इश्वर का अस्तित्व और उसकी आवश्यकता स्वीकार की गयी है |&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;अतः निष्कर्षतः यह कहा जा सकता है कि सांख्य निरीश्वरवाद का उपदेश नहीं करता है , प्रत्यक्ष इश्वर के अस्तित्व का ही प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष भाव से प्रतिपादन करता है |&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;&lt;strong&gt; (यह आलेख बीएचयू की एक द्विभाषी पत्रिका &amp;#8220;प्रज्ञा &amp;#8221; के एक दुर्लभ संस्करण से साभार प्रकाशित किया गया है | अत्यंत जीर्ण अवस्था में होने के कारण लेखिका के नाम के अतिरिक्त अन्य कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है )&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt; &lt;div class="feedflare"&gt; &lt;a href="http://feeds.feedburner.com/~ff/janokti/pfzK?a=bEBexXNFMVk:uiXp7ITwrSs:yIl2AUoC8zA"&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~ff/janokti/pfzK?d=yIl2AUoC8zA" border="0"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt; &lt;/div&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/janokti/pfzK/~4/bEBexXNFMVk?utm_source=feedburner&amp;utm_medium=email" height="1" width="1"/&gt;&lt;/div&gt; &lt;/td&gt; &lt;/tr&gt; &lt;/table&gt; &lt;table style="border-top:1px solid #999;padding-top:4px;margin-top:1.5em;width:100%" id="footer"&gt; &lt;tr&gt; &lt;td style="text-align:left;font-family:Helvetica,Arial,Sans-Serif;font-size:11px;margin:0 6px 1.2em 0;color:#333;"&gt;You are subscribed to email updates from &lt;a href="http://www.janokti.com"&gt;JANOKTI : जनोक्ति :  राज-समाज और जन की आवाज&lt;/a&gt; &lt;br /&gt;To stop receiving these emails, you may &lt;a href="http://feedburner.google.com/fb/a/mailunsubscribe?k=dYtSEolrkS-K8ShJPEJPwgGa3hs"&gt;unsubscribe now&lt;/a&gt;.&lt;/td&gt; &lt;td style="font-family:Helvetica,Arial,Sans-Serif;font-size:11px;margin:0 6px 1.2em 0;color:#333;text-align:right;vertical-align:top"&gt;Email delivery powered by Google&lt;/td&gt; &lt;/tr&gt; &lt;tr&gt; &lt;td colspan="2" style="text-align:left;font-family:Helvetica,Arial,Sans-Serif;font-size:11px;margin:0 6px 1.2em 0;color:#333;"&gt;Google Inc., 20 West Kinzie, Chicago IL USA 60610&lt;/td&gt; &lt;/tr&gt; &lt;/table&gt; &lt;/div&gt; &lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6956958984171538532-3124312625640574833?l=hindisahity.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://hindisahity.blogspot.com/feeds/3124312625640574833/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://hindisahity.blogspot.com/2011/03/janokti.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6956958984171538532/posts/default/3124312625640574833'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6956958984171538532/posts/default/3124312625640574833'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://hindisahity.blogspot.com/2011/03/janokti.html' title='JANOKTI : जनोक्ति'/><author><name>नरेन्द्र निर्मल</name><uri>http://www.blogger.com/profile/16479213514036313208</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_qw0JRiWRDZU/SXyW6w_AHBI/AAAAAAAAAH0/QBx-PMdEfB4/S220/narendra+pic.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-6956958984171538532.post-7539101931712533877</id><published>2011-02-28T19:40:00.001-08:00</published><updated>2011-02-28T19:40:30.601-08:00</updated><title type='text'>JANOKTI : जनोक्ति</title><content type='html'>&lt;style type="text/css"&gt;                          h1 a:hover {background-color:#888;color:#fff ! important;}                          div#emailbody table#itemcontentlist tr td div ul {                                         list-style-type:square;                                         padding-left:1em;                         }                                  div#emailbody table#itemcontentlist tr td div blockquote {                                 padding-left:6px;                                 border-left: 6px solid #dadada;                                 margin-left:1em;                         }                                  div#emailbody table#itemcontentlist tr td div li {                                 margin-bottom:1em;                                 margin-left:1em;                         }                           table#itemcontentlist tr td a:link, table#itemcontentlist tr td a:visited, table#itemcontentlist tr td a:active, ul#summarylist li a {                                 color:#000099; 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&lt;/a&gt; &lt;/h1&gt; &lt;/td&gt; &lt;td width="1%" /&gt; &lt;/tr&gt; &lt;/table&gt; &lt;hr style="border:1px solid #ccc;padding:0;margin:0" /&gt; &lt;table id="itemcontentlist"&gt; &lt;tr xmlns=""&gt; &lt;td style="margin-bottom:0;line-height:1.4em;"&gt; &lt;p style="margin:1em 0 3px 0;"&gt; &lt;a name="1" style="font-family:Arial, Helvetica, sans-serif;font-size:18px;" href="http://feedproxy.google.com/~r/janokti/pfzK/~3/BPuK5fKP6tQ/?utm_source=feedburner&amp;utm_medium=email"&gt;ब्लोगगिरी पांचवां स्तम्भ लेकिन भाईगिरी और उठाईगिरी से तंग हे यह स्तम्भ&lt;/a&gt; &lt;/p&gt; &lt;p style="font-size:13px;color:#555;margin:9px 0 3px 0;font-family:Georgia,Helvetica,Arial,Sans-Serif;line-height:140%;font-size:13px;"&gt; &lt;span&gt;Posted:&lt;/span&gt; 28 Feb 2011 09:19 AM PST&lt;/p&gt; &lt;div style="margin:0;font-family:Georgia,Helvetica,Arial,Sans-Serif;line-height:140%;font-size:13px;color:#000000;"&gt;&lt;p&gt;&lt;a rel="attachment wp-att-13953" href="http://www.janokti.com/blog-hindiblog%e0%a4%ac%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a5%89%e0%a4%97-%e0%a4%b9%e0%a4%b2%e0%a4%9a%e0%a4%b2/blog-%e0%a4%ac%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a5%89%e0%a4%97%e0%a4%9c%e0%a4%97%e0%a4%a4/%e0%a4%ac%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%97%e0%a4%97%e0%a4%bf%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%9a%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%ad/attachment/blogboard/"&gt;&lt;img class="alignleft size-medium wp-image-13953" title="blogboard" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/blogboard-300x195.jpg" alt="" width="300" height="195" /&gt;&lt;/a&gt;देश में ही नही विश्व में इन दिनों ब्लोगिंग की दुनिया मिडिया के रूप में पांचवां स्तम्भ बन गयी हे , इस ब्लोगिंग को हमारे देश भारत में एक नई पहचान मिली हे और आज इसीलियें ब्लोगिंग की दुनिया में रंगा रंग भार हे प्यार हे अपनापन हे लेकिन यह समाज हे यहाँ कुछ बुरे भी लोग खुदा ने बनाये हें जो इस मिठास भरी दुनिया को जहर भरी बनाने के प्रयासों में  जुटे हें लेकिन हम सभी अगर कोशिश करेंगे तो रूठे हुए हमारे भाई नाराज़ गुस्से में अलग हुए हमारे अपने फिर से एक साथ जुड़ जायेंगे और इस पांचवें स्तम्भ के जरिये हम देश को गिरने से बचा कर फिर से एकजुट कर विश्व स्तर पर खड़ा करने में कामयाब हो सकेंगे ।&lt;/p&gt; &lt;p&gt;दोस्तों यह मेरी एक परिकल्पना सपना नहीं हे एक कोशिश हे जो इंशा अल्लाह इश्वर की क्रपा से आप लोगों की महनत से जल्द अज जल्द पूरी होकर रहेगी । ब्लोगिंग की दुनिया का इन दिनों मिडिया में भी बोलबाला हो गया हे यहाँ रचनात्मक लेखन, खबरें,कहानी,कविता,लेख और एक से एक बहतरीन रचनात्मक लेखन से यह दुनिया मालामाल हो गयी हे इस ब्लोगिंग को सभी ब्लोगर भाइयों ने सम्मान देते हुए ताकतवर बनाया हे ख़ुशी की बात यह हे के हर वर्ग हर समाज हर आयु वर्ग के लोग इस ब्लोगिंग की दुनिया से जुड़ गये हें और पांचवें स्तम्भ को चारों स्तम्भ से पहला स्तम्भ बनाने में जुटे हें , यहाँ भाही चारा सद्भावना एक दुसरे की मदद का माहोल हे प्यार दो प्यार दो प्यार लो का नारा आम हे बहने और भाई मिलकर इस दुनिया को सजा संवार रहे हें , हालात यह हे के एक परिवार जब बचा होता हे तो फिर वोह अपना कमरा फिर किचन कर के दो परिवारों में बंट जाता हे कभी प्यार तो कभी तकरार का माहोल एक बढ़े परिवार में होता हे और यह सब इस दुनिया में होने लगा हे ब्लोगिंग को संवारने और जन जन तक पहुँचने के लियें आसान करने के लियें कई रचनात्मक लेखन वाले भाइयों ने ग्रुप हाँ ग्रुप यानि खेमे बना लिए हें लेकिन ख़ुशी की बात यह हे के सभी ग्रुप एक ही सोच रचनात्मक सोच राष्ट्रीयता की सोच भाईचारे और सद्भावना की सोच लिए चल रहे हें सभी ब्लोगर भाई बहने और ब्लोगिंग गुट देश में फेल रही अराजकता से दुखी हे , भ्रस्ताचार को देख कर इसे केसे दूर किया जाए इस पर चिन्तन कर रहे हें राजनीती के स्तर में गिरावट को लेकर सभी परेशान हे हेरान हें इसलियें दोस्तों ब्लगो गुट चाहे अलग अलग हों लेकिन भारत बचाओं का नारा सार्थक करने की सोच सभी ब्लोगरों की एक हे और यह ब्लोगिंग की इस दुनिया के लियें गोरव की बात हे ।&lt;/p&gt; &lt;p&gt;दोस्तों कहावत हे जहां अच्छाई होती हे वहां बुराई भी होती हे जहां राम होते हें वहां रावण भी होता हे जहां कृष्ण होते हें वहां कंस भी होता हे जहां हसन हुसेन होते हें वहां यज़ीद भी होता हे जहां पांडव होते हें वहां कोर्व भी होते हें इतिहास गवाह हे जब जब भी बुराई ने अच्छाई पर हमला किया हे बुराई ने मुंह की खाई हे और ब्लोगिंग की दुनिया में भी कुछ हे जो कंस,यज़ीद,रावण,कोरव के वंशज हे और वोह इस दुनिया में जहर घोलने की कोशिशों में जुट गये हें पहले तो हम और आप यह समझते थे हाथी निकलता तो कुत्ते भोंकते हें इसलियें चुप हो जाया करते थे लेकिन कहते हें एक मछली तालाब को गंदा कर देती हे लेकिन यहाँ इस ब्लोगिंग की दुनिया को बदनाम करने के लियें इसमें कडवाहट घोलने के लियें कुछ लोग हें जो एक मिशन बना कर काम पर जुटे हें दोस्तों उनसे घबराने की जरूरत नहीं यह सही हे कुछ बुरों का भी ग्रुप हे लेकिन मेरा उन सभी से आग्रह हे के ऐसे सभी भटके हुए भाई खुद को सम्भाले अपना गुस्सा त्यागे बेठ कर बात करें किसी का लेकन अगर पसंद नहीं तो उसे रचनात्मक सुझाव दें बेठ के बात करें लेकिन एक दुसरे को बुरा कहना एक दुसरे को गाली बकना नफरत और घ्रणा फेलाना इस ब्लोगिंग के लियें अच्छा नहीं हे वायरस आते हे लेकिन ज्यादा दिन ज़िंदा नहीं रहते इसलियें दोस्तों सब मिलजुल कर चलो बढा दिल रखो किसी से कोई गलती होती हे तो रचनात्मक सुझावों के साथ उसको सूधारने का मोका दो यूँ ब्लॉग गिरी को भाईगिरी ,गुंडागिरी और दादागिरी उठाई गिरी में मत बदलो प्लीज़ &amp;#8230;&amp;#8230;.. दोस्तों में एक बात और याद दिलाऊं ब्लोगिंग की दुनिया कानून के जानकार इतने सक्षम हे के वोह छद्म नामों से ब्लोगिंग करने और संदेश भेजने वालों को साइबर कानून के प्रावधानों के तहत साइबर तकनीक जो हर ब्लॉग और संदेश हर आई डी को एक अंक देती हे और उससे क्तिना ही छुप कर कोई गंदगी फेलाए वोह पकड़ में आ जाता हे और ऐसे आदमी के खिलाफ गेर जमानती अपराध की कार्यवाही होती हे लेकिन खुदा करें किसी भी ब्लोगर को सूधारने के लियें इतना बढ़ा कदम कभी किसी को उठा ने की जरूरत न पढ़े तो दोस्तों,बहनों ,भाइयों और बुजुर्गों आओ हम सब मिलकर इस ब्लोगिंग की दुनिया को बुलंदियों पर पहुंचाए कुछ ऐसा लिखें कुछ ऐसा करें के देश के दुश्मन बने लोगों से इस देश को बचाएं । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान&lt;/p&gt; &lt;div class="feedflare"&gt; &lt;a href="http://feeds.feedburner.com/~ff/janokti/pfzK?a=BPuK5fKP6tQ:R8V_Kmj5VSo:yIl2AUoC8zA"&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~ff/janokti/pfzK?d=yIl2AUoC8zA" border="0"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt; &lt;/div&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/janokti/pfzK/~4/BPuK5fKP6tQ?utm_source=feedburner&amp;utm_medium=email" height="1" width="1"/&gt;&lt;/div&gt; &lt;/td&gt; &lt;/tr&gt; &lt;tr&gt; &lt;td style="margin-bottom:0;line-height:1.4em;"&gt; &lt;p style="margin:1em 0 3px 0;"&gt; &lt;a name="2" style="font-family:Arial, Helvetica, sans-serif;font-size:18px;" href="http://feedproxy.google.com/~r/janokti/pfzK/~3/atUmDksBqMM/?utm_source=feedburner&amp;utm_medium=email"&gt;याचना नहीं अब रण होगा&lt;/a&gt; &lt;/p&gt; &lt;p style="font-size:13px;color:#555;margin:9px 0 3px 0;font-family:Georgia,Helvetica,Arial,Sans-Serif;line-height:140%;font-size:13px;"&gt; &lt;span&gt;Posted:&lt;/span&gt; 28 Feb 2011 05:25 AM PST&lt;/p&gt; &lt;div style="margin:0;font-family:Georgia,Helvetica,Arial,Sans-Serif;line-height:140%;font-size:13px;color:#000000;"&gt;&lt;div style="text-align: justify;" dir="ltr"&gt; &lt;div&gt;&lt;span style="font-size: 13.3333px;"&gt;&lt;a rel="attachment wp-att-13949" href="http://www.janokti.com/sansad-political-news-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%a6-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%97/%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%9a%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%a8%e0%a4%b9%e0%a5%80%e0%a4%82-%e0%a4%85%e0%a4%ac-%e0%a4%b0%e0%a4%a3-%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%97%e0%a4%be/attachment/corruption-in-india-3/"&gt;&lt;img class="alignleft size-medium wp-image-13949" title="corruption-in-india" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/corruption-in-india2-300x253.jpg" alt="" width="300" height="253" /&gt;&lt;/a&gt;मित्रों,भ्रष्टाचार   के खिलाफ हमारी लडाई  अब निर्णायक मोड़ पर आ गयी है.३० जनवरी को रामलीला   मैदान से जो शंखनाद  किया गया था आज उसने उसी ऐतिहासिक मैदान पर विराट रूप   ग्रहण कर लिया  है.बाबा रामदेव व अन्ना हजारे के नेतृत्व में लाखों   भारतवासियों ने इस  ऐतिहासिक मैदान से भ्रष्टाचारियों के विरुद्ध अहिंसक   जनयुद्ध छेड़ने का  ऐलान कर दिया है.&lt;/span&gt;&lt;/div&gt; &lt;div&gt;मित्रों,रामायण  में एक प्रसंग है कि राम  सागर से मार्ग  प्रदान करने की विनती करते  हैं.लगातार तीन दिनों के  अनुनय-विनय के बाद जब  धीरोदात्त राम को कोई  परिणाम निकलता नहीं दिखता तब  वे ब्रह्मास्त्र का  संधान करते हैं और तब  समुद्र त्राहि-त्राहि करता हुआ  राम के श्रीचरणों में आ  गिरता है.&lt;/div&gt; &lt;div&gt;हमने  भी पिछले ६४ सालों में बहुत  अनुनय-विनय किया.विश्वास किया नेताओं के   भाषणों पर कि भ्रष्टाचार को समूल  नष्ट किया जाएगा.लेकिन आश्वासन आश्वासन   बने रहे,घोषणाएं घोषणाएं बनी  रहीं.हम ठगाते रहे और नेता-अफसर मालामाल होते   रहे.एक विदेशी बैंकों में धन  जमा करता रहा तो दूसरा देसी बैंकों के  लौकरों  में सोने की ईटें.अब याचना  करते-करते हमारे हाथ थक गए हैं और  वोटिंग मशीन  का बटन दबाते-दबाते  ऊंगलियाँ ऐंठने लगी हैं.&lt;/div&gt; &lt;div&gt;मित्रों,अब  हम व्यवस्थापक नहीं  बदलेंगे.हमें नहीं चाहिए एक के बाद एक  भ्रष्टाचार के  आगे मजबूर हो  जानेवाले या इस महाभोज में शामिल हो जानेवाले   प्रधानमंत्री.एक राजा और  दो-चार कलमाड़ी को कुछ दिनों के लिए जेल भेज देने   से भ्रष्टाचार नहीं  मिटनेवाला,क्योंकि हमारा कानून और तंत्र सत्ता का   मुखापेक्षी है.हमें  भ्रष्टाचार के खिलाफ ऐसे कानून बनाने होंगे व ऐसा  तंत्र  (सिस्टम) स्थापित  करना होगा जिसमें भ्रष्टाचारियों के खिलाफ  स्वचालित  तरीके से कार्रवाई  हो.जनता को धोखा देने के ख्याल से केंद्र  सरकार ने भी एक  लोकपाल बिल बनाया  है.इसके अंतर्गत एक बार फिर से सतर्कता  आयोग की तरह ही  लोकपाल को भी  सिर्फ सिफारिशी अधिकार दिया गया है.अगर यही  करना है तो फिर  सी.वी.सी. से  अलग किसी लोकपाल नामक संस्था बनाने की जरुरत  ही क्या है?साथ  ही सांसदों और  मंत्रियों पर मुकदमा चलने के लिए भी इसमें  लोकसभा अध्यक्ष और   प्रधानमंत्री से अनुमति लेने का प्रावधान किया गया  है.लेकिन जब गुनाहगार   खुद प्रधानमंत्री या लोकसभा अध्यक्ष हो तब?तब यह  सरकार प्रायोजित लोकपाल   कुछ भी नहीं कर पाएगा सिवाय मुंह ताकते रहने के.&lt;/div&gt; &lt;div&gt;इसलिए  देश की कुछ  जानी-मानी  देशभक्त  हस्तियों ने अलग से जन लोकपाल विधेयक  तैयार किया है  जिसमें व्यवस्था की  गयी हैं कि ९ सदस्यीय लोकपाल संस्था के  सदस्य जनता  द्वारा सीधे चुने जाएँ  और सीधे तौर पर जनता के प्रति ही  जवाबदेह भी हों.देश  जनता का है,संविधान  और संसद जनता का है और जनता के  लिए है.इसलिए इसमें कोई  अनहोनी नहीं है यदि  जनता ही सीधे लोकपालों का  चुनाव करे.इस लोकपाल को  दंडात्मक अधिकार  होगा.वह भ्रष्टाचारियों पर  मुकदमा चलाएगा.उनकी संपत्ति  जब्त करेगा और सजा  भी दिलवाएगा.उसके दायरे  में सभी लोग होंगे,पूरा भारत  होगा;भंगी से लेकर  राष्ट्रपति तक हर कोई  होगा.&lt;/div&gt; &lt;div&gt;लेकिन हमारी सरकार इस बिल को  स्वीकार करने  को तैयार नहीं है.वह देश को  लाचार लोकपाल देकर काम निकाल  लेना चाहती  है.लेकिन जनता को अब किसी भी तरह  का झुनझुना नहीं चाहिए.जनता  अब किसी भी  तरह के और किसी भी तरह से भुलावे  में नहीं आनेवाली.उसे तो जो  चाहिए सो  चाहिए ही और चाहिए तो बस जन लोकपाल.&lt;/div&gt; &lt;div&gt;आज  ऐतिहासिक रामलीला मैदान में  जनता-जनार्दन ने अपने विराट रूप का  प्रदर्शन  किया है,५ अप्रैल से युद्ध  शुरू होगा और इस महाभारत में जनता  अर्जुन के  सारथी श्रीकृष्ण बनेंगे प्रखर  गांधीवादी अन्ना हजारे.आगे-आगे  अन्ना  होंगे,उनके पीछे होंगे बाबा  रामदेव,किरण बेदी,स्वामी  अग्निवेश,अरविन्द  केजरीवाल आदि और उनके पीछे होगा  पूरा  भारत;राम,मोहम्मद,ईसा और गोविन्द के  सभी अनुयायी.इस भ्रष्ट सरकार  में शामिल  लोगों ने अगर आज की रैली का  दूरदर्शन पर दूरदर्शन किया होगा तो  वे अवश्य  भारत के आकाश में हो रही  सितारों की गुफ्तगू और उनके इशारों को  समझ गए  होंगे.&lt;/div&gt; &lt;p&gt;देश के  नीति-निर्माता समझ गए होंगे कि देश की जनता क्या चाहती है.अब यह  उन  पर  निर्भर है कि वे सहूलियत से जन लोकपाल की जनाकांक्षा को स्वीकार कर  लेते   हैं या ढीठ धृतराष्ट्र व दुर्योधन की तरह रणभूमि को आमंत्रण देते  हैं.अगर   इस बार रण सजाया गया तो सरकार की हार पूर्वनिश्चित है क्योंकि  विराट जनता   के आगे न तो कोई तोप काम करती है और न ही  बदूकें.मिस्र,ट्यूनीशिया और   लीबिया के हालात इस बात के प्रत्यक्ष प्रमाण  हैं.स्वतंत्रता का यह दूसरा   संग्राम बड़ा भीषण होगा और दूरगामी प्रभावों  वाला होगा.याचना का समय अब  बीत  चुका है.रामरुपी जनता ने सत्याग्रह  ब्रह्मास्त्र का संधान कर लिया   है.याचना नहीं अब रण होगा,संघर्ष बड़ा भीषण  होगा.जय चंद्रशेखर आजाद,जब   भारत.&lt;/p&gt; &lt;/div&gt; &lt;div class="feedflare"&gt; &lt;a href="http://feeds.feedburner.com/~ff/janokti/pfzK?a=atUmDksBqMM:3uZM_zO8x2I:yIl2AUoC8zA"&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~ff/janokti/pfzK?d=yIl2AUoC8zA" border="0"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt; &lt;/div&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/janokti/pfzK/~4/atUmDksBqMM?utm_source=feedburner&amp;utm_medium=email" height="1" width="1"/&gt;&lt;/div&gt; &lt;/td&gt; &lt;/tr&gt; &lt;/table&gt; &lt;table style="border-top:1px solid #999;padding-top:4px;margin-top:1.5em;width:100%" id="footer"&gt; &lt;tr&gt; &lt;td style="text-align:left;font-family:Helvetica,Arial,Sans-Serif;font-size:11px;margin:0 6px 1.2em 0;color:#333;"&gt;You are subscribed to email updates from &lt;a href="http://www.janokti.com"&gt;JANOKTI : जनोक्ति :  राज-समाज और जन की आवाज&lt;/a&gt; &lt;br /&gt;To stop receiving these emails, you may &lt;a href="http://feedburner.google.com/fb/a/mailunsubscribe?k=dYtSEolrkS-K8ShJPEJPwgGa3hs"&gt;unsubscribe now&lt;/a&gt;.&lt;/td&gt; &lt;td style="font-family:Helvetica,Arial,Sans-Serif;font-size:11px;margin:0 6px 1.2em 0;color:#333;text-align:right;vertical-align:top"&gt;Email delivery powered by Google&lt;/td&gt; &lt;/tr&gt; &lt;tr&gt; &lt;td colspan="2" style="text-align:left;font-family:Helvetica,Arial,Sans-Serif;font-size:11px;margin:0 6px 1.2em 0;color:#333;"&gt;Google Inc., 20 West Kinzie, Chicago IL USA 60610&lt;/td&gt; &lt;/tr&gt; &lt;/table&gt; &lt;/div&gt; &lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6956958984171538532-7539101931712533877?l=hindisahity.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://hindisahity.blogspot.com/feeds/7539101931712533877/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://hindisahity.blogspot.com/2011/02/janokti_28.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6956958984171538532/posts/default/7539101931712533877'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6956958984171538532/posts/default/7539101931712533877'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://hindisahity.blogspot.com/2011/02/janokti_28.html' title='JANOKTI : जनोक्ति'/><author><name>नरेन्द्र निर्मल</name><uri>http://www.blogger.com/profile/16479213514036313208</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_qw0JRiWRDZU/SXyW6w_AHBI/AAAAAAAAAH0/QBx-PMdEfB4/S220/narendra+pic.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-6956958984171538532.post-5752816444235189413</id><published>2011-02-27T19:22:00.001-08:00</published><updated>2011-02-27T19:22:44.259-08:00</updated><title type='text'>JANOKTI : जनोक्ति</title><content type='html'>&lt;style type="text/css"&gt;                          h1 a:hover {background-color:#888;color:#fff ! important;}                          div#emailbody table#itemcontentlist tr td div ul {                                         list-style-type:square;                                         padding-left:1em;                         }                                  div#emailbody table#itemcontentlist tr td div blockquote {                                 padding-left:6px;                                 border-left: 6px solid #dadada;                                 margin-left:1em;                         }                                  div#emailbody table#itemcontentlist tr td div li {                                 margin-bottom:1em;                                 margin-left:1em;                         }                           table#itemcontentlist tr td a:link, table#itemcontentlist tr td a:visited, table#itemcontentlist tr td a:active, ul#summarylist li a {                                 color:#000099; 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&lt;span&gt;Posted:&lt;/span&gt; 27 Feb 2011 08:20 AM PST&lt;/p&gt; &lt;div style="margin:0;font-family:Georgia,Helvetica,Arial,Sans-Serif;line-height:140%;font-size:13px;color:#000000;"&gt;&lt;p style="text-align: justify;"&gt;&lt;a rel="attachment wp-att-13927" href="http://www.janokti.com/sansad-political-news-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%a6-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%97/national-news-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%af/%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%9c%e0%a4%a8%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a4%e0%a4%b0%e0%a4%b9-%e0%a4%b8%e0%a5%8b%e0%a4%9a/attachment/babaji/"&gt;&lt;img class="alignright size-full wp-image-13927" title="babaji" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/babaji.jpg" alt="" width="400" height="300" /&gt;&lt;/a&gt;बाबा रामदेव ने कालेधन के सच को बाहर लाने के लिए कुछ प्रमुख राजनेताओं एवं मंत्रियों का नारको टेस्ट कराने का सुझाव दिया है। इस सुझाव को भाजपा ने हाथोंहाथ लपकते हुए प्रधानमन्त्री एवं मुख्यमंत्रियों को भी नारको टेस्ट के दायरे में रखे जाने की वकालत की है। भाजपा का यह सुझाव सस्ती राजनीति से प्रेरित है और बचकाना भी है। प्रधानमन्त्री जैसे उच्च संवैधानिक पदों पर बैठे हुए व्यक्तियों के लिए नारको टेस्ट की वकालत करना उनका ही नहीं, देश का अपमान करना है। अगर अविश्वास की खाई इतनी गहरी है तो देश के जनता यकीन किस पर करें?यदि देश में लोकतान्त्रिक व्यवस्था जीवित हैं तो उसकी बडी वजह विश्वास और ईमानदारी है। कुछ बेईमान मिलकर पूरे देश को बेईमान नहीं ठहरा सकते। इसलिए केवल राजनेताओं को कोसना उचित नहीं है। बेहतर तो यही है, ऐसा कोई सुझाव देने के पूर्व बाबा रामदेव स्वयं को नारको टेस्ट के लिए पेश करते। यह बात किसी से छिपी नहीं है कि उन्होंने योग को नया बाजार दिया जिसका विराट स्वरूप हरिद्वार में नजर आता है। यह बात भी सभी जानते हैं कि स्वयं को अतिसाधारण एवं जनसेवक बताने वाले बाबा के अधिकांश कार्यक्रम पूंजीपतियों द्वारा प्रायोजित रहते है।&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;योग गुरू बाबा रामदेव महंगाई, भ्रष्टाचार एवं कालेधन के खिलाफ राष्ट्रव्यापी अभियान चला रहे हैं। 7 फरवरी से उन्होंने पदयात्रा अभियान की शुरुआत की है। वे अपने अभियान के तहत 5॰ करोड लोगों का हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन 29 मार्च को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री को सौंपेंगे। बाबा ने ऐसे मुद्दों को हाथ में लिया जो जनता से जुडे हैं। भ्रष्टाचार एवं काले धन के खिलाफ जनजागरण का अभियान यदि सही दिशा में चले तो बेहतर है लेकिन इसके भटकने एवं बीच में ही ध्वस्त होने की आशंका ज्यादा प्रबल है। दरअसल बाबा के इस अभियान के पीछे राजनीतिक उद्देश्य निहित हैं। वैसे भी रामदेव अगले आम चुनाव में अपने संगठन को मैदान में उतारने का इरादा रखते हैं। इसकी उन्होंने विधिवत घोषणा भी की है। इसका अर्थ है वे इन मुद्दों को जनता के बीच ले जाकर कांग्रेस, भाजपा एवं अन्य राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टियों के बीच अपने संगठन के लिए जगह बनाना चाहते हैं। वे इसमें कितने कामयाब होंगे, कहा नहीं जा सकता क्योकि देश की प्रायः सभी पार्टियां वर्षों की तपस्या के बावजूद अपने-अपने राज्यों से बाहर नहीं निकल पाई हैं। बाबा रामदेव ने योग में जरूर चमत्कार दिखाया है लेकिन यह कोई जरूरी नहीं है कि वे राजनीति में भी ऐसा चमत्कार कर पाएंगे। दरअसल वे योग के माध्यम से प्राप्त राष्टीय ख्याति को राजनीति में भुनाना चाहते हैं। फिर भी उनकी कोशिश यकीनन समाज की बेहतरी के लिए है। इस अर्थ में उनके अभियान का स्वागत किया जाना चाहिए। लेकिन उन्होंने कुछ ऐसी बातें कही हैं जिन पर बहस की जा सकती है। मसलन उन्होंने कहा है कि यदि सरकार ने विदेशी बैंकों में जमा अकूत काला धन देश में वापस लाने के साथ-साथ भ्रष्टाचार, महंगाई और खनिजों के अवैध खनन के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं की तो उनके नेतृत्व में लाखों लोग मिस्त्र् की तरह सडकों पर उतरकर आंदोलन करेंगे। इस बयान के संदर्भ में बाबा रामदेव से यह सवाल पूछा जाना चाहिए कि मिस्त्र् की तरह आंदोलन का क्या अर्थ है? क्या भारत में किसी तानाशाह की सरकार है? क्या यहां मिस्त्र् की तरह आपातकाल लागू है? क्या देश में नागरिक अधिकारों को कुचला जा रहा है? क्या भ्रष्टाचार, बेरोजगारी एवं महंगाई की समस्या इतनी भीषण है कि लोग गुस्से में हैं तथा कानून-व्यवस्था हाथ में ले रहे हैं? क्या पूरे देश में अराजकता का माहौल है तथा संसद मूकदर्शक बनी हुई है? अगर ऐसा नहीं है तो मिस्त्र् की जनक्रांति का उदाहरण देने का क्या अर्थ है? मिस्त्र् में नागरिक अधिकारों को कुचला जा रहा है, वहां हुस्नी मुबारक 30 वर्षों से गद्दी पर बैठ हुए हैं, वहां बेरोजगारी, भ्रष्टाचार एवं महंगाई की वजह से लोगों का जीना मुहाल हो गया है, जब पानी सिर के ऊपर से गुजरने बेताब नजर आया तब वहां जनता सडकों पर उतर आई. इससे स्पष्ट है मिस्त्र् में शांतिपूर्ण जनक्रांति के पीछे कारण कुछ और हैं। लेकिन भारत में तो लोकतान्त्रिक शासन व्यवस्था है। आजादी के बाद लोकतंत्र की जडें और भी मजबूत हुई हैं। जिस महंगाई, काले धन एवं भ्रष्टाचार के लिए रामदेव जनक्रांति का सपना देख रहे हैं, वह पूरे विश्व की समस्या है। अमेरिका सहित सभी छोटे-बडे देश इससे जूझ् रहे हैं। यद्यपि विश्व के देशों का हवाला देकर भारत अपनी कमजोरी को छिपा नहीं सकता पर इस बात पर गौर करने की जरूरत है कि केन्द्र एवं राज्य सरकारें इन समस्याओं पर नियंत्रण पाने के लिए प्रभावी कदम उठा रही हैं अथवा नहीं? केन्द्र सरकार ने 2जी स्पेक्ट्रम, आदर्श हाउसिंग सोसायटी , कामनवेल्थ गेम्स जैसे बडे घोटालों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है। विदेशी बैंकों में जमा काले धन के मामले में भी सरकार ने कदम उठाए हैं तथा महंगाई को कम करने के उपायों पर भी केन्द्र एवं राज्य् सरकारें कदम उठा रही हैं। यह अवश्य है कि इन मुद्दों पर जनता एवं जनप्रतिनिधियों का दबाव बना रहेगा तो सरकार ढिलाई नहीं बरत पाएगी। इसलिए बाबा रामदेव को मिस्त्र् की जनता की तरह सोचने एवं पहल करने की जरूरत नहीं है अलबत्ता सरकार पर नैतिक दबाव बनाने के अन्य उपायों पर अवश्य विचार करना चाहिए।&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt; &lt;div class="feedflare"&gt; &lt;a href="http://feeds.feedburner.com/~ff/janokti/pfzK?a=LFWRFHnY5-M:xQDJpXqFfkA:yIl2AUoC8zA"&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~ff/janokti/pfzK?d=yIl2AUoC8zA" border="0"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt; &lt;/div&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/janokti/pfzK/~4/LFWRFHnY5-M?utm_source=feedburner&amp;utm_medium=email" height="1" width="1"/&gt;&lt;/div&gt; &lt;/td&gt; &lt;/tr&gt; &lt;tr&gt; &lt;td style="margin-bottom:0;line-height:1.4em;"&gt; &lt;p style="margin:1em 0 3px 0;"&gt; &lt;a name="2" style="font-family:Arial, Helvetica, sans-serif;font-size:18px;" href="http://feedproxy.google.com/~r/janokti/pfzK/~3/UG9aVQdorLk/?utm_source=feedburner&amp;utm_medium=email"&gt;सर्वमान्य नेतृत्व का अभाव: एक दृश्टिकोण&lt;/a&gt; &lt;/p&gt; &lt;p style="font-size:13px;color:#555;margin:9px 0 3px 0;font-family:Georgia,Helvetica,Arial,Sans-Serif;line-height:140%;font-size:13px;"&gt; &lt;span&gt;Posted:&lt;/span&gt; 27 Feb 2011 08:00 AM PST&lt;/p&gt; &lt;div style="margin:0;font-family:Georgia,Helvetica,Arial,Sans-Serif;line-height:140%;font-size:13px;color:#000000;"&gt;&lt;p style="text-align: justify;"&gt;&lt;a rel="attachment wp-att-13920" href="http://www.janokti.com/sansad-political-news-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%a6-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%97/%e0%a4%b8%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%a4%e0%a5%83%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b5-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%85%e0%a4%ad%e0%a4%be/attachment/nehru-ghandi2/"&gt;&lt;img class="alignleft size-medium wp-image-13920" title="nehru-ghandi2" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/nehru-ghandi2-300x233.jpg" alt="" width="300" height="233" /&gt;&lt;/a&gt;वर्तमान में भारत का जो राजनैतिक दृश्य है उसे देखकर यह लगता है कि हमारे देश  में एक केन्द्रीय नेतृत्व का अभाव है। एक ऐसा नेता जिसकी राश्ट्रव्यापी छवि  हो और जिसे छ लाख गांवों  में भी वैसी ही पहचान मिली हो जैसी इस देश के गुने चुने महानगरों में। एक ऐसा नेतृत्व जिसकी आवाज आम आवाम के दिलो दिमाग पर असर करे और जिसका प्रभाव आमजन तक हो।&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;एक समय था जब इस देश  में महात्मा गाँधी  , पंडित जवाहर लाल नेहरू, सरदार बल्लभ भाई पटेल, लाल बहादुर शास्त्री , इंदिरा गाँधी , जय प्रकाश  नारायण, राम मनोहर लोहिया व राजीव गाँधी  जैसे एक छत्र नेताओं ने राज किया। ये वे नेता थे जिनकी पहचान राष्ट्रीय स्तर की थी और जिन्हें भारत का आम आदमी अपना नेता मानता था। ये ऐसे नेता थे जो इन देश  की आमजन की नब्ज पहचानते थे और आम आदमी के सुख दुख में भी इन लोगों की सीधी भागीदारी थी। उस समय जब चुनाव होते थे तो लोग पार्टी को वोट देते थे, लोग नेहरू व इंदिरा को वोट देते थे उन्हें इस बात से कम मतलब होता था कि पार्टी ने जिस प्रत्याशी को खड़ा किया है वो कैसा   है।&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;जब राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी  की हत्या हुई तो लोगों को लगा कि अब यह देष कैसे चलेगा और कुछ ऐसा ही लोगों ने तब सोचा जब इंदिरा गाँधी  नहीं रही। कहने का मतलब यह है कि इन लोगों ने अपने आप को इस देश  का पर्यायवाची बना लिया था। इसी तरह जब इस देश  में अनाज की कमी हुई तो लाल बहादुर शास्त्री ने लोगों को सोमवार के दिन उपवास रखने के लिए कहा और इस अपील का ऐसा प्रभाव हुआ कि आज तक हजारों लोग सोमवार का उपवास रखते हैं। पंडित नेहरू की एक आवाज पर लाखों लोग गाँव से शहरों से निकल कर आजादी के आंदोलन में कूद पड़े थे। जय प्रकाश  नारायण की एक अपील सुनकर लोगों ने अपनी नेता इंदिरा  गाँधी का तख्ता पलट दिया था। एक ऐसा व्यक्ति जिसकी बम विस्फोट में मौत होने पर लोगों को ऐसा लगा कि जैसे अपने खुद के घर में किसी की मौत हो गई हो। मुझे याद है कि जब राजीव गाँधी  की हत्या हुई तो इस देश  में हजारों शादियाँ  स्थगित हो गई थी क्योंकि देश  ने अपने प्रिय नेता को खो दिया था। वर्तमान में इस तरह का सर्वमान्य नेतृत्व नजर नहीं आता। ऐसे नेता का हमारे पास अभाव है जिसकी पहचान पूरे भारत में एक जैसी हो या यूं के जिसकी पहचान एक जन नेता की हो।&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;वर्तमान में हमारे पास राष्ट्रीय पार्टीयों के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं लेकिन इन राष्ट्रीय पार्टीयों के पास कोई भी राश्ट्रीय नेता नहीं है। वर्तमान परिदृश्य में इस देश  में एक भी ऐसा नेता नहीं है जो यह दावा कर सके कि उसे कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक और बंगाल से लेकर पंजाब तक पहचाना जाता है और यही कारण है कि राष्ट्रीय  पहचान का अभाव होने के कारण इन बड़ी पार्टीयों को क्षेत्रीय दलों से समझौते करने पड़ते हैं और गठबंधन की मजबूरी पूरे देश को उठानी पड़ती है।&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;नेताओं की राष्ट्रीय छवि पूरे भारत को एकसूत्र में पिरोने का काम करती है और उस नेता से जुड़ा हर कार्यकर्ता व आम आवाम अपने आप को एक परिवार की तरह समझता है पर वर्तमान में ऐसा कोई बड़ा परिवार हमारे सामने नजर नहीं आ रहा है। एक नेता होने से नीति निर्माण व शासन व्यवस्था चलाने में सुविधा रहती है और पार्टी अपनी खुद की विचारधारा पर चलकर देश  के लिए कुछ कर सकती है। परन्तु वर्तमान में किसी भी पार्टी की विचारधारा का प्रभाव देश  पर नहीं पड़ता नजर आता। सर्वमान्य नेता की कमी ने स्थानीय नेताओं को ताकतवर बनाया और स्थानीय नेताओं के ताकतवर होने से देश  में गठबंधन की सरकारें बनने लगी और जैसा की हमारे वर्तमान नेता मानते हैं कि गठबंधन की अपनी खुद की मजबूरियाँ होती है इसलिए सर्वमान्य नेतृत्व का अभाव केन्द्रीय सरकार पर नजर आने लगता है और ऐसी सरकार मजबूर सरकार बन जाती है।&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;यह सही भी है कि अगर किसी भी पार्टी में सर्वमान्य नेता हो तो छुटभैये नेताओं की नहीं चलती और उस कद्दावर नेता के सामने कोई भी टिक नहीं पाता और सर्वमान्य नेता का अभाव होने से हर कोई छोटा नेता भी अपने आप को बड़ा ताकतवर समझने लगता है। इससे पार्टी को तो नुकसान होता ही है साथ ही साथ इसका प्रभाव देश  पर भी पड़ता है। जैसा कि पहले था कि कांग्रेस के पास नेहरू, इंदिरा जैसे सर्वमान्य नेता थे जिनकी पहचान अंतर्राश्ट्रीय नेता के रूप में थी और यही कारण था कि उनके सामने कोई भी विरोध के स्वर पैदा नहीं होते थे और अगर होते भी तो ऐसे विरोध करने वाले नेता खुद हाषिये पर चले जाते थे। कुछ ऐसा ही आलम भारतीय जनता पार्टी में रहा जब अटल बिहारी वाजपेयी जैसा बड़ा नेतृत्व पार्टी को मिला। लोग अटल बिहारी को भाजपा का मुखौटा कहते थे और इसी मुखौटै ने भाजपा की राश्ट्रीय पहचान बनाई थी, इसी एक नेतृत्व के कारण भाजपा ने कईं पार्टीयों को एक मंच पर लाने का काम किया और केन्द्र में सरकार भी बनाई।&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;वर्तमान में भारत की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक पार्टी ग्रेरकांग्रेस व सबसे बड़ी विरोधी पार्टी भाजपा के पास केन्द्रीय नेतृत्व तो है लेकिन दोनों ही पार्टी के नेता उस स्तर के &lt;a rel="attachment wp-att-13922" href="http://www.janokti.com/sansad-political-news-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%a6-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%97/%e0%a4%b8%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%a4%e0%a5%83%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b5-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%85%e0%a4%ad%e0%a4%be/attachment/vajpayee-2/"&gt;&lt;img class="alignright size-medium wp-image-13922" title="vajpayee" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/vajpayee1-201x300.jpg" alt="" width="201" height="300" /&gt;&lt;/a&gt;नहीं है जो स्तर इंदिरा गाँधी  या कुछ हद तक अटल बिहारी वाजपेयी का रहा है। इसी कारण इन दोनों पार्टीयों को देश के लगभग हर राज्य में राज्य स्तरीय पार्टीयों से हाथ मिलाना पड़ रहा है। कारण साफ है कि इन राज्यों में दोनों पार्टीयों के पास ऐसे नेतृत्व का अभाव है जिसकी खुद ही पहचान उस राज्य में हो तो ऐसी स्थिति में राज्य में पहचान रखने वाले नेतृत्व का हाथ थामना पड़ता है। इस प्रकार सत्ता में रहने के लिए इन पार्टीयों के लिए गठबंधन एक मजबूरी बन जाता है। ये राष्ट्रीय  पार्टीयाँ  सत्ता चलाने के लिए फिर इन क्षेत्रीय पार्टीयों के दबाब में रहती है और इसी दबाब को ये लोग गठबंधन का धर्म कहते हैं और इसी दबाब को पूरे देश को मजबूरी के रूप में सहन करना पड़ता है।&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;अगर इन पार्टीयों के पास करिष्माई व पहचान वाला केन्द्रीय नेतृत्व हो तो इन पार्टीयों को इन क्षेत्रीय दलों की जरूरत न पड़े और नही ऐसे किसी दबाब में देश  को सहन करना पड़े।&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;अगर हम चिंतन करें तो यह बात सामने आती है कि इस देष में केन्द्रीय नेतृत्व का अभाव इसलिए हुआ क्योंकि राश्ट्रीय स्तर की सोच व पूरे भारत की समझ रखने वाला कोई भी व्यक्ति वर्तमान में राजनीति में नजर नहीं आता है। अगर हम बात नेहरू, पटेल, गाँधी  व इंदिरा की करते हैं तो यह बात एकदम साफ है कि इन लोगों को पूरे भारत की समझ थी और ये लोग भारत की संस्कृति व भारत के लोगों से पूरी तरह परीचित थे। इन लोगों ने घूम घूम कर पूरे देष के दौरे किए थे। नेहरू इलाहबाद के कुंभ में काफी समय बिताया करते थे और पटेल ने पूरे देश  को एकसूत्र में पिरोकर अपना कद बहुत बड़ा कर लिया था। इंदिरा गाँधी को नेहरू की पुत्री होने का लाभ मिला तो गाँधी  जैसे कालजयी लोगों का भी सामिप्य मिला। कुछ ऐसी ही परिस्थितियाँ रामनोहर लोहिया व जय प्रकाष नारायण की थी कि ये लोग भारत भूमि से दिल से जुड़े थे और इन लोगों में विरोध करने की भी सकारात्मक ताकत थी। अटल बिहारी वाजपेयी की भी बात करें तो वाजयपेयी में भी भारतीय व राश्ट्रीय सोच थी जिसने उन्हें राष्ट्रीय नेता बनाया था। तो यह बात साफ है कि राश्ट्रीय नेता वो ही बन सकता है जिसके पास राश्ट्रीय सोच व नजरिया हो। वर्तमान में ऐसी सोच व नजरिये के व्यक्तित्व का अभाव है इसलिए राश्ट्रीय नेताओं का भी अभाव है।&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;जरूरत है ऐसे व्यक्तित्व की जो पूरे भारत को एक धागे में पिरो सके और पूरे देश को एक पहचान दिला सके। जब एक ऐसा नहीं होगा हमारे सामने महॅंगाई, क्षेत्रियता, अलगाववाद व आतंकवाद जैसी समस्याएँ आती रहेगी। घर परिवार में जब बुजुर्ग व्यक्ति की मौत हो जाती है तो सभी भाई अपने अपने अलग अलग मकान बनाकर रहने लगते हैं और कुछ ऐसा ही किसी देष में तब होता है जब एकछत्र नेतृत्व नहीं होता तो ऐसी स्थिति में सभी क्षेत्रीय लोग अपनी ढफली अपनी राग बजाने लगते हैं। इसलिए जिस तरह घर का बुजुर्ग घर की पहचान होता है और पूरा परिवार उसी बुजुर्ग का परिवार कहकर जाना जाता है ठीक उसी तरह देष का एक सर्वमान्य नेता पूरे देश  ही पहचान होत है और उस ऐसे नेतृत्व में ही देश  प्रगति कर सकता है पहचान बना सकता है।&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt; &lt;div class="feedflare"&gt; &lt;a href="http://feeds.feedburner.com/~ff/janokti/pfzK?a=UG9aVQdorLk:K9xnFLggqAs:yIl2AUoC8zA"&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~ff/janokti/pfzK?d=yIl2AUoC8zA" border="0"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt; &lt;/div&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/janokti/pfzK/~4/UG9aVQdorLk?utm_source=feedburner&amp;utm_medium=email" height="1" width="1"/&gt;&lt;/div&gt; &lt;/td&gt; &lt;/tr&gt; &lt;tr&gt; &lt;td style="margin-bottom:0;line-height:1.4em;"&gt; &lt;p style="margin:1em 0 3px 0;"&gt; &lt;a name="3" style="font-family:Arial, Helvetica, sans-serif;font-size:18px;" href="http://feedproxy.google.com/~r/janokti/pfzK/~3/4tk9w8SkFyg/?utm_source=feedburner&amp;utm_medium=email"&gt;क्या खोया क्या पाया जग में&lt;/a&gt; &lt;/p&gt; &lt;p style="font-size:13px;color:#555;margin:9px 0 3px 0;font-family:Georgia,Helvetica,Arial,Sans-Serif;line-height:140%;font-size:13px;"&gt; &lt;span&gt;Posted:&lt;/span&gt; 27 Feb 2011 07:18 AM PST&lt;/p&gt; &lt;div style="margin:0;font-family:Georgia,Helvetica,Arial,Sans-Serif;line-height:140%;font-size:13px;color:#000000;"&gt;&lt;div&gt; &lt;div&gt;&lt;a rel="attachment wp-att-13912" href="http://www.janokti.com/art-literature-%e0%a4%95%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af/poem-hindi-%e0%a4%95%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a4%be/%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%96%e0%a5%8b%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%9c%e0%a4%97-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82/attachment/khoya-3/"&gt;&lt;img class="alignleft size-medium wp-image-13912" title="khoya" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/khoya2-300x222.jpg" alt="" width="300" height="222" /&gt;&lt;/a&gt;जिंदगी के शोर, दुनियादारी की आपाधापी, रिश्ते नातों की गलियों और सोच के रास्ते  के नुक्कड़ पर इन्सान जब अकेला हो जाता है तो कवि कागज़ पर अपना घर बना लेता है. और जब सुनाने सुनाने वाले एक हो जाते हैं- इस संवेदनशील इन्सान के शब्द कुछ इस तरह बोल उठते हैं :-&amp;nbsp;&lt;/p&gt; &lt;p&gt;क्या खोया क्या पाया जग में,&lt;/p&gt; &lt;p&gt;मिलते  और बिछड़ते डग में,&lt;/p&gt; &lt;p&gt;मुझे किसी से नहीं शिकायत,&lt;/p&gt; &lt;p&gt;यद्यपि छला गया पग पग में,&lt;/p&gt; &lt;p&gt;एक  दृष्टि बीती पर  डाली,&lt;/p&gt; &lt;p&gt;यादों की पोटली टटोले,&lt;/p&gt; &lt;p&gt;अपने ही मन से कुछ बोले&amp;#8230;२ times .&lt;/p&gt; &lt;p&gt;पृथ्वी लाखों वर्ष पुरानी,&lt;/p&gt; &lt;p&gt;जीवन एक रात कहानी,&lt;/p&gt; &lt;p&gt;पर तन की  अपनी सीमायें,&lt;/p&gt; &lt;p&gt;यद्यपि सौ शर्तों दीवानी,&lt;/p&gt; &lt;p&gt;इतना  काफी है अंतिम,&lt;/p&gt; &lt;p&gt;दस्तक पर खुद ही दरवाज़ा खोले,&lt;/p&gt; &lt;p&gt;अपने ही मन से कुछ बोले&amp;#8230;२ times&lt;/p&gt; &lt;p&gt;जन्म मरण का अविरत फेरा,&lt;/p&gt; &lt;p&gt;जीवन बंजारों का डेरा,&lt;/p&gt; &lt;p&gt;आज यहाँ कल कहाँ पहुँच है,&lt;/p&gt; &lt;p&gt;कौन जानता  अधिक सवेरा,&lt;/p&gt; &lt;p&gt;अँधियारा आकाश में सिमित,&lt;/p&gt; &lt;p&gt;प्राणों के पंखो को तौले,&lt;/p&gt; &lt;p&gt;अपने ही मन से कुछ बोले&amp;#8230;&lt;/p&gt; &lt;p&gt;अपने ही मन से कुछ बोले&amp;#8230;२ times&lt;/p&gt; &lt;p&gt;द्वारा&amp;#8211;श्री अटल बिहारी बाजपेयी&lt;/p&gt; &lt;/div&gt; &lt;/div&gt; &lt;div class="feedflare"&gt; &lt;a href="http://feeds.feedburner.com/~ff/janokti/pfzK?a=4tk9w8SkFyg:a9a4OCDN0LU:yIl2AUoC8zA"&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~ff/janokti/pfzK?d=yIl2AUoC8zA" border="0"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt; &lt;/div&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/janokti/pfzK/~4/4tk9w8SkFyg?utm_source=feedburner&amp;utm_medium=email" height="1" width="1"/&gt;&lt;/div&gt; &lt;/td&gt; &lt;/tr&gt; &lt;tr&gt; &lt;td style="margin-bottom:0;line-height:1.4em;"&gt; &lt;p style="margin:1em 0 3px 0;"&gt; &lt;a name="4" style="font-family:Arial, Helvetica, sans-serif;font-size:18px;" href="http://feedproxy.google.com/~r/janokti/pfzK/~3/pJpVKrhxYls/?utm_source=feedburner&amp;utm_medium=email"&gt;साहस-शौर्य-संकल्प के प्रतीक हैं -आजाद&lt;/a&gt; &lt;/p&gt; &lt;p style="font-size:13px;color:#555;margin:9px 0 3px 0;font-family:Georgia,Helvetica,Arial,Sans-Serif;line-height:140%;font-size:13px;"&gt; &lt;span&gt;Posted:&lt;/span&gt; 26 Feb 2011 08:47 PM PST&lt;/p&gt; &lt;div style="margin:0;font-family:Georgia,Helvetica,Arial,Sans-Serif;line-height:140%;font-size:13px;color:#000000;"&gt;&lt;p style="text-align: center;"&gt;&lt;span style="color: #000080;"&gt;&lt;strong&gt;दुश्मन की गोलियों का हम सामना करेंगे,&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: center;"&gt;&lt;span style="color: #000080;"&gt;&lt;strong&gt;आजाद ही रहें हैं,आजाद ही रहेंगे &lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;।&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;चन्द्रशेखर आजाद नाम नहीं,प्रतीक बन गया है-साहस,शौर्य,संकल्प,देशभक्ति,मिलन सारिता एवं सूझ-बूझ &lt;a rel="attachment wp-att-13896" href="http://www.janokti.com/bharatnama-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%be/history-of-india-%e0%a4%87%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b8/%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a4%b8-%e0%a4%b6%e0%a5%8c%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%95%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%aa-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a4/attachment/chandrashekhar-aazad/"&gt;&lt;img class="alignright size-full wp-image-13896" title="chandrashekhar aazad" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/chandrashekhar-aazad.jpg" alt="" width="341" height="376" /&gt;&lt;/a&gt;का।ऩि़र्धनता में पले-बढ़े चन्द्रशेखर तिवारी के पिता पं0सीताराम तिवारी मूलतः ग्राम बदरका,जनपद उन्नाव,उ0प्र0 के रहने वाले थे।&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;संवत्1956 के देशव्यापी अकाल के समय जीविकोपार्जन के लिए पं0सीताराम तिवारी बदरका छोड़ कर भावश,तत्कालीन अली राजपुर जिला-वर्तमान में झाबुआ जिला में सरकारी बाग की रखवाली का काम करने लगे थे।आजाद के पिता अत्यन्त निर्धन,सदाचारी,ईमानदार किन्तु क्रोधी स्वभाव के थे।माता जगरानी देवी जी निरक्षर थी।परिवार कट्टर सनातनी ब्राह्मण।बालक चन्द्रशेखर तेजस्वी,कर्मशील और नटखट।अपने नटखटपने के कारण वे अपने पिता के कोप-भाजन का शिकार बनते रहते थे।चन्द्रशेखर के&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;चार भाई मौत के शिकार हो चुके थे,माता अपने इकलौते पुत्र पर स्नेह-ममत्व लुटाती रहती।सनातनी ब्राह्मण का तेजस्वी बालक संस्कृत पढ़ने काशी आ पहुॅंचा।सन्1921,चन्द्रशेखर तिवारी की उम्र चैदह वर्ष मात्र।सर्वत्र असहयोग आन्दोलन का वातावरण।भारत-भर में विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार और होली मनाई जा रही थी।परिवार की स्थितिजन्य परिस्थितियों ने बालक चन्द्रशेखर को कष्ट सहने वाला,कठोर परिश्रमी,विकट परिस्थितियों में संघर्ष करने वाला बना दिया था।इसी दौरान ब्रिटेन के युवराज डयूक आॅफ विण्डसर का भारत आगमन हो गया।भारत को एक क्रान्तिपुत्र मिलने की,उस क्रान्ति के हीरे की जौहरियों के नजर में आने की घड़ी आ गई।&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;कंाग्रेस ने ब्रिटेन के युवराज की भारत यात्रा का विरोध किया।सर्वत्र हड़ताल रखी गई।तनाव पैदा हो गया।दंगे भी हुए।सरकार ने सख्ती बरती।महात्मा गाॅंधी को छः महीने का कारावास मिला।चन्द्रशेखर ने बनारस के सरकारी विद्यालय पर धरना दिया।पकड़े गये।इसी अपराध में मुकदमा चला।बालक चन्द्रशेखर ने मुकदमें के दौरान जो उत्तर दिये,वो आज तक ह्दय को झकझोरने के लिए पर्याप्त है।प्रत्येक उत्तर में देश भक्ति व निर्भीकता।&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;नाम-आजाद&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;पिता-स्वतन्त्र&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;निवास-जेलखाना&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;यैसे उत्तरों को सुनकर न्यायाधीश खारेघाट क्रोधित हो उठा,पन्द्रह कोड़ों की सजा सुनाई।प्रत्येक कोड़े के लगने पर वन्देमातरम् व महात्मा गाॅ।धी की जय बोलते-बोलते वीर बालक मुर्छित होकर धरती माॅं की गोद में विश्राम करने लगा।&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;सारे बनारस में मानों हवा के माध्यम से यह घटना फैल गई।शहर कांग्रेस समिति ने उनके अभिनन्दन समारोह का आयोजन किया।श्री मन्मथनथ गुप्त ने लिखा है कि काशी के इतिहास में सभा एक अविस्मरणीय घटना है।सभा में चन्द्रशेखर का अभिनन्दन उनकी वीरता के अनुरूप ही हुआ। आततायी ब्रितानिया हुकुमत से टक्कर लेने वाले किशोर के दर्शन करने व आर्शीवाद देने मानों समूचा काशी आ उमड़ा।छोटे से बालक को देखने पहुॅंची अपार भीड़।मंच पर मेज लगाकर साहसी बालक को खड़ा किया गया।महात्मा गाॅंधी की जय से सारा वातावरण गुंजायमान हो उठा।चन्द्रशेखर ने अपना वक्तव्य दिया।सारा शरीर फूलों से लाद दिया गया।आॅंखे सिंह की भाॅंति चमक रही थी।सिंह की गर्जना अंग्रेजों के कानों तक पहुॅंच ही चुकी थी।बस वो घड़ी,चन्द्रशेखर तिवारी को श्री प्रकाश जी ने आजाद नाम से अलंकृत किया।&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;बनारस के सुप्रसिद्ध देशभक्त शिव प्रसाद गुप्त ने आजाद को अपने संरक्षण में लिया।काशी विद्यापीठ में दाखिला कराया।पहले ही दिन उनके दर्शन के लिए विद्याार्थियों की भीड़ उमड़ पड़ी।आजाद का लक्ष्य शिक्षा तो था नहीं,लिहाजा थोड़े ही दिनों में उन्होंने शिव प्रसाद गुप्त का घर छोड़ दिया।आजाद ने आजादी प्राप्त करने की दिशा में स्वयं को समर्पित कर लिया था।&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;चैरी चैरा काण्ड के कारण असहयोग आन्दोलन स्थगित हो गया और महात्मा गाॅंधी के अहिंसक मार्ग से क्रान्तिकारियों का विश्वास हिलने लगा था।प्रख्यात क्रान्तिकारी शचीन्द्रनाथ सान्याल संयुक्त प्रान्त में संगठन कर रहे थे।श्री सान्याल अण्डमान जेल से छूटकर आये थे।श्री सान्याल की पुस्तक ''बन्दीरक्षक'' अपनी प्रसिद्धी की ओर अग्रसर थी।पुस्तक युवाओं को क्रान्ति के मार्ग पर चलाने के लिए एक बड़ी प्रेरणा श्रोत बन गई।श्री सान्याल ने राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी के नेतृत्व में ''हिन्दुस्तान रिपब्लिक एसोसिएशन'' नामक दल को तैयार किया।प्रणवेश चटर्जी इस दल के सदस्य थे।श्री चटर्जी ने मन्मथनाथ गुप्त को आजाद का मन टटोलने की जिम्मेदारी सौंपी।आजाद तो पैदा ही भारत की आजादी की लड़ाई लड़ने के लिए हुए थे।शीघ्र ही आजाद अंतरंग समिति के सदस्य बन गये।दल का उद्देश्य स्वतंत्रता प्राप्त करने के साथ-साथ शोषण रहित प्रजातन्त्र की स्थापना करना था।अमर शहीद पं0 रामप्रसाद बिस्मिल के नेतृत्व में आजाद ने काकोरी रेल काण्ड में हिस्सा लिया और 1925 में काकोरी षड़यंत्र केस में फरार होकर झा।सी पहुॅंचे।झाॅंसी और ओरछे के बीच सातार नदी के किनारे पर एक कुटिया में हरिशंकर ब्रह्मचारी बन कर रहे।आजाद ने कुशल संगठनकर्ता होने का परिचय देते हुए छिन्न-भिन्न हो चुके सूत्रों को फिर से जोड़ लिया।क्रान्तिकारियों के साथ मिलकर आजाद ने प्रमुख कार्य किये उनमें- लाहौर में लाला लाजपत राय पर लाठी चार्ज करने वाले ए0एस0पी0 साण्डर्स का वध,देहली की धारा सभा में बम विस्फोट तथा वायसराय की गाड़ी के नीचे बम विस्फोट कराना शामिल है।27 फरवरी,1931 को अल्फ्रेड पार्क इलाहाबाद में पुलिस से युद्ध करते हुए,बलिदान देते समय तक चन्द्रषेखर आजाद ने अपने एक-एक शब्द को जीया।उन्होंने साथियों से जो कहा वही किया।जिस वृक्ष के नीचे आजाद ने अपने प्राण त्यागे थे,दूसरे दिन वह फूलों से लदा था।जनता ने वृक्ष पर आजाद का नाम लिखा,पेड़ के नीचे की माटी विद्यार्थी माथे पर लगाकर साथ ले गये।जनता का आदर और उत्साह देखकर ब्रितानिया हुकुमत ने शहीद स्थल के उस वृक्ष को काट डाला।स्वतन्त्रता के पश्चात् बाबा राघव दास ने उसी जगह पुनः वृक्षारोपण किया।वर्तमान में पार्क में चन्द्रशेखर आजाद का जो स्मारक बना है,वह श्रद्धेय पं0 बनारसी दास चतुर्वेदी पूर्व राज्य सभा सदस्य के अथक प्रयासों का परिणाम है।&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;यह स्मारक अशिक्षित,कुसंस्कार ग्रस्त,गरीबी में पड़ी हुई जनता का क्रान्ति के मार्ग पर उत्तरोतर बढ़ते जाने का स्मारक है,अदम्य साहस,व्यवहारिक सूझ-बूझ और साथियों के लिए हार्दिक स्नेह,त्याग और बलिदान के लिए सतत् तत्परता के द्वारा प्राप्त नेतृत्व का स्मारक है,और है साम्राज्यवाद के विरूद्ध आमरण दृढ़ निश्चयी युद्ध और समाजवाद की स्थापना के लिए निर्भयता से बढ़ते जाने का स्मारक।&lt;/p&gt; &lt;div class="feedflare"&gt; &lt;a href="http://feeds.feedburner.com/~ff/janokti/pfzK?a=pJpVKrhxYls:OqFAusEjZCc:yIl2AUoC8zA"&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~ff/janokti/pfzK?d=yIl2AUoC8zA" border="0"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt; &lt;/div&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/janokti/pfzK/~4/pJpVKrhxYls?utm_source=feedburner&amp;utm_medium=email" height="1" width="1"/&gt;&lt;/div&gt; &lt;/td&gt; &lt;/tr&gt; &lt;/table&gt; &lt;table style="border-top:1px solid #999;padding-top:4px;margin-top:1.5em;width:100%" id="footer"&gt; &lt;tr&gt; &lt;td style="text-align:left;font-family:Helvetica,Arial,Sans-Serif;font-size:11px;margin:0 6px 1.2em 0;color:#333;"&gt;You are subscribed to email updates from &lt;a href="http://www.janokti.com"&gt;JANOKTI : जनोक्ति :  राज-समाज और जन की आवाज&lt;/a&gt; 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&lt;p style="text-align: justify;"&gt;इस रेल बजट में भी ममता बनर्जी की दिल्ली के प्रति उदासीनता बरकार है । उन्हे लगता है कि यहां तो मैट्रो है लोफ्लोर बस हैं तो फिर नई ट्रेन चलाने की क्या जरूरत। बजट आते हैं और चले जाते हैं लेकिन दिल्ली को कुछ नहीं मिलता है। इस बार भी कुछ नहीं मिला । हां कुछ लोकल ट्रेनों में डिब्बों की संख्या 12 से घटा कर 8 कर दी गई है। वहीं कलकत्ता और मुंबई पर जम कर मेहरबानी दिखाई गई है । हां पिछले साल ममता की महिलाओं के प्रति कुछ हमदर्दी देखने को मिली थी ।&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;महिलाओं के लिये भीड़ भरे डिब्बे में घुसना भी आसान नहीं होता था । लेकिन अब महिलाओं को खासा तवज्ज़ो दिया जा रहा है । फरीदाबाद, गाज़ियाबाद, पलवल, से लेकर पानीपत- सोनीपत, और रोहतक रिवाड़ी की महिलायें दिल्ली में अपने सपने साकार करने पहुंचने लगी हैं। ममता दीदी ने महिलाओं के कष्ट को समझा , दिल्ली में भी एक नई शुरुआत हुई । मुम्बई के बाद यहां से भी महिला स्पेशल ट्रेने शुरु की गईं। लेकिन शायद दिल्ली की महिलायें को अलग ट्रेन में चलना रास नहीं आया । सुबह शाम चलने वाली ट्रेन सफल नहीं हो पायी है । हालांकि चल रही है अभी भी। महिलायें इन ट्रेनों के इंतजार करने से बेहतर किसी भी ट्रेन को पकड़ कर अपने स्थान पर जल्दी पहुंचना पसंद करती हैं।&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;दूसरी ओर आम आदमी की दिलचस्पी भी दिल्ली की लोकल में घटती दिख रही है । दिल्ली की लोकल में चलने वाले 60 से 70 फीसदी यात्री रेलवे के कर्मचारी ही होते हैं । किराया इतना कम है कि 5 रुपये में दिल्ली के किसी भी कोने में पहुंच सकते हैं, 8 रुपये में गाजियाबाद और पलवल तक घूम सकते हैं । इतना सस्ता किराया शायद ही दुनिया के किसी दूसरे महानगर में हो। फिर भी क्या कारण है कि मुंबई में 50 लाख यात्रियों को रोजाना सफर कराने वाली लोकल ट्रेन दिल्ली में पूरी तरह से फ्लॉप साबित हुई है। यहां दिन में मात्र 3 लाख यात्री ही लोकल रेलवे के सफर की जहमत उठाते हैं।&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;इसके उदासीनता के पीछे कई कारण हैं, एक तो यहां की लोकल ट्रेनों के लिये अलग से ट्रैक नहीं है। ये ट्रेनें भी मेन ट्रैक पर ही चलाई जाती हैं। इसका असर यह होता है कि ज्यादातर लोकल ट्रेनों को  रोक कर दूसरी एक्प्रेस ट्रेनों को पास कराया जाता है। 12.20 की लोकल का 1.20 पर आना बहुत सामान्य बात है। दूसरे बड़े स्टेशनों पर लोकल यात्रियों के लिये अलग टिकट काउंटर नहीं है। दो स्टेशन की यात्रा करने वाले यात्री घंटो लंबी लाइन में क्यों लगेगा।&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;रेलवे स्टेशन प्रायः ऐसी जगहों पर हैं जहां से शहर के अन्य स्थानों पर पहुंचने का साधन नहीं है। इन ट्रेनों में न तो सौचालय है और न ही बैठने के लिये अच्छी सीट। 21 वीं सदी में भी भारतीय यात्री लकड़ी की सख्त बेंच पर बैठने को मजबूर हैं। ऐसे में ये दूरी स्वाभाविक लगती है।&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;दरअसल दिल्ली की लोकल ट्रेन की कभी महत्व दिया ही नहीं गया । 1980 के एशियाड के समय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने दिल्ली में सरकुलर रेलवे यानी कि मुद्रिका लाइन की शुरुआत की थी । लेकिन 30 साल बीतने की बाद  शायद 10 प्रतिशत दिल्ली वासियों को भी इस रेलवे रूट के बारे में जानकारी नहीं है। मालवीय नगर, चाणक्य पुरी,  लोधी कालोनी और लाजपत नगर जैसे इलाकों से गुजरने वाली इस रेलवे लाइन को जानबूझ कर साजिश के तहत गुमनाम बना के रखा गया है ।&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;पहले सीएनजी वाली डीटीसी बसें और फिर लोफ्लोर और अब मैट्रो को लेकर सरकार और प्रशासन मे दिखने वाली बेचैनी इस बेहतरीन रेलवे रूट के लिये कभी नहीं देखी गई । इस सौतेले व्यवहार के पीछे के षड़यंत्र को साफ देखा जा सकता है । इसमें रेल मंत्रालय के साथ दिल्ली प्रदेश सरकार भी शामिल हैं ।&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;शून्य प्रदूषण वाले इस रूट पर खर्च किये गये धन और संसाधनों का समुचित दोहन करने के बजाय मैट्रो औऱ लोफ्लोर बसों के लिये खरबों रुपये के आर्डर दिये जाते रहे  हैं । इनके पीछे की खेल को आसानी से समझा जा सकता है । निज़ामुद्दीन स्टेशन को नई दिल्ली से जोड़ने वाली मुद्रिका रेलवे पर दिन भर में मुश्किल से 10 ट्रेनें चलाई जाती हैं । यहां के स्टेशनों की बदहाली किसी से छिपी नहीं है। राष्ट्रमंडल खेलों के कारण कुछ सुधार जरुर देखने को मिला है । लेकिन अभी भी ज्यादातर स्टेशनों पर नशेड़ियों और झुग्गी झोपड़ी वालों का कब्ज़ा है । झुग्गी झोपड़ियों में रहने वाले लोग पूरे रेलवे स्टेशन को अपने आंगन और शौचालय के रूप में प्रयोग करते हैं । इस रूट पर यात्रा करना अत्यंत असुरक्षित समझा जाता है, खासकर रात की यात्रा तो भयावह होती है । अरावली की खूबसूरत पहाड़ियों के बीच बने इन स्टेशनों पर कहीं कोई सुरक्षाकर्मी नज़र नहीं आता । यहां हर तरफ नशेड़ियों और असमाजिक तत्वों का बोलबाला है। आये दिन होने वाली घटनायें इस रूट को और भी अलोकप्रिय बना रहीं हैं।&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt; &lt;div class="feedflare"&gt; &lt;a href="http://feeds.feedburner.com/~ff/janokti/pfzK?a=Ap17gHJR-Ew:zB9Cnz5TpaM:yIl2AUoC8zA"&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~ff/janokti/pfzK?d=yIl2AUoC8zA" border="0"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt; &lt;/div&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/janokti/pfzK/~4/Ap17gHJR-Ew?utm_source=feedburner&amp;utm_medium=email" height="1" width="1"/&gt;&lt;/div&gt; &lt;/td&gt; &lt;/tr&gt; &lt;tr&gt; &lt;td style="margin-bottom:0;line-height:1.4em;"&gt; &lt;p style="margin:1em 0 3px 0;"&gt; &lt;a name="2" style="font-family:Arial, Helvetica, sans-serif;font-size:18px;" href="http://feedproxy.google.com/~r/janokti/pfzK/~3/JGFU84Dz01M/?utm_source=feedburner&amp;utm_medium=email"&gt;हिंदी चिट्ठाजगत से कुछ पठनीय ब्लॉग&lt;/a&gt; &lt;/p&gt; &lt;p style="font-size:13px;color:#555;margin:9px 0 3px 0;font-family:Georgia,Helvetica,Arial,Sans-Serif;line-height:140%;font-size:13px;"&gt; &lt;span&gt;Posted:&lt;/span&gt; 26 Feb 2011 01:01 AM PST&lt;/p&gt; &lt;div style="margin:0;font-family:Georgia,Helvetica,Arial,Sans-Serif;line-height:140%;font-size:13px;color:#000000;"&gt;&lt;p&gt;1. &lt;a href="http://chitthajagat.in/punh.php?lid=687880&amp;amp;punh=http://ashokakela.blogspot.com/2011/02/blog-post_14.html" target="_blank"&gt;यादें (http://ashokakela.blogspot.com/)&lt;/a&gt;&lt;br /&gt; चिट्ठाकार: यादें&lt;/p&gt; &lt;p&gt;2. &lt;a href="http://chitthajagat.in/punh.php?lid=687896&amp;amp;punh=http://samvadsetu-nyaypalika.blogspot.com/2011/02/blog-post_4043.html" target="_blank"&gt;संवादसेतु &amp;#8211; न्यायपालिका (http://samvadsetu-nyaypalika.blogspot.com/)&lt;/a&gt;&lt;br /&gt; चिट्ठाकार: संवादसेतु &amp;#8211; न्यायपालिका&lt;/p&gt; &lt;p&gt;3. &lt;a href="http://chitthajagat.in/punh.php?lid=687912&amp;amp;punh=http://ankurmehtaanpara.blogspot.com/2011/02/blog-post_6568.html" target="_blank"&gt;ANKUR MEHTA (http://ankurmehtaanpara.blogspot.com/)&lt;/a&gt;&lt;br /&gt; चिट्ठाकार: ANKUR MEHTA&lt;/p&gt; &lt;p&gt;4. &lt;a href="http://chitthajagat.in/punh.php?lid=687915&amp;amp;punh=http://apnikahaniya.blogspot.com/2011/02/blog-post_14.html" target="_blank"&gt;क्षितिज&amp;#8230;&amp;#8230; (http://apnikahaniya.blogspot.com/)&lt;/a&gt;&lt;br /&gt; चिट्ठाकार: rajneesh jain&lt;/p&gt; &lt;p&gt;5. &lt;a href="http://chitthajagat.in/punh.php?lid=687932&amp;amp;punh=http://swayamfornation.blogspot.com/2011/02/blog-post.html" target="_blank"&gt;Desh jage (http://swayamfornation.blogspot.com/)&lt;/a&gt;&lt;br /&gt; चिट्ठाकार: Bhartiya&lt;/p&gt; &lt;p&gt;6. &lt;a href="http://chitthajagat.in/punh.php?lid=687935&amp;amp;punh=http://puneetarticals.blogspot.com/2011/02/blog-post.html" target="_blank"&gt;MY LIFE ARTICALS&amp;#8230;. (http://puneetarticals.blogspot.com/)&lt;/a&gt;&lt;br /&gt; चिट्ठाकार: PUNEET&lt;/p&gt; &lt;p&gt;7. &lt;a href="http://chitthajagat.in/punh.php?lid=687947&amp;amp;punh=http://aniltrivediadvocate.blogspot.com/2011/02/blog-post_6458.html" target="_blank"&gt;Anil Trivedi articles (http://aniltrivediadvocate.blogspot.com/)&lt;/a&gt;&lt;br /&gt; चिट्ठाकार: Anil Trivedi&lt;/p&gt; &lt;p&gt;8. &lt;a href="http://chitthajagat.in/punh.php?lid=687977&amp;amp;punh=http://gandhi4indian.blogspot.com/2011/02/blog-post_14.html" target="_blank"&gt;Rahul Gandhi (http://gandhi4indian.blogspot.com/)&lt;/a&gt;&lt;br /&gt; चिट्ठाकार: Editor&lt;/p&gt; &lt;p&gt;9. &lt;a href="http://chitthajagat.in/punh.php?lid=688002&amp;amp;punh=http://rashtragauravgan.blogspot.com/2009/10/blog-post.html" target="_blank"&gt;राष्ट्र गौरव (http://rashtragauravgan.blogspot.com/)&lt;/a&gt;&lt;br /&gt; चिट्ठाकार: charaiveti&lt;/p&gt; &lt;p&gt;10. &lt;a href="http://chitthajagat.in/punh.php?lid=688003&amp;amp;punh=http://vipsonhunt.blogspot.com/2011/02/blog-post.html" target="_blank"&gt;Vips (http://vipsonhunt.blogspot.com/)&lt;/a&gt;&lt;br /&gt; चिट्ठाकार: Vipin&lt;/p&gt; &lt;p&gt;11. &lt;a href="http://chitthajagat.in/punh.php?lid=688006&amp;amp;punh=http://harikesh786.blogspot.com/2011/01/blog-post_29.html" target="_blank"&gt;Harikesh Kumar Yadav (http://harikesh786.blogspot.com/)&lt;/a&gt;&lt;br /&gt; चिट्ठाकार: Harikesh Kumar Yadav&lt;/p&gt; &lt;p&gt;12. &lt;a href="http://chitthajagat.in/punh.php?lid=688019&amp;amp;punh=http://hanumanbhakt.blogspot.com/2011/02/blog-post_22.html" target="_blank"&gt;Ravi Kaushal (http://hanumanbhakt.blogspot.com/)&lt;/a&gt;&lt;br /&gt; चिट्ठाकार: Ravi Kaushal&lt;/p&gt; &lt;p&gt;13. &lt;a href="http://chitthajagat.in/punh.php?lid=688043&amp;amp;punh=http://sunaharikalamse.blogspot.com/2011/02/blog-post_15.html" target="_blank"&gt;सुनहरी कलम से&amp;#8230; (http://sunaharikalamse.blogspot.com/)&lt;/a&gt;&lt;br /&gt; चिट्ठाकार: जयकृष्ण राय तुषार&lt;/p&gt; &lt;p&gt;14. &lt;a href="http://chitthajagat.in/punh.php?lid=688050&amp;amp;punh=http://neerajvichar.blogspot.com/2011/02/blog-post_14.html" target="_blank"&gt;neerajvichar (http://neerajvichar.blogspot.com/)&lt;/a&gt;&lt;br /&gt; चिट्ठाकार: neeraj&lt;/p&gt; &lt;p&gt;15. &lt;a href="http://chitthajagat.in/punh.php?lid=688055&amp;amp;punh=http://manish-pathak.blogspot.com/2011/02/blog-post_14.html" target="_blank"&gt;Manish Pathak (http://manish-pathak.blogspot.com/)&lt;/a&gt;&lt;br /&gt; चिट्ठाकार: manish&lt;/p&gt; &lt;p&gt;16. &lt;a href="http://chitthajagat.in/punh.php?lid=688070&amp;amp;punh=http://kranti4people.blogspot.com/2011/02/blog-post.html" target="_blank"&gt;Kranti 4 People (http://kranti4people.blogspot.com/)&lt;/a&gt;&lt;br /&gt; चिट्ठाकार: Rajeev Kumar&lt;/p&gt; &lt;div class="feedflare"&gt; &lt;a href="http://feeds.feedburner.com/~ff/janokti/pfzK?a=JGFU84Dz01M:FmaYPH547tw:yIl2AUoC8zA"&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~ff/janokti/pfzK?d=yIl2AUoC8zA" border="0"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt; &lt;/div&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/janokti/pfzK/~4/JGFU84Dz01M?utm_source=feedburner&amp;utm_medium=email" height="1" width="1"/&gt;&lt;/div&gt; &lt;/td&gt; &lt;/tr&gt; &lt;tr&gt; &lt;td style="margin-bottom:0;line-height:1.4em;"&gt; &lt;p style="margin:1em 0 3px 0;"&gt; &lt;a name="3" style="font-family:Arial, Helvetica, sans-serif;font-size:18px;" href="http://feedproxy.google.com/~r/janokti/pfzK/~3/BBVSEOaAzOU/?utm_source=feedburner&amp;utm_medium=email"&gt;कामयाबी&lt;/a&gt; &lt;/p&gt; &lt;p style="font-size:13px;color:#555;margin:9px 0 3px 0;font-family:Georgia,Helvetica,Arial,Sans-Serif;line-height:140%;font-size:13px;"&gt; &lt;span&gt;Posted:&lt;/span&gt; 26 Feb 2011 12:37 AM PST&lt;/p&gt; &lt;div style="margin:0;font-family:Georgia,Helvetica,Arial,Sans-Serif;line-height:140%;font-size:13px;color:#000000;"&gt;&lt;p style="text-align: justify;"&gt;एक तस्वीर बनाने वाले कलाकार ने एक साहिब की अर्ज़ पर उसकी तस्वीर बनानी शुरू कर दी. पर वो साहिब इस क़दर चँचल थे कि एक पल भी सुकून के साथ एक जगह नहीं बैठ पा रहे थे, नतीजे के स्वरुप में चार घँटे के असफ़ल प्रयास के बावजूद कलाकार सिर्फ उस आदमी के चेहरे की जगह एक गोल आकार बना सका, जिसको देखकर चित्रकार के बेटे ने बाप से कहा &amp;#8221; आप जाकर आराम करें मैं इनकी तस्वीर पूरी कर दूँगा&amp;#8221;.&lt;br /&gt; &amp;#8221; जान बची लाखों पाये&amp;#8221;  सोचकर चित्रकार बेटे के भरोसे चले गये, पर जब वापस लौटे तो हैरानी से पूरी की हुई तस्वीर को देखते रह गये. बेटे से पूछा &amp;#8221; क्या जादू चलाया तुमने उनपर जो वो बैठ पाए?&amp;#8221;  बेटे ने एक तस्वीर जो ग्राहक के सामने टँगी हुई थी उसकी ओर इशारा किया. उस अँजाम देने वाली तस्वीर के पास जाकर देखा जो एक औरत की थी. पूछने पर पता चला कि वह तस्वीर ग्राहक की बीबी की थी.&lt;/p&gt; &lt;div class="feedflare"&gt; &lt;a href="http://feeds.feedburner.com/~ff/janokti/pfzK?a=BBVSEOaAzOU:jr-CEtLeUm4:yIl2AUoC8zA"&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~ff/janokti/pfzK?d=yIl2AUoC8zA" border="0"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt; &lt;/div&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/janokti/pfzK/~4/BBVSEOaAzOU?utm_source=feedburner&amp;utm_medium=email" height="1" width="1"/&gt;&lt;/div&gt; &lt;/td&gt; &lt;/tr&gt; &lt;tr&gt; &lt;td style="margin-bottom:0;line-height:1.4em;"&gt; &lt;p style="margin:1em 0 3px 0;"&gt; &lt;a name="4" style="font-family:Arial, Helvetica, sans-serif;font-size:18px;" href="http://feedproxy.google.com/~r/janokti/pfzK/~3/oDPiZ5ODD7c/?utm_source=feedburner&amp;utm_medium=email"&gt;कुटिल कणिक की राह पर दिग्गी राजा&lt;/a&gt; &lt;/p&gt; &lt;p style="font-size:13px;color:#555;margin:9px 0 3px 0;font-family:Georgia,Helvetica,Arial,Sans-Serif;line-height:140%;font-size:13px;"&gt; &lt;span&gt;Posted:&lt;/span&gt; 26 Feb 2011 12:33 AM PST&lt;/p&gt; &lt;div style="margin:0;font-family:Georgia,Helvetica,Arial,Sans-Serif;line-height:140%;font-size:13px;color:#000000;"&gt;&lt;p style="text-align: justify;"&gt;&lt;a rel="attachment wp-att-13876" href="http://www.janokti.com/sansad-political-news-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%a6-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%97/national-news-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%af/%e0%a4%95%e0%a5%81%e0%a4%9f%e0%a4%bf%e0%a4%b2-%e0%a4%95%e0%a4%a3%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b9-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%97/attachment/diggi_dog/"&gt;&lt;img class="alignright size-full wp-image-13876" title="diggi_dog" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/diggi_dog.jpg" alt="" width="400" height="302" /&gt;&lt;/a&gt;महाभारत कालीन हस्तिनापुर में महाराज धृतराष्ट्र का एक सचिव था, जिसका नाम था कणिक। उसकी विशेषता यह थी कि वह कुटिल नीतियों का जानकार था और धृतराष्ट्र को पांचों पांडवों के विनाश के लिए नित नए-नए तरकीब सुझाया करता था। महाराज ने उसे इसीलिए नियुक्त भी कर रखा था। इसके सिवाय उसकी और कोई विशेषता नहीं थी, जो राज-काज के संचालन में धृतराष्ट्र के लिए उपयोगी हो।&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;महाराज ने उसका वेतन और भत्ता भी ज्यादा तय कर रखा था। इसके अलावा उसकी सारी सुविधाएं उसके समकक्ष सभी राज-कर्मचारियों से ज्यादा थी। धृतराष्ट्र ने उसको हर प्रकार से छूट दे रखी थी। यानी उसके केवल सात खून ही नहीं; बल्कि सारे खून माफ थे। वह जो कुछ भी करता, धृतराष्ट्र उसकी खूब तारीफ करते थे।&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;अन्ततः उसको मिली सारी विशेष सुविधाएं व्यर्थ ही साबित हुईं। क्योंकि उसकी एक भी तरकीब पांडवों के विनाश के लिए काम न आ सकी। यह भी कहा जाता है कि कणिक ने ही पाण्डवों को मारने के लिए वारणावत नगर में लाक्षागृह के निर्माण का सुझाव दिया था। जब उसके इस सुझाव का पता दुर्बुद्धि दुर्योधन, कर्ण और दुःशासन; आदि को लगा, तो उन लोगों ने इस सुझाव को जल्द ही अमल में लाने के लिए मामा शकुनि के माध्यम से धृतराष्ट्र को मनाने के प्रयास शुरु कर दिए थे। हालांकि उस धधकते लाक्षागृह से माता कुंती सहित पांचों पाण्डव सकुशल निकलने में सफल हुए।&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;खैर! जो हुआ सो हुआ। अन्ततः पाण्डवों को मारने की सारी तरकीब असफल साबित हुई। इसके बाद क्या हुआ यह सभी जानते ही हैं। महाभारत युद्ध में कौरवों का विनाश हो गया। यानी धर्म व सुव्यवस्था की विजय हुई और अधर्म व कुव्यवस्था का नाश हुआ। अर्थात- दूसरों का अहित चाहने वालों का विनाश हुआ। यही है महाभारत की कथा।&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;वारणावत नगर का लाक्षागृह कांड कुरु कुटुम्ब का वह जीता-जागता षड्यंत्र था जो अनेक क्रूरतम राज-षड्यंत्रों की सारी सीमाएं पार कर चुका था। वह कोई सामान्य घटना नहीं थी। मानवीयता की भी सारी सीमाएं पार कर देने वाली घटना थी। यह सारा षड्यंत्र हस्तिनापुर की सत्ता को दीर्घकाल तक हथियाए रखने के लिए चलाया जा रहा था।&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;हालांकि वर्तमान भारतीय संदर्भ में कणिक की चर्चा करने का मेरा औचित्य केवल कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह की तुलना करना भर ही है। इसके लिए मेरे पास कणिक के सिवाय और कोई उदाहरण नहीं है जो दिग्विजय सिंह पर सटीक बैठे। कणिक और दिग्विजय में कई मामलों में काफी समानता है। उनकी हर गलत बयानी को कांग्रेस सुप्रीमो सोनिया गांधी माफ कर देती हैं। उनको कुछ भी बोलने की पूरी छूट है। वह सबसे ऊपर हैं। कांग्रेस में सोनिया-राहुल को छोड़कर एक वही ऐसी शख्सियत हैं जिन पर पार्टी अनुसाशन का डंडा काम नहीं करता। पार्टी में उनके खिलाफ कोई शख्स बोलने की हिमाकत भी नहीं कर सकता। क्योंकि वह पार्टी सुप्रीमो के काफी खासम खास हैं। अतः उनके खिलाफ बोलकर कोई अपने कमीज की बखिया क्यों उधड़वाए ?&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;इस देश में जितने भी विवादित विषय हैं, उन सभी विषयों पर दिग्विजय अपने 'कणिकवत कुटिल विचार' प्रकट कर चुके हैं। इसके अलावा भी वह नित नए-नए विवादित विषयों की खोज-बीन में लगे रहते हैं। और उन विषयों पर बोल-बोलकर अपनी भद्द पिटवाते रहते हैं।&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;अभी हाल ही में अरुणाचल प्रदेश के अरुणाचल पूर्वी संसदीय सीट से कांग्रेसी सांसद निनोंग एरिंग ने योग गुरु स्वामी रामदेव को ब्लडी इंडियन तक कह डाला था। योग गुरु की गलती मात्र यही थी कि वह राज्य के पासीघाट में आयोजित योग शिविर में जुटे प्रशिक्षणार्थियों को भ्रष्टाचारी कांग्रेस के काले कारनामे का बड़े ही मनोहारी ढंग से वर्णन कर रहे थे। ठीक उसी वक्त सांसद महोदय आ धमके और उन्होंने योग गुरु के साथ जमकर गाली-गलौज की। स्वामी रामदेव के सहायक ने बताया- सांसद ने असंसदीय भाषा का इस्तेमाल करते हुए बाबा से कहा कि वह राज्य में चला रही भ्रष्टाचार विरोधी अपनी मुहिम बंद कर दें, वरना नतीजा अच्छा नहीं होगा। सबसे आश्चर्य की बात यह है कि कांग्रेस आलाकमान ने उस सांसद के खिलाफ कोई कार्रवाई तक करना उचित नहीं समझा।&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;विवादित विषय हो तो भला दिग्विजय सिंह कैसे चुप रहें। अतः उन्होंने इस विवाद की बहती नदी में हाथ धोना शुरु कर दिया। उन्होंने योग गुरु से सवाल किया कि भ्रष्टाचार की बातें करने वाले रामदेव को अपनी सम्पत्ति का हिसाब देना चाहिए। ध्यातव्य है कि स्वामी रामदेव पिछले कई महीनों से भ्रष्टाचार के खिलाफ देश भर में जनजागरण अभियान चला रहे हैं। अपने इसी अभियान के तहत योग गुरु अरुणाचल में थे।&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;दिग्विजय के रवैये से ऐसा लगता है कि उन्होंने हिंदुत्वनिष्ठ संगठनों, साधु-संतों और देशभक्तों को बदनाम करने का ठेका ले रखा है। यहां तक कि वे दिल्ली के बाटला हाउस मुठभेड़ में आतंकियों की गोली से शहीद मोहन चन्द शर्मा जैसे बहादुर सिपाही की शहादत पर भी प्रश्चचिन्ह उठाने से बाज नहीं आए। वह आजमगढ़ जिले के संजरपुर में आतंकी गतिविधियों में संलिप्त लोगों के घर जा कर उन्हें प्रोत्साहित करने से भी नहीं चूके। यही नहीं उन्होंने 26/11 मुम्बई हमलों में शहीद महाराष्ट्र के तत्कालीन एटीएस प्रमुख हेमंत करकरे की शहादत पर भी प्रश्नचिन्ह उठाने की कोशिश की थी। लेकिन स्वर्गीय करकरे की विधवा श्रीमती कविता करकरे ने दिग्विजय की जमकर खिंचाई की थी।&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;वैसे दिग्विजय के संदर्भ में इस बात की भी खूब चर्चा चलती है कि मुस्लिम मतों को बटोरने के लिए सोनिया गांधी ने उनको मुक्त-हस्त कर दिया है। दिग्विजय भी सोनिया के इस सम्मान का बदला अपने क्षत्रिय मर्यादा की कीमत पर चुकाने के लिए आमादा दिखते हैं। यहां तक कि वह अपनी सारी लोकतांत्रिक मान-मर्यादाएं भी भूल चुके हैं। जो मन में आया वही आंख मूदकर बोल देते हैं। मीडिया भी उनके बयान को खूब तरजीह देता है। यदि उनका यही रवैया रहा तो वह दिन दूर नहीं जब जनता उनको एक स्वर से मानसिक दिवालिया घोषित कर देगी।&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt; &lt;div class="feedflare"&gt; &lt;a href="http://feeds.feedburner.com/~ff/janokti/pfzK?a=oDPiZ5ODD7c:tCwUBQ-2t2g:yIl2AUoC8zA"&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~ff/janokti/pfzK?d=yIl2AUoC8zA" border="0"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt; &lt;/div&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/janokti/pfzK/~4/oDPiZ5ODD7c?utm_source=feedburner&amp;utm_medium=email" height="1" width="1"/&gt;&lt;/div&gt; &lt;/td&gt; &lt;/tr&gt; &lt;tr&gt; &lt;td style="margin-bottom:0;line-height:1.4em;"&gt; &lt;p style="margin:1em 0 3px 0;"&gt; &lt;a name="5" style="font-family:Arial, Helvetica, sans-serif;font-size:18px;" href="http://feedproxy.google.com/~r/janokti/pfzK/~3/TAvOIuj3W3g/?utm_source=feedburner&amp;utm_medium=email"&gt;बजट में दिखेगा सियासी रंग&lt;/a&gt; &lt;/p&gt; &lt;p style="font-size:13px;color:#555;margin:9px 0 3px 0;font-family:Georgia,Helvetica,Arial,Sans-Serif;line-height:140%;font-size:13px;"&gt; &lt;span&gt;Posted:&lt;/span&gt; 26 Feb 2011 12:17 AM PST&lt;/p&gt; &lt;div style="margin:0;font-family:Georgia,Helvetica,Arial,Sans-Serif;line-height:140%;font-size:13px;color:#000000;"&gt;&lt;p style="text-align: justify;"&gt;&lt;a rel="attachment wp-att-13870" href="http://www.janokti.com/sansad-political-news-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%a6-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%97/national-news-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%af/%e0%a4%ac%e0%a4%9c%e0%a4%9f-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%96%e0%a5%87%e0%a4%97%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a5%80-%e0%a4%b0%e0%a4%82%e0%a4%97/attachment/pranab/"&gt;&lt;img class="aligncenter size-full wp-image-13870" title="PRANAB" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/PRANAB.jpg" alt="" width="143" height="131" /&gt;&lt;/a&gt;एक तरफ केंद्र सरकार पर लगे हैं भ्रष्टाचार के आरोप तो दूसरी तरफ है पांच राज्यों में होने वाले चुनाओं की रणनीति, इस बीच जब सोमवार को प्रणव मुखर्जी अपना बजट भाषण पेश करेंगे तो उनसे यही उम्मीद की जा रही है कि वित्त मंत्री &amp;#8216;मध्यम वर्ग&amp;#8217; के साथ-साथ &amp;#8216;आम आदमी&amp;#8217; को भी खुश करने की कोशिश करेंगे।&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;अगर बात उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों की करें तो वित्त मंत्री वहां के मुस्लिम वोटरों को खुश करने के लिए बुनकरों के कर्ज माफ भी कर सकते हैं। अगले साल यूपी में भी चुनाव होने वाले हैं और यहां बड़ी संख्या में बुनकर रहते हैं। कांग्रेस यूपी में अपनी स्थिति मजबूत करने और बुनकरों को खुश करने के लिए कपास और सिल्क पर टैक्स छूट भी दे सकती है।&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;माना जा रहा है कि टैक्स छूट की सीमा बढ़ाए जाने की घोषणा हो सकती है। वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी टैक्स छूट की सीमा 1.6 लाख से बढ़ाकर 2 लाख रुपये कर सकते हैं। हालांकि, अभी 1.6 लाख तक की आमदनी वाले लोगों के लिए टैक्स छूट की सुविधा है। इसके अलावा 20 हाजर रुपये की छूट उन लोगों को है, जिन्होंने इंफ्रास्ट्रक्चर बॉन्ड में निवेश कर रखा है। उम्मीद की जा रही है कि इस बजट में भी इस सुविधा को जारी रखा जा सकता है।&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;ज्ञातव्य है कि वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी द्वारा संसद में शुक्रवार को पेश 2010-11 की आर्थिक समीक्षा में इस तथ्य को स्वीकारा गया कि आपूर्ति तंत्र सुधारना होगा व भ्रष्टाचार पर लगाम लगानी होगी। वहीँ दूसरी तरफ आर्थिक समीक्षा में गरीब परिवारों के लिए सब्सिडी पर जारी खाद्यान्न खुले बाजार में बिकने पर चिंता भी जताई गई। अब देखना यह है कि वित्त मंत्री अपने बज़ट भाषण से किसको-किसको संतुष्ट कर पाते है।&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt; &lt;div class="feedflare"&gt; &lt;a href="http://feeds.feedburner.com/~ff/janokti/pfzK?a=TAvOIuj3W3g:lgc2agdCscQ:yIl2AUoC8zA"&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~ff/janokti/pfzK?d=yIl2AUoC8zA" border="0"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt; &lt;/div&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/janokti/pfzK/~4/TAvOIuj3W3g?utm_source=feedburner&amp;utm_medium=email" height="1" width="1"/&gt;&lt;/div&gt; &lt;/td&gt; &lt;/tr&gt; &lt;/table&gt; &lt;table style="border-top:1px solid #999;padding-top:4px;margin-top:1.5em;width:100%" id="footer"&gt; &lt;tr&gt; &lt;td style="text-align:left;font-family:Helvetica,Arial,Sans-Serif;font-size:11px;margin:0 6px 1.2em 0;color:#333;"&gt;You are subscribed to email updates from &lt;a href="http://www.janokti.com"&gt;JANOKTI : जनोक्ति :  राज-समाज और जन की आवाज&lt;/a&gt; &lt;br /&gt;To stop receiving these emails, you may &lt;a href="http://feedburner.google.com/fb/a/mailunsubscribe?k=dYtSEolrkS-K8ShJPEJPwgGa3hs"&gt;unsubscribe now&lt;/a&gt;.&lt;/td&gt; &lt;td style="font-family:Helvetica,Arial,Sans-Serif;font-size:11px;margin:0 6px 1.2em 0;color:#333;text-align:right;vertical-align:top"&gt;Email delivery powered by Google&lt;/td&gt; &lt;/tr&gt; &lt;tr&gt; &lt;td colspan="2" style="text-align:left;font-family:Helvetica,Arial,Sans-Serif;font-size:11px;margin:0 6px 1.2em 0;color:#333;"&gt;Google Inc., 20 West Kinzie, Chicago IL USA 60610&lt;/td&gt; &lt;/tr&gt; &lt;/table&gt; &lt;/div&gt; &lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6956958984171538532-8150355897824129464?l=hindisahity.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://hindisahity.blogspot.com/feeds/8150355897824129464/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://hindisahity.blogspot.com/2011/02/janokti_26.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6956958984171538532/posts/default/8150355897824129464'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6956958984171538532/posts/default/8150355897824129464'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://hindisahity.blogspot.com/2011/02/janokti_26.html' title='JANOKTI : जनोक्ति'/><author><name>नरेन्द्र निर्मल</name><uri>http://www.blogger.com/profile/16479213514036313208</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_qw0JRiWRDZU/SXyW6w_AHBI/AAAAAAAAAH0/QBx-PMdEfB4/S220/narendra+pic.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-6956958984171538532.post-413770105071541290</id><published>2011-02-25T20:36:00.001-08:00</published><updated>2011-02-25T20:36:41.277-08:00</updated><title type='text'>JANOKTI : जनोक्ति</title><content type='html'>&lt;style type="text/css"&gt;                          h1 a:hover {background-color:#888;color:#fff ! important;}                          div#emailbody table#itemcontentlist tr td div ul {                                         list-style-type:square;                                         padding-left:1em;                         }                                  div#emailbody table#itemcontentlist tr td div blockquote {                                 padding-left:6px;                                 border-left: 6px solid #dadada;                                 margin-left:1em;                         }                                  div#emailbody table#itemcontentlist tr td div li {                                 margin-bottom:1em;                                 margin-left:1em;                         }                           table#itemcontentlist tr td a:link, table#itemcontentlist tr td a:visited, table#itemcontentlist tr td a:active, ul#summarylist li a {                                 color:#000099; 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&lt;span&gt;Posted:&lt;/span&gt; 25 Feb 2011 08:50 AM PST&lt;/p&gt; &lt;div style="margin:0;font-family:Georgia,Helvetica,Arial,Sans-Serif;line-height:140%;font-size:13px;color:#000000;"&gt;&lt;p style="text-align: justify;"&gt;&lt;a rel="attachment wp-att-13861" href="http://www.janokti.com/%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%a4-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be/%e0%a4%86%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%97-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%85%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a5%80%e0%a4%9a-%e0%a4%95%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%ab%e0%a5%8d/attachment/godhra-kand/"&gt;&lt;img class="aligncenter size-full wp-image-13861" title="godhra kand" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/godhra-kand.jpg" alt="" width="466" height="262" /&gt;&lt;/a&gt;गोधरा कांड पर सालों बाद आया फैसला सुर्ख़ियों में रहा और कांग्रेस ने इसे अपने अल्पसंख्यक पक्ष से देखा तो भाजपा ने अपनी जीत बताई | दरअसल बीते मंगलवार को अहमदाबाद की एक विशेष अदालत ने गोधरा रेल कांड को साज़िश करार दिया है और मामले के अभियुक्तों में से 31 को दोषी पाया है |वहीं अदालत ने 63 अभियुक्तों को बरी करने का आदेश दिया है |अदालत का ये फ़ैसला 27 फ़रवरी 2002 को साबरमती एक्सप्रेस के एक डब्बे में लगाई गई आग के लिए गिरफ़्तार अभियुक्तों की भूमिका पर है|उस आग में 59 लोग अयोध्या से लौट रहे हिंदू कारसेवक थे,जो मारे गए थे|&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;गौरतलब है कि अब तक गोधरा कांड से लेकर गुजरात दंगों तक कई सारे जांच आयोग और विशेष जांच एजेंसियों द्वारा छान-बीन की जा चुकी है | वैसे इस देश में आयोग और फिर अदालतों का खेल किसी भी मुद्दे पर खेला जाना आम बात है | गोधरा कांड पर भी  पक्ष -विपक्ष की लड़ाई में आयोग पर आयोग गठित किये गए |लालू यादव ने भी अपने ओर से एक आयोग गठित कर अपने मन मुताबिक परिणाम लोगों को बताया था | और अब राज्य सरकार और विशेष जांच एजेंसियों की रिपोर्टों के आधार पर अदालत का फैसला आया है जिसमें गोधराकांड को दुर्घटना ना मान कर एक सुनियोजित साजिश कहा गया है | तो प्रशन है कि सच क्या है ? गलत कौन है ? या तो तब कांग्रेस गठबंधन के रेलमंत्री लालू गलत थे या अब अदालत गलत है ?&lt;/p&gt; &lt;div class="feedflare"&gt; &lt;a href="http://feeds.feedburner.com/~ff/janokti/pfzK?a=efA_ws-Wyi0:KBEdbU8rRho:yIl2AUoC8zA"&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~ff/janokti/pfzK?d=yIl2AUoC8zA" border="0"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt; &lt;/div&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/janokti/pfzK/~4/efA_ws-Wyi0?utm_source=feedburner&amp;utm_medium=email" height="1" width="1"/&gt;&lt;/div&gt; &lt;/td&gt; &lt;/tr&gt; &lt;tr&gt; &lt;td style="margin-bottom:0;line-height:1.4em;"&gt; &lt;p style="margin:1em 0 3px 0;"&gt; &lt;a name="2" style="font-family:Arial, Helvetica, sans-serif;font-size:18px;" href="http://feedproxy.google.com/~r/janokti/pfzK/~3/MpwA13gJ1zA/?utm_source=feedburner&amp;utm_medium=email"&gt;राजनीति के फेर में फंसे बाबा जी&lt;/a&gt; &lt;/p&gt; &lt;p style="font-size:13px;color:#555;margin:9px 0 3px 0;font-family:Georgia,Helvetica,Arial,Sans-Serif;line-height:140%;font-size:13px;"&gt; &lt;span&gt;Posted:&lt;/span&gt; 25 Feb 2011 08:38 AM PST&lt;/p&gt; &lt;div style="margin:0;font-family:Georgia,Helvetica,Arial,Sans-Serif;line-height:140%;font-size:13px;color:#000000;"&gt;&lt;p&gt;  योग सिखाते-सिखाते बाबा रामदेव जी कांग्रेस की राजनीति में फंस गये। बाबा ने योग सिखाने के साथ-साथ भ्रष्टाचार के विरोध में भी अपनी सांसे अन्दर-बाहर करनी शुरू की तो बहुतों को पसंद आया और बहुतों को नापसंद। इधर बाबा के इस आन्दोलन की नापंसदगी इस रूप में बढ़ी कि एक सांसद जी ने तो बाबा को सिर्फ योग सिखाने की सलाह दे डाली तो दूसरे नेताजी ने बाबा को सलाह दी कि धन लेते समय जांच करवा लिया करें कि वह कहीं काला धन तो नहीं।&lt;/p&gt; &lt;p&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/-Dtu4vVdaOZQ/TWfZkrGrskI/AAAAAAAABgg/895FAoTD2Eo/s1600/baba2.jpg"&gt;&lt;img style="margin: 0px auto 10px;text-align: center;cursor: pointer;width: 320px;height: 214px" src="http://3.bp.blogspot.com/-Dtu4vVdaOZQ/TWfZkrGrskI/AAAAAAAABgg/895FAoTD2Eo/s320/baba2.jpg" alt="" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt; &lt;span&gt;अब&lt;/span&gt; समझ में यह नहीं आ रहा कि बाबा के भ्रष्टाचार के विरोध में निकल पड़ने से उन्हें नेताओं का विरोध सहना पड़ रहा है अथवा उन सांसद महोदय को बचाने के लिए कांग्रेस की ओर से विरोध चालू हो गया? जो भी हो पर इतना तो तय है कि बाबा अपना काम छोड़कर दूसरे के काम में टांग अड़ाने लगे हैं। बाबा का काम है देश की जनता को योग सिखाना और वे करने लगे भ्रष्टाचार हटाने की बातें, ऐसे में बाबा को विरोध तो झेलना ही था।&lt;br /&gt;   &lt;span&gt;&lt;br /&gt; वैसे&lt;/span&gt; यह कोई नियम नहीं है कि कोई व्यक्ति किसी एक काम को कर रहा है तो देशहित में किसी दूसरे काम को नहीं करेगा। बाबा ने यही सोचकर कि वे योग के साथ लोगों की जीवन-शैली को आसान बना रहे हैं तो इसी के साथ भ्रष्टाचार पर चोट करके देश की जीवन-शैली को भी सुधार दिया जाये। बाबा जी इस प्रयास में यह भूल गये कि योग सिखाना और देश की जनता को किसी विशेष मुद्दे पर जागरूक करना दो अलग-अलग बातें हैं।&lt;br /&gt;   &lt;span&gt;&lt;br /&gt; अब&lt;/span&gt; आप कहेंगे कि बाबा ने ऐसा कौन सा गलत काम किया जो योग सिखाते-सिखाते भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम छेड़ दी। गलत बाबा ने नहीं किया उनके करने का अंदाज गलत निकला। बाबा अपने भ्रष्टाचार विरोध के लिए पूरे जी-जान से लगे हैं और एक बार में लाखों की भीड़ को इसके प्रति जागरूक करने का काम करते हैं। इसके बाद भी भ्रष्टाचार के मीटर की सुई नीचे नहीं आ रही है। इसका कारण समझ में नहीं आया।&lt;/p&gt; &lt;p&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/-cSaV7aqMzpk/TWfZkdxlKuI/AAAAAAAABgY/RjTqh0sobuw/s1600/baba.jpg"&gt;&lt;img style="margin: 0px auto 10px;text-align: center;cursor: pointer;width: 320px;height: 167px" src="http://4.bp.blogspot.com/-cSaV7aqMzpk/TWfZkdxlKuI/AAAAAAAABgY/RjTqh0sobuw/s320/baba.jpg" alt="" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt; &lt;p&gt;कहीं ऐसा तो नहीं कि अपनी लोकप्रियता को देखकर बाबा को भी राजनीति का स्वाद लग गया हो। इसके पीछे एक ठोस कारण हमें तो दिखाई देता है और वह ये कि भ्रष्टाचार देश की ऐसी कोई समस्या नहीं जो पिछले एक साल में ही उभरी हो, फिर बाबा ने साल भर पहले से इस पर पहल क्यों नहीं शुरू की। यदि आप सभी को याद हो तो देश में बाबाओं ने, नेताओं ने, सामाजिक कार्यकर्ताओं ने, राजनैतिक दलों ने भ्रष्टाचार के विरोध में अपने स्वर को उस समय तेज किया जब बिहार में नीतीश कुमार दोबार लौट आये और उन्होंने भ्रष्टाचार को निशाना बनाया। सभी को लगा कि भ्रष्टाचार के विरोध से जब नीतीश दोबारा आ सकते हैं तो जो अभी तक आये भी नहीं हैं वे कम से कम एक बार तो आ ही सकते हैं।&lt;br /&gt;   &lt;span&gt;&lt;br /&gt; बाबा&lt;/span&gt; जी आप योग के साथ भ्रष्टाचार को दूर करने की बात कर रहे हैं, अच्छा है पर कम से कम यह बताते चलें कि आप जिस ज्ञान को देश भर में बांटने का दावा करते नहीं थकते उस ज्ञान से कितने गांवों को, कितने गरीबों को अपने शिविरों के द्वारा लाभान्वित किया है? आप बतायें कि आपके शिविर क्यों बड़े शहर में लगते हैं और उनकी फीस का स्वरूप अलग-अलग क्यों होता है? आप बतायें कि आपके योग-शिष्यों में से कितनों ने आपसे प्रभावित होकर अपनी ब्लैकमनी को जनता के, सरकार के सामने उजागर किया है? आप यह भी संज्ञान में ले लें कि आपके आसपास विचरने वाला मानव जीव क्या भ्रष्टाचार से मुक्त हो सका है?&lt;br /&gt;   &lt;span&gt;&lt;br /&gt; आपने&lt;/span&gt; लगता है राजनीति का मन बना लिया है और इसी कारण से नगर-नगर अपने शिष्यों को कागजों पर हस्ताक्षर लेने का ठेका सा बांट दिया है। अरे, जागरूकता मन के भीतर से आती है, किसी के द्वारा कागज पर हस्ताक्षर के द्वारा नहीं। आप लोगों के मन को जगाने का काम करें, भ्रष्टाचार स्वयं भाग जायेगा। आप स्वयं विचार करिये कि आपकी इस लोकप्रियता के बाद भी आपके शिष्य जनता के हस्ताक्षरों को मोहताज घूम रहे हों तो यह आपके अभियान पर, आपकी संकल्पना पर, आपके स्वयं के विश्वास पर प्रश्नचिन्ह है। कृपया लोगों को निरोग बनाने का ही काम पहले कर लें, मन को, तन को निरोग बनाने का संकल्प कर लें, देखियेगा कि देश स्वयं ही भ्रष्टाचार से मुक्त होकर निरोग दिखाई देगा।&lt;br /&gt; &amp;#8212;&amp;#8212;&amp;#8212;&amp;#8212;&amp;#8212;&amp;#8212;&amp;#8211;&lt;br /&gt; दोनों चित्र गूगल छवियों से साभार &lt;/p&gt; &lt;div class="feedflare"&gt; &lt;a href="http://feeds.feedburner.com/~ff/janokti/pfzK?a=MpwA13gJ1zA:wczjZBmTOLA:yIl2AUoC8zA"&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~ff/janokti/pfzK?d=yIl2AUoC8zA" border="0"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt; &lt;/div&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/janokti/pfzK/~4/MpwA13gJ1zA?utm_source=feedburner&amp;utm_medium=email" height="1" width="1"/&gt;&lt;/div&gt; &lt;/td&gt; &lt;/tr&gt; &lt;tr&gt; &lt;td style="margin-bottom:0;line-height:1.4em;"&gt; &lt;p style="margin:1em 0 3px 0;"&gt; &lt;a name="3" style="font-family:Arial, Helvetica, sans-serif;font-size:18px;" href="http://feedproxy.google.com/~r/janokti/pfzK/~3/UvfkrMokTJ0/?utm_source=feedburner&amp;utm_medium=email"&gt;टूटी कश्ती से चुनावी दरिया पार करने की कोशिश&lt;/a&gt; &lt;/p&gt; &lt;p style="font-size:13px;color:#555;margin:9px 0 3px 0;font-family:Georgia,Helvetica,Arial,Sans-Serif;line-height:140%;font-size:13px;"&gt; &lt;span&gt;Posted:&lt;/span&gt; 25 Feb 2011 08:25 AM PST&lt;/p&gt; &lt;div style="margin:0;font-family:Georgia,Helvetica,Arial,Sans-Serif;line-height:140%;font-size:13px;color:#000000;"&gt;&lt;div style="text-align: justify;" dir="ltr"&gt; &lt;div&gt;&lt;a rel="attachment wp-att-13854" href="http://www.janokti.com/sansad-political-news-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%a6-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%97/%e0%a4%9f%e0%a5%82%e0%a4%9f%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%9a%e0%a5%81%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a5%80-%e0%a4%a6%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%af/attachment/49/"&gt;&lt;img class="alignleft size-full wp-image-13854" title="49" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/49.jpg" alt="" width="212" height="238" /&gt;&lt;/a&gt;जब  किसी विपक्षी नेता को अपने राज्य में विधानसभा चुनाव में जाना हो और उसे  बजट पेश करने का सुनहरा मौका मिल जाए तो जाहिर है वह इसका अपने चुनावी  हितों की पूर्ति के लिए भरपूर उपयोग करेगा.नेहरु युग में हो सकता है कि ऐसा  नहीं होता हो लेकिन वर्तमान काल में तो ऐसा ही होता है और इस साल ऐसा ही  हुआ भी.वर्षों से पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर नजरें गड़ाए  ममता बनर्जी ने तमाम पूर्वानुमानों को सत्य साबित करते हुए केंद्रीय रेल  बजट को बंगाल का बजट बनाकर रख दिया.बीच-बीच में अन्य राज्यों  जिसमें केरल  सबसे आगे रहा,का नाम भी घोषणाओं की बाढ़वाले भाषण में आता रहा लेकिन  कम-से-कम आधे समय तक बंगाल की ही बात होती रही.मैं दावे के साथ कह सकता हूँ  कि जिन श्रोताओं-दर्शकों ने रेल बजट का प्रसारण देखा-सुना होगा उन्हें  पश्चिम बंगाल के सभी जिलों के नाम जानने के लिए अब सामान्य ज्ञान की  किताबें उलटनी नहीं पड़ेगी बल्कि ममताजी ने आज इनके नामों को इतनी बार  दोहराया है कि उन्हें ये नाम यूं ही याद हो गए होंगे.&lt;/div&gt; &lt;p&gt;इस साल रेलवे बाजार से १० हजार करोड़ रूपये का कर्ज लेने जा रही हैं  क्योंकि रेलवे को प्रत्येक १०० रूपये की कमाई पर ११५ रूपये खर्च करने पड़  रहे हैं.ऐसे में पश्चिम बंगाल,केरल और आंध्र प्रदेश (यहाँ कांग्रेसी राज्य  सरकार को चौतरफा समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है) के लिए नई परियोजनाओं  की झड़ी लगा देनेवाली ममता ने यह नहीं बताया कि इनके लिए धन आएगा कहाँ  से?खुदा न करे अगर ममता इस साल पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री बन गईं तो उनकी  जगह आनेवाला रेलमंत्री उनकी घोषणाओं के प्रति उपेक्षापूर्ण रवैय्या नहीं  अपनाएगा इसकी क्या गारंटी है?लालू के जाने के बाद जिस तरह ममता ने बिहार की  सभी रेल परियोजनाओं को निर्ममतापूर्वक अधर में लटका दिया आनेवाला  रेलमंत्री भी कहीं उनके सपनों की परियोजनाओं के साथ वैसा ही व्यवहार तो  नहीं करेगा?&lt;br /&gt; किसी भी रेल बजट की खामी पर्याप्त  आवंटन का नहीं होना तो होता ही है;बजट में यह भी नहीं बताया जाता है कि  किसी योजना को कितने समय में पूरा हो जाना है.लगता है जैसे देरी रेलवे का  अनिवार्य गुण बन गयी है.फिर चाहे वह देरी ट्रेनों के परिचालन की हो या  योजनाओं के पूरा होने की.ममता ने इस साल भी यात्री किराये में किसी तरह की  वृद्धि नहीं की है.ज्ञात हो कि यात्री किराया बढ़े १० साल बीत चुके  हैं.जाहिर है कि ऐसा करते समय उनके दिमाग में पश्चिम बंगाल का चुनाव तो  होगा ही;साथ ही कमरतोड़ महंगाई का ख्याल भी कहीं-न-कहीं उनके जेहन में  होगा.पिछले १० सालों में रेलवे किराया और बस किराया में भारी अंतर पैदा हो  चुका है.उदाहरण के लिए हाजीपुर से मुजफ्फरपुर का बस का भाडा ३५ रूपया है  जबकि रेलवे का भाडा पैसेंजर से १० रूपया और एक्सप्रेस से मात्र २४ रूपया  है.अगर यात्री किराये में मामूली वृद्धि कर दी जाती है तो भी आमलोगों की  जेब पर बोझ नहीं पड़ता.बदले में सरकार की आमदनी काफी बढ़ जाती जिससे ममता जी  रेलयात्रियों की सुरक्षा के लिए कदम उठा पातीं न कि सिर्फ जुबानी खर्च से  काम चलतीं.साथ ही ममता जी नई पटरी बिछाने के लक्ष्य को भी १००० कि.मी. से  घटाकर ७०० कि.मी. प्रति वर्ष नहीं करना पड़ता.इतना ही नहीं यात्री कोच और  मालगाड़ी के डिब्बे की कमी भी दूर हो जाती.&lt;br /&gt; आजकल जब भी रेलगाड़ी में कोई आपराधिक घटना  घटती है तो केंद्र राज्य पर और राज्य केंद्र पर आरोप लगाने लगता है.ट्रेनें  चलायमान वस्तु हैं और उन्हें कई राज्यों और जिलों से होकर गुजरना पड़ता  है.ऐसे में कभी-कभी दो राज्यों की पुलिसों और कभी-कभी दो जिलों की पुलिसों  के मध्य विवाद उत्पन्न हो जाता है कि जब घटना घटी तब ट्रेन किस राज्य या  जिले में थी.अच्छा होता अगर रेलवे के लिए अलग से राष्ट्रीय पुलिस सेवा की  स्थापना कर दी जाती और रेल संपत्ति और यात्रिओं की सुरक्षा का जिम्मा पूरी  तरह उसको ही सौंप दिया जाता.इस बार के रेल बजट में मंत्री ने दुर्घटनारोधी  यंत्रों को ३ रेल मंडलों में लगाने की घोषणा की है जिसे अधूरे मन से और  बहुत देर से उठाया गया कदम ही कहा जा सकता है; इसके सिवा और कुछ भी नहीं.&lt;br /&gt; रेलमंत्री को शिकायत है कि उन्हें सदन में बोलने नहीं  दिया जाता.यह वह रेलमंत्री बोल रही हैं जो लम्बे समय से कैबिनेट और सदन की  बैठकों में भाग ही नहीं ले रहीं.उनके ऐसे आरोपों पर सिर्फ हँसा ही जा सकता  है.पूरी दुनिया के देशों में इस समय बुलेट ट्रेन चलाने की होड़ लगी है और  हमारे यहाँ ट्रेनें चल रही हैं ५०-६० की रफ़्तार में.अगर भारत को विकास की  वैश्विक दौड़ में सचमुच शामिल होना है तो उसे रेलवे सहित हरेक क्षेत्र में  अपनी आधारभूत संरचना का विकास करना होगा और सुपर गति से करता होगा.वरना  प्रत्यक्ष विदेश निवेश में आया ज्वर अब उतरने लगा ही है और आगे इसकी गति और  भी तेज होनेवाली है.&lt;br /&gt; जहाँ तक रेल बजट में की जानेवाली घोषणाओं  के लिए धनाभाव का प्रश्न है तो या तो इसके लिए अलग से स्थायी कोष का गठन  किया जाए या फिर रेल बजट को आम बजट का ही हिस्सा बना दिया जाए.इससे योजनाएं  भविष्य में अटका नहीं करेंगी और उनके समय पर पूरी होने की भी गारंटी होगी.&lt;/p&gt; &lt;/div&gt; &lt;div class="feedflare"&gt; &lt;a href="http://feeds.feedburner.com/~ff/janokti/pfzK?a=UvfkrMokTJ0:EE3p_RpfAMk:yIl2AUoC8zA"&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~ff/janokti/pfzK?d=yIl2AUoC8zA" border="0"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt; &lt;/div&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/janokti/pfzK/~4/UvfkrMokTJ0?utm_source=feedburner&amp;utm_medium=email" height="1" width="1"/&gt;&lt;/div&gt; &lt;/td&gt; &lt;/tr&gt; &lt;tr&gt; &lt;td style="margin-bottom:0;line-height:1.4em;"&gt; &lt;p style="margin:1em 0 3px 0;"&gt; &lt;a name="4" style="font-family:Arial, Helvetica, sans-serif;font-size:18px;" href="http://feedproxy.google.com/~r/janokti/pfzK/~3/VoYqTrhWo40/?utm_source=feedburner&amp;utm_medium=email"&gt;शिक्षा का बजटनामा&lt;/a&gt; &lt;/p&gt; &lt;p style="font-size:13px;color:#555;margin:9px 0 3px 0;font-family:Georgia,Helvetica,Arial,Sans-Serif;line-height:140%;font-size:13px;"&gt; &lt;span&gt;Posted:&lt;/span&gt; 25 Feb 2011 08:10 AM PST&lt;/p&gt; &lt;div style="margin:0;font-family:Georgia,Helvetica,Arial,Sans-Serif;line-height:140%;font-size:13px;color:#000000;"&gt;&lt;p style="text-align: justify;"&gt;&lt;a rel="attachment wp-att-13836" href="http://www.janokti.com/sansad-political-news-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%a6-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%97/%e0%a4%b6%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%ac%e0%a4%9c%e0%a4%9f%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%be/attachment/edu/"&gt;&lt;img class="alignleft size-full wp-image-13836" title="edu" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/edu.jpg" alt="" width="250" height="150" /&gt;&lt;/a&gt;शिक्षा का अधिकार कानून 1 अप्रैल 2010 से लागू हो चुका है। इसके तहत शिक्षा 6 से 14 साल के उम्र के बच्चे का कानूनी हक बना गया है। बहरहाल इंतजार इसी बात का है कि वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी इसके लिए कितना धन मुहैया कराते हैं। यूपीए सरकार जब 2004 में सत्ता में आई तो उसने 1966 में आई कोठारी कमीशन की सिफारिशोंको लागू करने की बात कही थी। मगर 45 सालों के बाद भी हम इन सिफारिशों से दूर है। बहरहाल वर्तमान में सरकार जीडीपी का 3.23 फीसदी पैसा शिक्षा में खर्च कर रही है। जबकि कोठारी कमीशन ने इसके लिए जीडीपी का 6 फीसदी खर्च करने की सिफारिश की थी। अगर बजट के कुल खर्च में शिक्षा का हिस्सा देखा जाए तो यह 2009-10 में 3.88 फीसदी से बड़कर 2010-11 में 4.5 फीसदी पहुंच गया। साथ ही प्राथमिक शिक्षा के लिए 13वें वित्त आयोग की सिफारिश के चलते राज्यों को 3675 करोड़ रूपये का अतिरिक्त अनुदान मिल सकेगा। इस कानून को लागू करने के लिए 10 लाख शिक्षकों का जरूरत है। साथ ही इसका अनुमानित बजट पहले पांच सालों में 34000 करोड़ प्रतिवर्ष के आसपास होना चाहिए। हालांकि 2010-11 में इसके खाते में 15000 करोड़ रूपये आए। इस कानून का अर्थिक भार केन्द्र और राज्यों के बीच 55ः45 के अनुपात में होगा, जबकि पूर्वोत्तर राज्यों के लिए 90 फीसदी धन का इंतजाम केन्द्र सरकार करेगी। इस कानून को लागू करने में सबसे बड़ी चुनौति बच्चों को गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है।&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;सर्व शिक्षा अभियान- 11वीं पंचवर्षीय योजना में इस योजना में 71 हजार करोड़ रूपये खर्च करने का फैसला किया गया। पहले पांच सालों में इसे 54371 हजार करोड़ रूपये यानि कुल तय राशि का 76.57 फीसदी ही आवंटित किया गया है।&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;मीड डे मील योजना- 2007 से 2012 तक इस योजना पर 48000 करोड़ रूपये खर्च किए जाने है। फिलहाल अभी तक इसके खाते में 34177 करोड़ रूपये ही आ पाए है। यानि कुल आवंटन का 65.57 फीसदी।&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;शिक्षकों का प्रशिक्षण- इसे योजना को पांच साल में 4000 करोड़ रूपये मिलने थे । मगर अब तक सरकार का आवंटन महज 1444 करोड़ रूपये ही हो पाया है।&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान- कुल 22260 करोड़ रूपये में से इसे अभी तक 2762 करोड़ का आवंटन ही हो पाया है। यानि कुल तय राशि का 12.21 फीसदी।&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;नवोदय विद्यालय- इस मद में सरकार पहले 4 सालों में ही 106.34 फीसदी पैसा दे चुकी है। इसके लिए 11वीं पंचवर्षीय योजना में 4600 करोड़ दिए जाने थे जिसमें अब तक सरकार 4892 करोड़ रूपये दे चुकी है।&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;यूजीसी- इसके खाते में 11524 करोड़ रूपये आए है। यानि कुल तय हुआ 25012 करोड़ का 46.07 फीसदी।&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;तकनीकि शिक्षा- सरकार ने 2022 तक 50 करोड़ युवाओं को राष्ट्रीय कौशल विकास कार्यक्रम से जोड़ने का लक्ष्य रखा है। ताकि बाजार में युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध हो सके। इसमें 23654 करोड़ में से 12380 करोड़ खर्च किए जा चुके है।&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt; &lt;div class="feedflare"&gt; &lt;a href="http://feeds.feedburner.com/~ff/janokti/pfzK?a=VoYqTrhWo40:AwzXKW6Wz0E:yIl2AUoC8zA"&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~ff/janokti/pfzK?d=yIl2AUoC8zA" border="0"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt; &lt;/div&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/janokti/pfzK/~4/VoYqTrhWo40?utm_source=feedburner&amp;utm_medium=email" height="1" width="1"/&gt;&lt;/div&gt; &lt;/td&gt; &lt;/tr&gt; &lt;/table&gt; &lt;table style="border-top:1px solid #999;padding-top:4px;margin-top:1.5em;width:100%" id="footer"&gt; &lt;tr&gt; &lt;td style="text-align:left;font-family:Helvetica,Arial,Sans-Serif;font-size:11px;margin:0 6px 1.2em 0;color:#333;"&gt;You are subscribed to email updates from &lt;a href="http://www.janokti.com"&gt;JANOKTI : जनोक्ति :  राज-समाज और जन की आवाज&lt;/a&gt; &lt;br /&gt;To stop receiving these emails, you may &lt;a href="http://feedburner.google.com/fb/a/mailunsubscribe?k=dYtSEolrkS-K8ShJPEJPwgGa3hs"&gt;unsubscribe now&lt;/a&gt;.&lt;/td&gt; &lt;td style="font-family:Helvetica,Arial,Sans-Serif;font-size:11px;margin:0 6px 1.2em 0;color:#333;text-align:right;vertical-align:top"&gt;Email delivery powered by Google&lt;/td&gt; &lt;/tr&gt; &lt;tr&gt; &lt;td colspan="2" style="text-align:left;font-family:Helvetica,Arial,Sans-Serif;font-size:11px;margin:0 6px 1.2em 0;color:#333;"&gt;Google Inc., 20 West Kinzie, Chicago IL USA 60610&lt;/td&gt; &lt;/tr&gt; &lt;/table&gt; &lt;/div&gt; &lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6956958984171538532-413770105071541290?l=hindisahity.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://hindisahity.blogspot.com/feeds/413770105071541290/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://hindisahity.blogspot.com/2011/02/janokti_25.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6956958984171538532/posts/default/413770105071541290'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6956958984171538532/posts/default/413770105071541290'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://hindisahity.blogspot.com/2011/02/janokti_25.html' title='JANOKTI : जनोक्ति'/><author><name>नरेन्द्र निर्मल</name><uri>http://www.blogger.com/profile/16479213514036313208</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_qw0JRiWRDZU/SXyW6w_AHBI/AAAAAAAAAH0/QBx-PMdEfB4/S220/narendra+pic.JPG'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/-Dtu4vVdaOZQ/TWfZkrGrskI/AAAAAAAABgg/895FAoTD2Eo/s72-c/baba2.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-6956958984171538532.post-3380568868414432379</id><published>2011-02-24T19:06:00.001-08:00</published><updated>2011-02-24T19:06:44.521-08:00</updated><title type='text'>JANOKTI : जनोक्ति</title><content type='html'>&lt;style type="text/css"&gt;                          h1 a:hover {background-color:#888;color:#fff ! important;}                          div#emailbody table#itemcontentlist tr td div ul {                                         list-style-type:square;                                         padding-left:1em;                         }                                  div#emailbody table#itemcontentlist tr td div blockquote {                                 padding-left:6px;                                 border-left: 6px solid #dadada;                                 margin-left:1em;                         }                                  div#emailbody table#itemcontentlist tr td div li {                                 margin-bottom:1em;                                 margin-left:1em;                         }                           table#itemcontentlist tr td a:link, table#itemcontentlist tr td a:visited, table#itemcontentlist tr td a:active, ul#summarylist li a {                                 color:#000099; 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&lt;/a&gt; &lt;/h1&gt; &lt;/td&gt; &lt;td width="1%" /&gt; &lt;/tr&gt; &lt;/table&gt; &lt;hr style="border:1px solid #ccc;padding:0;margin:0" /&gt; &lt;table id="itemcontentlist"&gt; &lt;tr xmlns=""&gt; &lt;td style="margin-bottom:0;line-height:1.4em;"&gt; &lt;p style="margin:1em 0 3px 0;"&gt; &lt;a name="1" style="font-family:Arial, Helvetica, sans-serif;font-size:18px;" href="http://feedproxy.google.com/~r/janokti/pfzK/~3/ObMmR7t7sIg/?utm_source=feedburner&amp;utm_medium=email"&gt;लोकतंत्र के आगे बौद्धिक लोकतंत्र -31&lt;/a&gt; &lt;/p&gt; &lt;p style="font-size:13px;color:#555;margin:9px 0 3px 0;font-family:Georgia,Helvetica,Arial,Sans-Serif;line-height:140%;font-size:13px;"&gt; &lt;span&gt;Posted:&lt;/span&gt; 24 Feb 2011 07:41 AM PST&lt;/p&gt; &lt;div style="margin:0;font-family:Georgia,Helvetica,Arial,Sans-Serif;line-height:140%;font-size:13px;color:#000000;"&gt;&lt;p&gt;&lt;a rel="attachment wp-att-13823" href="http://www.janokti.com/government-failure-%e0%a4%85%e0%a4%82%e0%a4%a7%e0%a5%87%e0%a4%b0-%e0%a4%a8%e0%a4%97%e0%a4%b0%e0%a5%80/%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%95%e0%a4%a4%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%86%e0%a4%97%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a5%8c%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%b2-3/attachment/election1-2/"&gt;&lt;img class="alignleft size-medium wp-image-13823" title="election1" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/election1-300x232.gif" alt="" width="300" height="232" /&gt;&lt;/a&gt;वर्तमान भारत का नायक कैसा हो&lt;/p&gt; &lt;p&gt;आधुनिक भारत में अनेक जन नायक हुए हैं, किन्तु कोई भी लम्बे समय तक नेतृत्व का दायित्व नहीं संभालता पाया गया है. महात्मा गाँधी निश्चित रूप से जन नायक थे किन्तु स्वतन्त्रता प्राप्ति के बाद वे नेतृत्व भर से मुक्त ही रहना चाहते थे, अतः उन्हें भी ऐसा जन नायक नहीं कहा जा सकता जो प्रत्येक स्थिति में जनता का नेतृत्व कर सके. अतः गांधी को जन नायक तो कहा जा सकता है किन्तु भारत नायक नहीं कहा जा सकता जिसके लिए कठोर एवं प्रखर राष्ट्रवाद की भावना की आवश्यकता है. इसके विपरीत गाँधी केवल मानवतावादी थे.&lt;/p&gt; &lt;p&gt;स्वतंत्र भारत के नेताओं में केवल एक नाम ऐसा है जो तब से अब तक सम्मान के साथ याद किया जाता है और जिसने अपने दायित्व निर्वाह से स्वयं को अद्वितीय सिद्ध किया था. यह नाम है &amp;#8216;सरदार वल्लभ भाई पटेल&amp;#8217;, जिन्होंने अंग्रेजों की देन विखंडित भारत को एक छ्त्र के नीचे ला दिया जिसकी क्षमता अन्य किसी नेता में नहीं थी. यदि स्वतंत्र भारत का नेतृत्व सरदार को दिया जाता तो आज देश की यह दुर्दशा न होती जो नेहरु और उसके परिवार ने की है.&lt;/p&gt; &lt;p&gt;दूसरा व्यक्ति जो भारत को सही नेतृत्व प्रदान करने में समर्थ था वह थे &amp;#8216;नेताजी सुभाष चन्द्र बोस&amp;#8217; जिनके लिए देश सर्वोपरि था, लोगों की स्वतन्त्रता अथवा नेताओं के स्वार्थ राष्ट्र हित के समक्ष कोई महत्व नहीं रखते थे. इसी कारण से वे भारत में स्वतन्त्रता के तुरंत बाद जनतंत्र की स्थापना के विरोधी थे. वे चाहते थे कि जनतांत्रिक अधिकार पाने से पहले भारतीयों को अनुशासन सिखाना होगा जिसका उस समय तो नितांत अभाव था ही, आज की स्थिति और भी अधिक दयनीय हुई है.&lt;/p&gt; &lt;p&gt;स्वतन्त्रता से पूर्व के भारत, उसके बाद के भारत में केवल अंतर इतना है कि उस समय विदेशी भारतीयों का बहुविध शोषण कर रहे थे और आज देशी लोग भारतीयों का शोषण ही नहीं कर रहे, उन्हें बहुविध पथ-भृष्ट भी कर रहे हैं ताकि वे कुशासन के विरुद्ध सिर उठाने योग्य ही न रहें. आज के भारत का कुशासन अंग्रेज़ी कुशासन से अधिक घातक है.&lt;/p&gt; &lt;p&gt;भारतीयों में जिन गुणों का नितांत अभाव है तथापि सर्वाधिक अपरिहार्यता है, वे हैं &amp;#8211; अनुशासन और राष्ट्रवाद. अतः भारत और भारतीयों को सही दिशा देने के लिए नायक में इन दोनों गुणों की सर्वाधिक आवश्यकता है. अनुशासन के सापेक्ष स्थिति इतनी विकृत कर दी गयी है कि कठोर कदम उठाये बिना इसकी स्थापना संभव नहीं रह गयी है. अतः वर्तमान भारत नायक को कठोर अनुशासक होने की आवश्यकता है जिसमें लोगों की वर्तमान निरंकुश स्वतन्त्रता] जिसने अब उद्दंडता का रूप ले लिया है, का हनन होना स्वाभाविक है. इस विषय में संदेह यह व्यक्त किया जाता है कि लोग इसे पसंद नहीं करेंगे. किन्तु वस्तुतः ऐसा नहीं है, जन-साधारण आज के छोटे-बड़े नेताओं से इतना तृस्त है कि वे कठोर अनुशासक को पसंद करेंगे. इसका विशेष कारण यह है कि कठोर अनुशासन में जन-साधारण को कोई हानि नहीं है, हानि केवल आज के स्वार्थी नेतृत्व को ही होनी है. और यही जन-साधारण की हार्दिक अभिलाषा है.&lt;/p&gt; &lt;p&gt;आधुनिक विश्व और वैश्वीकरण के सन्दर्भ में राष्ट्रवाद का महत्व क्षीण है, किन्तु भारत के हितों की रक्षा के लिए और विदेशियों द्वारा इसके शोषण को रोकने के लिए इसकी नितांत आवश्यकता है. राष्ट्रवाद राष्ट्र स्तर पर अपना घर संभालने जैसा कार्य है. आज की विडम्बना यह है कि भारत की आतंरिक स्थिति संभाले बिना इसे वैश्वीकरण में धकेल दिया गया है. जिसके कारण अनेक धनाढ्य देश भारतीय हितों के विरुद्ध कार्य कर रहे हैं और भारत के वर्तमान नेता भारत के इस शोषण में निजी स्वार्थों के लिए सहयोग दे रहे हैं. अतः, आज आवश्यकता यह है कि हमें विश्व की ओर से अपने द्वार कुछ समय के लिए बंद कर अपना घर संभालना चाहिए, जिसके बाद वैस्वीकरण से भारत के हितों को कोई आंच नहीं आ सकेगी. अतः वर्तमान भारत के नायक के लिए कठोर अनुशासक होने के साथ-साथ प्रखर राष्ट्रवादी होने की आवश्यकता है.&lt;/p&gt; &lt;div class="feedflare"&gt; &lt;a href="http://feeds.feedburner.com/~ff/janokti/pfzK?a=ObMmR7t7sIg:N8tQufZMoN8:yIl2AUoC8zA"&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~ff/janokti/pfzK?d=yIl2AUoC8zA" border="0"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt; &lt;/div&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/janokti/pfzK/~4/ObMmR7t7sIg?utm_source=feedburner&amp;utm_medium=email" height="1" width="1"/&gt;&lt;/div&gt; &lt;/td&gt; &lt;/tr&gt; &lt;tr&gt; &lt;td style="margin-bottom:0;line-height:1.4em;"&gt; &lt;p style="margin:1em 0 3px 0;"&gt; &lt;a name="2" style="font-family:Arial, Helvetica, sans-serif;font-size:18px;" href="http://feedproxy.google.com/~r/janokti/pfzK/~3/JpjzstEYxQA/?utm_source=feedburner&amp;utm_medium=email"&gt;ओ राही,दिल्ली जाना तो कहना अपनी सरकार से&lt;/a&gt; &lt;/p&gt; &lt;p style="font-size:13px;color:#555;margin:9px 0 3px 0;font-family:Georgia,Helvetica,Arial,Sans-Serif;line-height:140%;font-size:13px;"&gt; &lt;span&gt;Posted:&lt;/span&gt; 24 Feb 2011 07:11 AM PST&lt;/p&gt; &lt;div style="margin:0;font-family:Georgia,Helvetica,Arial,Sans-Serif;line-height:140%;font-size:13px;color:#000000;"&gt;&lt;div&gt;&lt;a rel="attachment wp-att-13816" href="http://www.janokti.com/government-failure-%e0%a4%85%e0%a4%82%e0%a4%a7%e0%a5%87%e0%a4%b0-%e0%a4%a8%e0%a4%97%e0%a4%b0%e0%a5%80/%e0%a4%93-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a5%80%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%a4%e0%a5%8b-%e0%a4%95%e0%a4%b9%e0%a4%a8%e0%a4%be/attachment/maovad/"&gt;&lt;img class="alignleft size-medium wp-image-13816" title="maovad" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/maovad-300x232.jpg" alt="" width="300" height="232" /&gt;&lt;/a&gt;१९९९  के अंतिम सप्ताह में हमने इंडियन एयरलाइंस  के अपहर्ताओं के आगे झुककर जो  गलती की उसने कहीं-न-कहीं कश्मीर में हमारी स्थिति को कमजोर ही किया.साथ ही  पूरी दुनिया में यह गलत संकेत गया कि भारत एक सॉफ्ट स्टेट है और सीमापार  के आतंकवाद से निबटने में सक्षम नहीं है.इन दिनों देश फिर से कुछ उसी तरह  की स्थिति का सामना कर रहा है.माओवादियों ने मलकानगिरी के कलक्टर कृष्णा और  एक अभियंता पवित्र मांझी का अपहरण कर लिया था.कड़ा रूख अपनाने के बदले  माओवादियों की सभी १४ मांगें मान ली गईं.माओवादी मांझी को छोड़ भी चुके  हैं.लेकिन उनके साथ एक पत्र भी भेजा है जिसमें उन्होंने कृष्णा को छोड़ने के  बदले ५ नई मांगें की हैं.इस बीच माओवादी नेता गंती प्रसादम को जमानत दी जा  चुकी है.लेकिन वे भी तब तक जेल से बाहर जाने को तैयार नहीं है जब तक उनके  ६०० अन्य माओवादी साथियों को भी रिहा नहीं कर दिया जाता.&lt;/div&gt; &lt;div&gt;ऊंगली पकडवाने पर बांह पकड़ना तो देखा-सुना था लेकिन  यहाँ तो माओवादी गला ही पकड़ रहे हैं.पुलिस ने बरसों की मेहनत और अप्रतिम  साहस के बल पर जिन देशद्रोहियों को गिरफ्तार किया उन्हें एक व्यक्ति की जान  बचाने के लिए रिहा करके सरकार किसी भी तरह वीरता का परिचय तो नहीं ही दे  रही है.आगे जब भी माओवादियों को अपने किसी भी साथी को रिहा करवाना होगा तो  वे किसी अधिकारी का अपहरण कर लेंगे और जंगल में ऐसा करना कठिन भी नहीं  होगा.इस तरह सरकारी अधिकारी उनके लिए ए.टी.एम. मशीन बनकर रह जाएँगे.&lt;/div&gt; &lt;div&gt;अगर सरकार इसी तरह बार-बार झुकती रही तो न तो कंधार विमान अपहरण इस शृंखला  की अंतिम घटनात्मक कड़ी थी और न ही मलकानगिरी के कलक्टर का माओवादियों  द्वारा अगवा किया जाना ही इस प्रकार की अंतिम घटना है.आज तो किसी को याद भी  नहीं होगा कि भारत सरकार सबसे पहले आतंकवादियों के आगे २० साल पहले  रुबैय्या सईद अपहरण मामले में झुकी थी.भारत सरकार और राज्य सरकारों को समझ  लेना होगा कवि गोपाल सिंह नेपाली की इन पंक्तियों में छिपी हुई चेतावनी को  जो उन्होंने १९५६ में ही दी थी और दुर्भाग्यवश जो आज भी उतनी ही प्रासंगिक  हैं-&lt;/div&gt; &lt;div&gt;ओ राही,दिल्ली जाना तो कहना अपनी सरकार से&lt;/div&gt; &lt;div&gt;चरखा चलता है हाथों से,शासन चलता तलवार से&lt;/div&gt; &lt;div&gt;यह रामकृष्ण की जन्मभूमि,पावन धरती सीताओं की&lt;/div&gt; &lt;div&gt;फिर कमी रही कब भारत में,सभ्यता-शांति सद्भावों की&lt;/div&gt; &lt;div&gt;पर नए पडोसी कुछ ऐसे,पागल हो रहे सिवाने पर&lt;/div&gt; &lt;div&gt;इस पार चरते गौएँ हम,गोली चलती उस पार से&lt;/div&gt; &lt;div&gt;ओ राही,दिल्ली जाना तो कहना अपनी सरकार से&lt;/div&gt; &lt;div&gt;तुम उड़ा कबूतर अम्बर में,सन्देश शांति का देते हो&lt;/div&gt; &lt;div&gt;चिट्ठी लिखकर रह जाते हो,जब कुछ गड़बड़ सुन लेते हो&lt;/div&gt; &lt;div&gt;वक्तव्य लिखो कि विरोध करो,यह भी कागज वह भी कागज&lt;/div&gt; &lt;div&gt;कब नाव राष्ट्र की पार लगी,यों कागज की पतवार से&lt;/div&gt; &lt;div&gt;ओ राही,दिल्ली जाना तो कहना अपनी सरकार से&lt;/div&gt; &lt;div&gt;मालूम हमें है तेजी से निर्माण हो रहा भारत का&lt;/div&gt; &lt;div&gt;चहुँओर अहिंसा के कारण,गुणगान हो रहा भारत का&lt;/div&gt; &lt;div&gt;पर यह भी सच है,आजादी है तो चल रही अहिंसा है&lt;/div&gt; &lt;div&gt;वरना अपना घर दीखेगा,फिर कहाँ कुतुबमीनार से&lt;/div&gt; &lt;div&gt;ओ राही,दिल्ली जाना तो कहना अपनी सरकार से&lt;/div&gt; &lt;div&gt;सिद्धांत,धर्म कुछ और चीज,आजादी है कुछ और चीज&lt;/div&gt; &lt;div&gt;सबकुछ है तरु-डाली-पत्ते,आजादी है बुनियादी बीज&lt;/div&gt; &lt;div&gt;इसलिए वेद-गीता-कुरान,दुनिया ने लिक्खे स्याही से&lt;/div&gt; &lt;div&gt;लेकिन लिखा आजादी का इतिहास रूधिर की धार से&lt;/div&gt; &lt;div&gt;ओ राही,दिल्ली जाना तो कहना अपनी सरकार से&lt;/div&gt; &lt;div style="text-align: justify;"&gt;चरखा चलता है हाथों से,शासन चलता तलवार से.&lt;/div&gt; &lt;div class="feedflare"&gt; &lt;a href="http://feeds.feedburner.com/~ff/janokti/pfzK?a=JpjzstEYxQA:-sfr_vj_J6U:yIl2AUoC8zA"&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~ff/janokti/pfzK?d=yIl2AUoC8zA" border="0"&gt;&lt;/img&gt;&lt;/a&gt; &lt;/div&gt;&lt;img src="http://feeds.feedburner.com/~r/janokti/pfzK/~4/JpjzstEYxQA?utm_source=feedburner&amp;utm_medium=email" height="1" width="1"/&gt;&lt;/div&gt; &lt;/td&gt; &lt;/tr&gt; &lt;/table&gt; &lt;table style="border-top:1px solid #999;padding-top:4px;margin-top:1.5em;width:100%" id="footer"&gt; &lt;tr&gt; &lt;td style="text-align:left;font-family:Helvetica,Arial,Sans-Serif;font-size:11px;margin:0 6px 1.2em 0;color:#333;"&gt;You are subscribed to email updates from &lt;a href="http://www.janokti.com"&gt;JANOKTI : जनोक्ति :  राज-समाज और जन की आवाज&lt;/a&gt; &lt;br /&gt;To stop receiving these emails, you may &lt;a href="http://feedburner.google.com/fb/a/mailunsubscribe?k=dYtSEolrkS-K8ShJPEJPwgGa3hs"&gt;unsubscribe now&lt;/a&gt;.&lt;/td&gt; &lt;td style="font-family:Helvetica,Arial,Sans-Serif;font-size:11px;margin:0 6px 1.2em 0;color:#333;text-align:right;vertical-align:top"&gt;Email delivery powered by Google&lt;/td&gt; &lt;/tr&gt; &lt;tr&gt; &lt;td colspan="2" style="text-align:left;font-family:Helvetica,Arial,Sans-Serif;font-size:11px;margin:0 6px 1.2em 0;color:#333;"&gt;Google Inc., 20 West Kinzie, Chicago IL USA 60610&lt;/td&gt; &lt;/tr&gt; &lt;/table&gt; &lt;/div&gt; &lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6956958984171538532-3380568868414432379?l=hindisahity.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://hindisahity.blogspot.com/feeds/3380568868414432379/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://hindisahity.blogspot.com/2011/02/janokti_24.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6956958984171538532/posts/default/3380568868414432379'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6956958984171538532/posts/default/3380568868414432379'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://hindisahity.blogspot.com/2011/02/janokti_24.html' title='JANOKTI : जनोक्ति'/><author><name>नरेन्द्र निर्मल</name><uri>http://www.blogger.com/profile/16479213514036313208</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_qw0JRiWRDZU/SXyW6w_AHBI/AAAAAAAAAH0/QBx-PMdEfB4/S220/narendra+pic.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-6956958984171538532.post-1386132653283015958</id><published>2011-02-23T19:11:00.001-08:00</published><updated>2011-02-23T19:11:20.946-08:00</updated><title type='text'>JANOKTI : जनोक्ति</title><content type='html'>&lt;style type="text/css"&gt; 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&lt;span&gt;Posted:&lt;/span&gt; 23 Feb 2011 07:56 AM PST&lt;/p&gt; &lt;div style="margin:0;font-family:Georgia,Helvetica,Arial,Sans-Serif;line-height:140%;font-size:13px;color:#000000;"&gt;&lt;p style="text-align: justify;"&gt;&lt;a rel="attachment wp-att-13808" href="http://www.janokti.com/%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a7-miscellaneous/%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a4%a3%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a4%be-%e0%a4%8f%e0%a4%95-%e0%a4%a6%e0%a5%83%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a4%bf%e0%a4%95/attachment/rajasthan-shadi/"&gt;&lt;img class="alignleft size-medium wp-image-13808" title="rajasthan shadi" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/rajasthan-shadi-300x199.jpg" alt="" width="300" height="199" /&gt;&lt;/a&gt;बीकानेर एक ऐसा शहर जहाँ परम्पराओं का निवास होता है, जहाँ के लोग अपनी संस्कृति और अपने रिवाजों के लिए जाने जाते हैं और उन्हीं रिवाजों और परम्पराओं में से एक परम्परा है बीकानेर में रहने वाले पुश्करणा समाज के लोगों का सामूहिक विवाहोत्सव &amp;#8211; सावा। जी हाँ सावा एक ऐसी परम्परा जिसमें सैकड़ों शादियाँ  एक ही दिन सम्पन्न हो जाती है। इस परम्परा के अंतर्गत पुश्करणा समाज के लोग एक दिन निष्चित कर अपने बेटे बेटियों की शादियाँ  एक ही दिन सामूहिक रूप से सम्पन्न कर देते हैं। इस परम्परा में षादी के सारे कार्यक्रम एक निष्चित कार्यक्रम के अनुसार सम्पन्न किए जाते हैं और उस दिन ऐसा लगता है जैसे सारा षहर ही मण्डप हो गया है और षहर के लोग बाराती। जहाँ देखो वहां  दूल्हा, दूल्हन और बारातें ही नजर आती हैं।&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;यह परम्परा बीकानेर के पुश्करणा ब्राह्मण समाज में आज से नहीं बल्कि करीब सवा चार सौ साल से निभाई जा रही है। इस परम्परा को षुरू करने के पीछे क्या कारण रहे होंगे यह तो निष्चित तौर पर नहीं कहा जा सकता पर ऐसा माना जाता है कि एक समय था जब पुश्करणा ब्राह्मण अपने राजाओं के साथ युद्ध पर जाया करते थे, {बीकानेर की बगीचीयों मंे लगे पुश्करणा ब्राह्मणों के पूर्वजांे के चित्रों से यह स्पश्ट है कि पुश्करणा ब्राह्मण राजाओं की युद्ध में पूरी सहायाता किया करते थे}, वह ऐसा समय था जब युद्ध वर्तमान समय की तरह नहीं बल्कि हाथों मे हथियार पकड़ कर लड़े जाते थे और ऐसे युद्धों मंे समय भी बहुत लगता था। यह वह दौर था जब मनुश्य की साम्राज्यवादी अभिलाशा जोरों पर थी और राजा महाराजा अपने जीवन का एक बड़ा भाग इन युद्धों में लगा देते थे और इनके साथ आम सैनिक इनके सरदार और सब तरह के लोग भी युद्धों में अपना जीवन होम करते थे। माना जाता है कि ऐसे ही एक समय में बीकानेर के इन पुश्करणा ब्राह्मणों को लम्बा समय हो गया और इनके घरों में षादी विवाह जैसे संस्कार ही नहीं हो पाए। इन ब्राह्मणों ने राजा के सामने फरियाद करी और राजा ने उपाय सुझाया कि क्यों न ऐसा हो कि एक दिन निष्चित कर दिया जाए और उस दिन ब्राह्मणों के घर में षादी हो जाए और ऐसा करने के राजा के काम भी प्रभावित नहीं होंगे और षादी जैसा पवित्र संस्कार भी सम्पन्न हो जाएगा और माना जाता है कि ऐसे करके पुश्करणा ब्राह्मणों ने सावे ही षुरूआत की।&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;षुरूआत में यह सावा सात साल मंे एक बार मनाया जाता था फिर समय के साथ इसमें परिवर्तन हुआ और यह सावा चार साल में  एक बार मनाया जाने लगा। वर्तमान में बढ़ती आबादी के कारण समय मंे फिर परिवर्तन हुआ और यह सावा अब दो साल में एक बार मनाया जाता है। इस सावे की तिथियां  सावे वाले साल में  दिपावली से पहले तय की जाती है। यह तिथियां पण्डितों के षास्त्रार्थ द्वारा तय की जाती है जिसमें पुश्करणा ब्राह्मण समाज के किराड़ू, ओझा, छंगाणी, जोषी सहित कईं जातियों के लोग हिस्सा लेते हैं। सामाजिक व्यवस्था के अनुसार यह इन पण्डितों को सावे की तिथियांतय करने के लिए पुश्करणा समाज के लालाणी व किकाणी व्यास समाज लोग वाकायदा आमंत्रित करते हैं और जब यह तिथियां तय हो जाती है तो धनतेरस के दिन पूरे समाज के सामने समारोहपूर्वक यह तिथियां घोशित की जाती है। इन तिथियों में हाथकाम, गणेश  परिक्रमा, पाणिग्रहण संस्कार सहित बरी की तिथियां व ब्राह्मण बालकों के यज्ञोपवित धारण करने की तिथियां  घोशित की जाती है। इसी के साथ पूरी दुनिया में रहने वाले पुश्करणा ब्राह्मणों में एक उत्साह दौड़ जाता है कि सावे के दिन बीकानेर जाना है।&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;वास्तव में सामूहिक शादियों का यह उत्सव सावा प्रतीक है ब्राह्मण समाज की प्रगतिशील  सोच का और समाजवादी दृश्टिकोण का। जिस समाजवाद की कल्पना कार्ल मार्क्स ,गाँधी  ने की थी, जिस समाजवाद को स्थापित करने का संकल्प भारतीय संविधान में लिया गया है उस समाजवादी सोच के अनुसार शादियाँ  करने की यह परम्परा बीकानेर के पुश्करणा समाज में सदियों पुरानी रही है। एक ही दिन सैकड़ों शादियाँ  होने से धन का अपव्यय नहीं होता और कम खर्च में सारा काम हो जाता है। महंगाई के इस दौर में सदियों पुरानी यह परम्परा उन परिवारों के लिए जीवनदान है जिनकी आय कम है और जो षादी के लाखों रूपये खर्च करने में अपने आप को असमर्थ समझता है और उन धनाढ्य वर्ग के लिए भी वरदान है जो अपनी विषिश्ट पहचान बनाना चाहता है। एक दिन सैकड़ो षादी मतलब लगभग हर घर में षादी इसलिए न तो रूठना  न मनाना न ज्यादा खर्च न ज्यादा दिखावा और न ही किसी प्रकार का आडम्बर। सभी एक ही जैसे चाहे अमीर हो या गरीब चाहे छोटा हो या बड़ा। साहब सावा है सो सावे की षादी परम्पराओं के अनुसार शादी ।&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;सावे की जो सबसे बड़ा फायदा होता है वह यह है कि सावे में षादी करने वाला दहेज का लेन देन बिल्कुल नहीं करता वैसे यहाँ  यह बात मैं आपको बताना चाहॅंगा कि पुश्करणा ब्राह्मण समाज में दहेज के लेन देन की प्रथा नहीं के बराबर रही है। आज भी इस समाज में दहेज हत्या या दहेज के कारण तलाक के मामले लाखों में कोई ही नजर आता है। सावे के कारण दहेज नहीं होना इस सामूहिक विवाह की सबसे बड़ी उपलब्धि कहा जा सकता है।&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;बीकानेर के पुश्करणा ब्राह्मण आज पूरे भारतवर्ष  में फैले हैं इसलिए सावे के दिनों में बीकानेर षहर लघु भारत का रूप धारण कर लेता है कोई बंगाल से आया होता है तो कोई महाराष्ट्र  या गुजरात से कोई उड़ीसा से आता है तो कोई मध्यप्रदेश  से। इस तरह पूरे षहर में खुषी का माहौल रहता है। देर रात तक षहर की सड़कों पर उत्सव का माहौल रहता है। पान की दुकानों पर, चैक के पाटों पर मेल मिलाप के साथ साथ चर्चाओं व खाने पीने के दौर चलते रहते हैं। बीकानेर षहर का हर भवन बुक रहता है और सारा शहर  रोषनी रौशनी  से नहाया होता है। औरते मंगल गीत गाती है तो पुरूश तैयारियों में लगे रहते हैं। ख़ुशी  का यह माहौल सारे शहर  को एकता के धागे में  पिरोता है। सावे वाले दिन पारम्परिक विष्णु  रूप में दूल्हे दौड़ते नजर आते हैं तो बाराती भी एक के बाद एक बारात में जाने की कोषिष करता है। बीकानेर के उत्साही युवक आजकल सावे के दिन तरह तरह के आयोजन&lt;/p&gt; &lt;p style="text-align: justify;"&gt;भी करते हैं जैसे बारहगुवाड़ चैक में विष्णु  रूप में जो दूल्हा सबसे पहले आता है उसे सम्मानित किया जाता है और बाकी आने वाले दूल्हों का भी अभिनन्दन किया जाता है। इसी तरह का आयोजन साले की होली के चैक सहित कईं अन्य चैकों में भी होता है। वर्तमान में राज्य सरकार द्वारा सावे के कारण सस्ती दरों पर चीनी, चावल व गेहूं , दूध के साथ ईंधन की व्यवस्था भी की जाती है तो समाज कल्याण विभाग द्वारा सामूहिक शादी के आयोजन मे शादी  करने के कारण चार हजार 
